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धारा 370, GST, राम मंदिर और नोटबंदी... PM मोदी के 76वें जन्मदिन पर जानें 12 साल में लिए गए 12 ऐतिहासिक फैसले

पीएम मोदी का आज 76वां जन्मदिन है. करीब 12 साल के कार्यकाल में अनुच्छेद 370, नोटबंदी, GST, महिला आरक्षण, तीन तलाक, अग्निपथ और नए आपराधिक कानून समेत कई बड़े फैसले हुए. इस रिपोर्ट में ऐसे ही 12 प्रमुख फैसलों और उनके प्रभाव पर नजर डालेंगे.

धारा 370, GST, राम मंदिर और नोटबंदी... PM मोदी के 76वें जन्मदिन पर जानें 12 साल में लिए गए 12 ऐतिहासिक फैसले
Image Source: IANS
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PM Modi Birthday: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं. 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन का एक लंबा हिस्सा राजनीति में बीता है. साल 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के बाद उनकी सरकार ने ऐसे कई बड़े फैसले लिए, जिनका असर राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक कानून, सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर दिखाई दिया. पीएम मोदी के समर्थक इन फैसलों को बड़े बदलावों की शुरुआत मानते हैं, जबकि विपक्ष ने कई मौकों पर इनके तरीके, असर और दूरगामी परिणामों पर सवाल उठाए हैं.

ऐसे में अगर पीएम मोदी के सरकार के करीब 12 वर्षों के कार्यकाल को देखें तो कुछ फैसले ऐसे हैं, जिनकी चर्चा आज भी देश की राजनीति में होती है. इनमें अनुच्छेद 370 में बदलाव से लेकर GST, नोटबंदी, महिला आरक्षण, तीन तलाक कानून, अग्निपथ योजना और नए आपराधिक कानून तक शामिल हैं. आइए अपनी इस रिपोर्ट में आपको बताते हैं इन 12 प्रमुख फैसलों की पूरी कहानी.

1. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 में बदलाव

5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों में बड़ा बदलाव किया. संसद में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी करने की प्रक्रिया शुरू हुई और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत तत्कालीन राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने का प्रावधान किया गया. यह व्यवस्था 31 अक्टूबर 2019 से प्रभावी हुई. यह फैसला मोदी सरकार के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णयों में गिना जाता है. सरकार ने इसे राष्ट्रीय एकीकरण से जोड़ा, जबकि विरोध करने वाले दलों और समूहों ने इसके संवैधानिक और राजनीतिक पहलुओं पर सवाल उठाए.

2. नोटबंदी से अचानक बदली अर्थव्यवस्था की तस्वीर

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8 नवंबर 2016 की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों का कानूनी चलन समाप्त करने की घोषणा की. आरबीआई के अनुसार इन नोटों की वैध मुद्रा की स्थिति 8 नवंबर 2016 की मध्यरात्रि से खत्म हुई. सरकार ने नकली नोट, काले धन और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक को इसके प्रमुख उद्देश्यों में बताया था. फैसले के बाद बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं. इसके आर्थिक प्रभाव को लेकर विशेषज्ञों और विपक्ष के बीच बहस हुई. वहीं, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार और वित्तीय संस्थाओं ने इसके बाद कई कदम उठाए.

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3. महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का फैसला 

2023 में संसद ने महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन पारित किया. इसके तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए करीब एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया. हालांकि इसका प्रभाव परिसीमन और संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़ा है. इस कानून को भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा संवैधानिक बदलाव माना गया. सरकार ने इसे महिला नेतृत्व को मजबूत करने वाला कदम बताया, जबकि इसके लागू होने की समयसीमा और प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस भी हुई.

4. तीन तलाक पर कानून

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मुस्लिम महिलाओं को एक बार में तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत से सुरक्षा देने के लिए 2019 में मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम बनाया गया. कानून ने इस तरह तलाक देने को गैर-कानूनी बनाया और उससे जुड़े दंड का प्रावधान किया. सरकार ने इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक न्याय से जोड़ा. दूसरी ओर, कानून को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस भी सामने आई.

5. GST ने बदला टैक्स सिस्टम

1 जुलाई 2017 को वस्तु एवं सेवा कर यानी GST लागू हुआ. इसे आजादी के बाद अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के सबसे बड़े सुधारों में गिना जाता है. GST ने केंद्र और राज्यों के कई अप्रत्यक्ष करों को एक साझा ढांचे में लाने का प्रयास किया. शुरुआती दौर में कारोबारियों को नई व्यवस्था समझने और तकनीकी प्रक्रियाओं से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. समय के साथ GST व्यवस्था में कई बदलाव किए गए और टैक्स प्रणाली लगातार विकसित होती रही.

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6. जनधन, डिजिटल इंडिया और UPI

वित्तीय समावेशन के लिए प्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरुआत 2014 में हुई और इसके साथ आधार तथा मोबाइल को जोड़कर JAM व्यवस्था को बढ़ावा मिला. सितंबर 2026 की सरकारी जानकारी के अनुसार जनधन खातों की संख्या 59.21 करोड़ तक पहुंच चुकी थी. डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में UPI ने आम लोगों के लेन-देन का तरीका बदल दिया है. NPCI के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में UPI पर करीब 24.51 अरब लेन-देन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये रही.

