अभिजीत दिपके की CJP में पड़ी फूट! अलग पार्टी बनाकर सामने आए मनीष ब्रह्मभट्ट, जानें कौन हैं फाउंडर
Cockroach Janta Party: CJP से जुड़े रहे और जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले मनीष ब्रह्मभट्ट ने अपनी अलग पार्टी कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक (CJP-D) बनाने का ऐलान कर दिया है. मनीष का दावा है कि आंदोलन को खड़ा करने वाले सैकड़ों कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को संगठन की आगे की व्यवस्था में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला. इसी वजह से उन्होंने अलग राजनीतिक मंच बनाने का फैसला किया.
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Cockroach Janta Party: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. पार्टी के चर्चित होने के कुछ ही समय बाद अब इसके अंदर मतभेद की बात सामने आने लगी है. CJP से जुड़े रहे और जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले मनीष ब्रह्मभट्ट ने अपनी अलग पार्टी कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक (CJP-D) बनाने का ऐलान कर दिया है. मनीष का दावा है कि आंदोलन को खड़ा करने वाले सैकड़ों कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को संगठन की आगे की व्यवस्था में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला. इसी वजह से उन्होंने अलग राजनीतिक मंच बनाने का फैसला किया...
कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट?
मनीष ब्रह्मभट्ट करीब 41 साल के हैं और पेशे से मैनेजमेंट कंसल्टेंट बताए जाते हैं. उन्होंने हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी से बीकॉम और एफवाई एलएलबी की पढ़ाई की है. उन्होंने 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में पालनपुर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था. उन्हें 964 वोट मिले थे, जो कुल वोटों का करीब 0.53 फीसदी था और वह पांचवें स्थान पर रहे. उनके चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उस समय उनकी कुल संपत्ति करीब 44.42 लाख रुपये थी और उन पर कोई कर्ज नहीं था. हलफनामे में उनके खिलाफ चार लंबित आपराधिक मामलों का भी जिक्र किया गया था, जिनमें चोट पहुंचाने, भड़काऊ बयान और मानहानि से जुड़ी धाराएं शामिल थीं.
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CJP से क्यों हुए अलग?
मनीष ब्रह्मभट्ट का कहना है कि वह जंतर-मंतर पर हुए CJP के छात्र आंदोलन में स्वयंसेवक और कोऑर्डिनेटर के तौर पर जुड़े थे. उनका आरोप है कि आंदोलन में करीब 450 कोऑर्डिनेटर और बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने जमीन पर मेहनत की, लेकिन बाद में संगठन की लीडरशिप तय करते समय इन लोगों से सलाह नहीं ली गई.
अगस्त में ब्रह्मभट्ट और उनके साथी राहुल पांड्या ने छत्रपति संभाजीनगर में CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के घर के बाहर प्रदर्शन भी किया था. उनका कहना था कि आंदोलन को खड़ा करने वाले आम कार्यकर्ताओं को संगठन के भविष्य से जुड़े फैसलों में शामिल किया जाना चाहिए.
अभिजीत दिपके समेत तीन नेताओं पर सवाल
CJP में अगस्त के दौरान तीन प्रमुख चेहरों को नेतृत्व में जगह मिली. अभिजीत दिपके को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया, जबकि सौरव दास और आशुतोष रंका को सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई. यही तीनों चेहरे मीडिया और सरकार के सामने संगठन का पक्ष रखते नजर आए हैं.
ब्रह्मभट्ट ने इसी नेतृत्व व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि स्वयंसेवकों की राय लिए बिना नई टीम बनाई गई. उन्होंने कहा कि इसी असंतोष के बाद उन्होंने और उनके साथियों ने विरोध शुरू किया और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तक की. तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.
CJP को बताया 'टीम केजरीवाल'
CJP-D के ऐलान के दौरान ब्रह्मभट्ट ने CJP की मौजूदा लीडरशिप पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि मूल छात्र आंदोलन देशभर के लोगों और स्वयंसेवकों की मेहनत से खड़ा हुआ था, लेकिन सफलता के बाद आंदोलन को राजनीति की तरफ मोड़ दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि 12 सदस्यीय कोर टीम बनाने में आम कार्यकर्ताओं से सलाह नहीं ली गई और टीम के कई सदस्यों के आम आदमी पार्टी से संबंध रहे हैं. इसी आधार पर उन्होंने CJP पर 'टीम केजरीवाल' बनने का आरोप लगाया है.
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हालांकि, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं. उन्होंने कहा है कि CJP किसी पार्टी की 'बी टीम' नहीं है और वह छात्रों की 'ए टीम' है.फिलहाल CJP-D के गठन के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि CJP से जुड़े कार्यकर्ताओं और जेन-जी के बीच मनीष ब्रह्मभट्ट को कितना समर्थन मिलता है और क्या यह नया संगठन आने वाले समय में CJP के लिए बड़ी चुनौती बनता है.