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भूमि पेडनेकर को पड़ा PM मोदी का पक्ष लेना भारी, सोशल मीडिया पर जमकर हुईं ट्रोल

Bhumi Pendnekar: भूमि ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में कहा कि किसी भी मुद्दे पर विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन विरोध के दौरान किसी के लिए गाली-गलौज या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

भूमि पेडनेकर को पड़ा PM मोदी का पक्ष लेना भारी, सोशल मीडिया पर जमकर हुईं ट्रोल
Image Source: Bhumi Pendnkar/ Instagram
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Bhumi Pendnekar: नई दिल्ली के जंतर-मंतर पेपर पर NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन एक महीने से ज्यादा समय तक चलता रहा. इसी दौरान एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसके बाद वह विवादों में आ गईं. भूमि ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में कहा कि किसी भी मुद्दे पर विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन विरोध के दौरान किसी के लिए गाली-गलौज या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. उन्होंने खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर नाराजगी जताई. उनका कहना था कि देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी बात पूरी मजबूती से रखें, लेकिन भाषा हमेशा सभ्य और शालीन होनी चाहिए.

वीडियो में क्या बोलीं भूमि पेडनेकर?

अपने वीडियो में भूमि पेडनेकर ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से जो वीडियो सामने आ रहे हैं, उनमें जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह सही नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी संस्कृति और संस्कार हैं, इसलिए हमें किसी भी व्यक्ति के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. भूमि ने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हम अपने घर के बड़े-बुजुर्गों से इस तरह की भाषा में बात नहीं करते, वैसे ही सार्वजनिक जीवन में भी सम्मान बनाए रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि असहमति होना गलत नहीं है, लेकिन उसे सम्मानजनक तरीके से व्यक्त करना ज्यादा जरूरी है. वीडियो के आखिर में उन्होंने देश की एकता, शिक्षा और महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा जैसे गंभीर मुद्दों पर मिलकर काम करने की अपील भी की.

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सोशल मीडिया पर लोगों ने क्यों जताई नाराजगी?

भूमि पेडनेकर का यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनकी आलोचना शुरू कर दी.यूजर्स का कहना था कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों की भाषा पर तो सवाल उठाया, लेकिन उन घटनाओं पर कुछ नहीं बोला जिनमें प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित तौर पर मारपीट, लाठीचार्ज और सख्त पुलिस कार्रवाई हुई थी. लोगों का कहना था कि अगर किसी मुद्दे पर आवाज उठाई जाती है, तो सभी पहलुओं पर समान रूप से बात होनी चाहिए. इसी वजह से कई लोगों ने उनके बयान को एकतरफा बताया और कहा कि उन्होंने केवल एक पक्ष पर अपनी राय रखी.

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लोगों ने क्या-क्या प्रतिक्रियाएं दीं?

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भूमि के वीडियो पर हजारों लोगों ने अपनी राय दी. एक यूजर ने लिखा कि किसी की भाषा की आलोचना करना ठीक है, लेकिन अगर प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा हुई है तो उस पर भी बोलना चाहिए। दूसरे यूजर ने कहा कि जब दूसरे नेताओं द्वारा भी ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, तब भी इसी तरह की प्रतिक्रिया आनी चाहिए. एक अन्य यूजर ने लिखा कि सम्मान किसी से मांगने की चीज नहीं है, बल्कि अपने काम और व्यवहार से कमाया जाता है. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि जमीन पर संघर्ष कर रहे छात्रों की परेशानियों को समझे बिना केवल भाषा पर बात करना सही नहीं है. कई यूजर्स ने भूमि से सवाल किया कि उन्होंने पहले इन घटनाओं पर चुप्पी क्यों साधे रखी और अब केवल भाषा के मुद्दे पर ही प्रतिक्रिया क्यों दी.

NEET-UG 2026 आंदोलन के बीच बढ़ी बहस

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भूमि पेडनेकर का यह बयान ऐसे समय में आया जब NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे. बड़ी संख्या में छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की मांग कर रहे थे. इसी बीच भूमि के वीडियो ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी. कुछ लोगों ने उनके बयान का समर्थन किया और कहा कि विरोध के दौरान भाषा की मर्यादा बनी रहनी चाहिए, जबकि कई लोगों ने इसे अधूरा और एकतरफा बताया. इसी वजह से उनका वीडियो तेजी से वायरल हुआ और उन्हें सोशल मीडिया पर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा.

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