7. अग्निपथ और अग्निवीर योजना

2022 में केंद्र सरकार ने सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना शुरू की. इसके तहत अग्निवीरों को चार साल के लिए सेना में सेवा का अवसर दिया जाता है. सरकार के अनुसार प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 फीसदी अग्निवीरों को प्रदर्शन और संगठनात्मक जरूरत के आधार पर नियमित कैडर में शामिल किया जा सकता है. योजना को लेकर देश के कई हिस्सों में युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किए. सरकार ने इसे सेना को युवा और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने वाला भर्ती मॉडल बताया, जबकि आलोचकों ने चार साल की सेवा और उसके बाद रोजगार से जुड़े सवाल उठाए.

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8. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण

अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ. केंद्र सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई. 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए. यह मुद्दा लंबे समय से भारतीय राजनीति और सामाजिक विमर्श का हिस्सा रहा था. मंदिर निर्माण को बीजेपी अपने वैचारिक एजेंडे के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखती रही है.

9. नई शिक्षा नीति और नए आपराधिक कानून

29 जुलाई 2020 को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी. यह 1986 की शिक्षा नीति के बाद बड़ा नीतिगत बदलाव था और 21वीं सदी की पहली राष्ट्रीय शिक्षा नीति के रूप में सामने आई. इसके बाद आपराधिक न्याय व्यवस्था में भी बड़ा परिवर्तन हुआ. भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने IPC, CrPC और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली. ये नए कानून 1 जुलाई 2024 से लागू हुए.

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10. नागरिकता संशोधन कानून

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 संसद से पारित हुआ था, लेकिन इसके नियम 11 मार्च 2024 को अधिसूचित किए गए. कानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए कुछ निर्दिष्ट गैर-मुस्लिम समुदायों के पात्र लोगों के लिए भारतीय नागरिकता की प्रक्रिया में विशेष प्रावधान करता है. इस कानून को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे. सरकार ने इसे धार्मिक उत्पीड़न से प्रभावित लोगों को नागरिकता देने से जुड़ा कानून बताया, जबकि आलोचकों ने इसके धार्मिक आधार और नागरिकता नीति पर सवाल उठाए.

11. आतंकवाद के खिलाफ सैन्य कार्रवाई

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मोदी सरकार के कार्यकाल में आतंकवाद के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर भी कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं. 2016 में उरी हमले के बाद भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की. 2019 के पुलवामा हमले के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक हुई. इसके बाद अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद 7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी ढांचे से जुड़े नौ ठिकानों को निशाना बनाया गया. इन कार्रवाइयों ने भारत की सुरक्षा नीति और पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस को नई दिशा दी.

12. आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 फीसदी आरक्षण

2019 में संविधान के 103वें संशोधन के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी तक आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान किया गया. यह उन लोगों के लिए है जो मौजूदा SC, ST और OBC आरक्षण व्यवस्था के दायरे में नहीं आते और निर्धारित आर्थिक मानदंडों को पूरा करते हैं. इस फैसले ने आरक्षण की बहस को सामाजिक और जातिगत आधार से आगे आर्थिक मानदंड तक पहुंचाया. सुप्रीम कोर्ट में इसकी संवैधानिक वैधता को चुनौती भी दी गई थी, लेकिन नवंबर 2022 में अदालत ने बहुमत के फैसले से इसे बरकरार रखा.

कई बदलाव का गवाह रहा 12 साल का सफर

2014 से 2026 तक का दौर भारतीय राजनीति में कई बड़े नीतिगत और राजनीतिक बदलावों का गवाह रहा है. अनुच्छेद 370, GST और नोटबंदी जैसे फैसलों ने शासन और अर्थव्यवस्था पर बहस को बदला, जबकि महिला आरक्षण, तीन तलाक कानून और EWS आरक्षण ने सामाजिक नीतियों के क्षेत्र में नए अध्याय जोड़े. इन फैसलों को लेकर देश में अलग-अलग राय मौजूद है. किसी के लिए ये बड़े संरचनात्मक बदलाव हैं, तो किसी के लिए इनके क्रियान्वयन और प्रभाव की समीक्षा जरूरी है. यही लोकतांत्रिक व्यवस्था की खासियत भी है कि किसी नीति का मूल्यांकन केवल घोषणा से नहीं, बल्कि उसके वास्तविक परिणामों से होता है.

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बताते चलें कि प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन पर इन 12 फैसलों को देखने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने कई ऐसे निर्णय लिए, जिनकी चर्चा केवल संसद तक सीमित नहीं रही बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, अर्थव्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था और देश की सुरक्षा नीति तक पहुंची. आने वाले वर्षों में इन फैसलों का वास्तविक प्रभाव किस तरह सामने आता है, यही इस राजनीतिक दौर की सबसे महत्वपूर्ण कहानी होगी.

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