6 महीने से नहीं की ड्यूटी, फिर भी मिली पूरी सैलरी, फंस गई कांग्रेस विधायक की डॉक्टर भतीजी, गिरी गाज
आरोप है कि कांग्रेस MLA की भतीजी सरकारी नौकरी के साथ-साथ एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से पोस्ट-ग्रेजुएट MD कोर्स कर रही हैं, इसलिए 6 महीने से क्लीनिक नहीं आईं, न ही इस्तीफा दिया.
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मार्च से सितंबर हो गया, सरकारी क्लीनिक में कोई डॉक्टर नहीं है. मरीज दिखाने आते हैं लेकिन डॉक्टर नदारद रहते हैं, हैरत की बात ये है कि रजिस्टर्ड में डॉक्टर की एंट्री है और उसे पूरी सैलरी भी मिल रही है. यह चौंकाने वाला मामला कर्नाटक के बागलकोट के एक सरकारी क्लीनिक का है और जिस डॉक्टर की बात हो रही है वह कांग्रेस विधायक की भतीजी अंकिता यारगल हैं. जिन पर आरोप है कि वह 6 महीने तक ड्यूटी पर नहीं गई लेकिन वेतन पूरा मिला.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सरकारी क्लीनिक का नाम नम्मा है. यहां मेडिकल ऑफिसर अंकिता यारगल ड्यूटी करती हैं, अंकिता स्थानीय कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी हैं. कई मौकों पर उनके साथ नजर भी आई हैं. बतौर मेडिकल ऑफिसर उन्हें 70 हजार वेतन मिलता है. लेकिन 6 महीने से क्लीनिक नहीं पहुंची. आरोप है कि वह सरकारी नौकरी के साथ-साथ एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से पोस्ट-ग्रेजुएट MD कोर्स कर रही हैं, इसलिए क्लीनिक नहीं आईं.
ड्यूटी से हटाने के निर्देश
मामला सामने आने के बाद अंकिता को ड्यूटी से हटा दिया गया है. बताया जा रहा है अंकिता के पिता राजकुमार यारगल बागलकोट के जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) हैं. उन्होंने ही बेटी को अपदस्थ करने के निर्देश दिए हैं. वहीं, अंकिता के खिलाफ जांच भी शुरू कर दी गई है. जांच में आरोप सही पाए जाने पर अंकिता पर कानूनी एक्शन हो सकता है. इसके साथ ही उन्हें 6 महीने की सैलरी भी लौटानी पड़ेगी.
क्या है नम्मा क्लीनिक?
‘नम्मा क्लीनिक' राज्य के ऐसे स्वास्थ्य केंद्र हैं जो लोगों को ज़िला अस्पताल भेजने के बजाय उनके घर के पास ही बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं देते हैं.
बागलकोट ज़िला पंचायत द्वारा जारी एक नोटिस के अनुसार, वह 3 मार्च से सितंबर तक क्लीनिक में गैरमौजूद रहीं, लेकिन रजिस्टर में उनकी डेली एंट्री का रिकॉर्ड रहता था. मामला संज्ञान में आने के बाद उन्हें ज़िला पंचायत CEO के सामने जांच के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह शामिल नहीं हुईं. उन्हें 18 सितंबर को दस्तावेज़ों और लिखित जवाब के साथ पेश होने का निर्देश दिया गया है.
जानकारी के मुताबिक, क्लीनिक में डॉक्टर के नहीं पहुंचने से मरीजों और स्थानीय लोगों को परेशानी हुई, विरोध दर्ज किया गया, इसके बाद अंकिता यारगल के खिलाफ बिना बताए, गलत तरीके से डबल ड्यूटी और पद पर रहते हुए लापरवाही के आरोप लगे. एक साथ दोनों काम करने को 'अनऑथराइज़्ड डुअल एंगेजमेंट' (बिना मंज़ूरी के दोहरी नौकरी) कहा जाता है और सरकारी नियम इसकी इजाज़त नहीं देते.
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हालांकि SN मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने डॉ. अंकिता को PG की पढ़ाई की अनुमति दी थी, लेकिन उन्होंने क्लीनिक से इस्तीफा नहीं दिया. ये मामला सरकारी स्वास्थ्य संस्थान के नियमों और डॉक्टरों के पेशेवर आचार नियमों के संभावित उल्लंघन का माना जा रहा है जिसकी जांच शुरू हो गई है.