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एक को जल्द जमानत, दूसरा 6 साल से जेल में... स्वतंत्र को बेल मिली तो दिपके ने किसे किया याद ?

Abhijit Dipke: स्वतंत्र भारद्वाज को अंतरिम जमानत मिलने के बाद दिपके ने न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि एक को दिनो में बेल मिल जाती है तो दूसरा 6 साल से इंतजार कर रहा है..

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16 Sep 2026
( Updated: 16 Sep 2026
12:50 PM )
एक को जल्द जमानत, दूसरा 6 साल से जेल में... स्वतंत्र को बेल मिली तो दिपके ने किसे किया याद ?
Image Source: IANS
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Swatantra Bharadwaj Bail: दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जंतर-मंतर (Jantar Mnatrr)  पर एक छात्र कार्यकर्ता के पिता से कथित मारपीट के मामले में आरोपी हिंदूवादी इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी है... मंगलवार को बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही रकम के जमानती बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया.. अदालत ने साथ ही कई शर्तें भी लगाई हैं.. भारद्वाज को मामले, अपनी बचाव रणनीति या शिकायतकर्ता के परिवार को लेकर सोशल मीडिया पर किसी तरह की पोस्ट या चर्चा करने से रोक दिया गया है. उन्हें जांच में सहयोग करने और जमानत की अवधि खत्म होने पर आत्मसमर्पण करने का भी निर्देश दिया गया है...

जमानत के बाद अभिजीत दिपके ने उमर खालिद का किया जिक्र 

फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर स्वतंत्र भारद्वाज का वीडियो शेयर करते हुए न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाया. उन्होने लिखा कि एक व्यक्ति कैमरे पर पकड़े जाने के बावजूद कुछ ही दिनो में जमानत हासिल कर लेता है, जबकि दूसरा व्यक्ति बिना ट्रायल शुरू हुए छह साल से जेल में बंद है. दिपके ने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी पोस्ट में जिस स्थिति का जिक्र किया गया, उससे साफ संकेत उमर खालिद के मामले की ओर जाता है.
उमर खालिद सितंबर 2020 से दिल्ली दंगों से जुड़े एक UAPA मामले में जेल में हैं. इस मामले में लंबे समय से मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ने को लेकर सवाल उठते रहे हैं. यही वजह है कि स्वतंत्र भारद्वाज की जल्द मिली अंतरिम जमानत की तुलना खालिद की लंबी हिरासत से की जा रही है.

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अदालत ने जमानत देते हुए क्या कहा?

कोर्ट ने जमानत देते समय यह भी कहा कि जमानत अदालत के भरोसे की अभिव्यक्ति है, इसे किसी तरह की जीत या दिखावे की चीज नहीं बनाया जाना चाहिए. अदालत ने समाचार रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि गंभीर मामलों में जमानत मिलने के बाद विजय जुलूस निकालना या सोशल मीडिया पर इसका प्रदर्शन करना समाज और कानून-व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है.

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अदालत ने यह भी माना कि भारद्वाज करीब दस दिन से अधिक समय हिरासत में रह चुके हैं और इस दौरान उनसे पूछताछ पूरी हो चुकी है,, अदालत के मुताबिक, जिन आरोपों का सामना वह कर रहे हैं, उनमें अधिकतम सात साल तक की सजा का प्रावधान है.शिकायतकर्ता और उसकी नाबालिग बेटी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जमानत पर जरूरी शर्तें लगाई गई हैं.

4 सितंबर को हुई थी गिरफ्तारी

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भारद्वाज को 4 सितंबर को बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया था और बाद में न्यायिक हिरासत में भेजा गया. मामला 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है, जहां उन पर एक छात्र कार्यकर्ता के पिता के साथ मारपीट करने का आरोप लगा था. बाद में एक पॉडकास्ट में भारद्वाज ने कथित तौर पर इस घटना का जिक्र भी किया था. अब अदालत ने स्पष्ट किया है कि घटना से जुड़े वास्तविक तथ्यों का फैसला सोशल मीडिया या सार्वजनिक दावों से नहीं, बल्कि अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों के आधार पर होगा.

 

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टिप्पणियाँ 3
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Guest (अतिथि)
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JASVIR DAGAR
1 month ago

खबरें देखने मे तो अच्छी लगती है लेकिन जब फेंक खबरें होती है तो दिल टूट जाता है। मैने कई बार देखा है। NMF की खबरें सही नही पाई जाती है। ऐसी खबरें देखकर हमारा दिल खुश तो हो जाता है और दूसरों को शेयर भी करते हैं लेकिन जब खबर सही साबित नहीं होती है तो हमें भी बुरा लगता है। एक खबर कुछ समय पहले भी NMF दिखाई थीं जिसमे दीपके को अमेरिका भागते हुए एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया है। हम बहुत खुश हुए थे लेकिन जब कुछ समय पश्चात ओर खबरें देखी तो दीपके सरकार पर भड़कता हुआ दिखाया गया था तो अब तुम ही बताओ ऐसी खबरों पर कैसे विश्वास किया जा सकता है।

J
JASVIR DAGAR
1 month ago

खबरें देखने मे तो अच्छी लगती है लेकिन जब फेंक खबरें होती है तो दिल टूट जाता है। मैने कई बार देखा है। NMF की खबरें सही नही पाई जाती है। ऐसी खबरें देखकर हमारा दिल खुश तो हो जाता है और दूसरों को शेयर भी करते हैं लेकिन जब खबर सही साबित नहीं होती है तो हमें भी बुरा लगता है। एक खबर कुछ समय पहले भी NMF दिखाई थीं जिसमे दीपके को अमेरिका भागते हुए एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया है। हम बहुत खुश हुए थे लेकिन जब कुछ समय पश्चात ओर खबरें देखी तो दीपके सरकार पर भड़कता हुआ दिखाया गया था तो अब तुम ही बताओ ऐसी खबरों पर कैसे विश्वास किया जा सकता है।

J
Jayant Yadav
1 month ago

Abhijit Dipike is funded guided supported by USA deep states. His support to Umar khalid, Sharjil imam speak much about Abhijit Dipike ideologies. He claims to be social activist but certainly want to toople elected govt like Nepal Shrilanka Bangladesh. More truths, facts about Abhijit Dipike is in waiting.

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