4 बजे तक खड़े रहो…! अदालत के आदेश की अनदेखी, फंस गए SSP मेरठ, हाईकोर्ट ने दे दी सजा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना और कथित अनदेखी के मामले में आरोपी को तो सजा दी ही, SSP मेरठ पर भी एक्शन हो गया. वहीं सीजेएम मेरठ के आचरण पर भी गंभीर ऐतराज जताया.
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शादी का झांसा देकर जमानत हासिल करने और बाद में वादे से मुकरने के एक मामले में जिस तरह की कार्रवाई की है और जिस तरह की सजा लापरवाह पुलिस महकमे को दी है, उससे हड़कंप मच गया है. कोर्ट ने सख्त रुख़ अपनाते हुए आरोपी की जमानत तत्काल प्रभाव से रद्द कर उसे हिरासत में लेने का आदेश दिया है. इतना ही नहीं, कोर्ट के आदेश की अवहेलना और लापरवाही बरतने के आरोप में एसएसपी (SSP) मेरठ को भी कड़ी सजा दी और उन्हें शाम चार बजे तक कोर्ट रूम में ही खड़ा रखा.
इसके अलावा, हाई कोर्ट की ओर से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के आचरण को भी घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता करार दिया गया और मामले को प्रशासनिक जांच के लिए भेज दिया गया.
आपको बता दें कि न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने दाखिल जमानत निरस्तीकरण अर्जी को स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया. दरअसल, मेरठ के सरधना थाने में दर्ज मुकदमे के आरोपी को हाईकोर्ट की पीठ ने बीते 18 मार्च को उसके लिखित हलफनामे और इस शर्त के आधार पर ज़मानत दी थी कि वह जेल से बाहर निकलने के बाद पीड़िता से शादी करेगा, लेकिन वह बाहर निकलते ही अपने वादे से मुकर गया.
आरोपी ने किया था कोर्ट की शर्तों का उल्लंघन!
इसके बाद पीड़िता ने हाई कोर्ट में इसके ख़िलाफ़ अपील की और कहा कि आरोपी ने अंडरटेकिंग का उल्लंघन किया है, इस आधार पर उसकी ज़मानत रद्द की जाए. शनिवार को हुई सुनवाई के वक्त जब कोर्ट ने पीड़िता की मौजूदगी में आरोपी से शादी करने के बारे में पूछा, तो वह शादी करने से साफ़ मुकर गया और इनकार कर दिया.
इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आरोपी ने जमानत लेते समय दी गई अंडरटेकिंग का सीधा उल्लंघन किया है. कोर्ट ने तत्काल उसकी जमानत रद्द कर दी और मौके पर मौजूद एसएसपी मेरठ को निर्देश दिया कि आरोपी को तुरंत हिरासत में लेकर संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष न्यायिक हिरासत के लिए पेश किया जाए.
हाई कोर्ट ने आरोपी की ज़मानत रद्द कर उसे जेल भेजा!
कोर्ट ने आरोपी की ज़मानत रद्द करते हुए कहा कि उसने ज़मानत लेते वक्त दी गई अंडरटेकिंग का उल्लंघन किया है. इस दौरान पीठ ने एसएसपी मेरठ को निर्देश दिया कि वे आरोपी को तुरंत हिरासत में लें और संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष न्यायिक हिरासत में पेश करें.
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SSP मेरठ को कोर्ट ने दिया शाम 4 बजे तक अदालत में खड़े रहने का निर्देश!
इसके बाद कोर्ट में एसएसपी साहब ने स्पष्टीकरण दिया कि वे 28 सितंबर से दो अक्तूबर तक अवकाश पर थे और यह चूक उनके अधीनस्थों से हुई है. कोर्ट ने यह तो माना कि एसएसपी के जूनियर्स से गलती या लापरवाही हुई है, लेकिन वारंट का निष्पादन स्वयं SSP को ही कराना था. इसलिए, उसे कोर्ट में पेश कराना उन्हीं की जिम्मेदारी थी. हालांकि कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ कोई दंडात्मक आदेश तो नहीं दिया, लेकिन उन्हें शाम 4 बजे तक कोर्ट में ही खड़े रहने का निर्देश दिया और भविष्य के लिए सतर्क रहने की चेतावनी दी.
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सीजेएम मेरठ के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई के निर्देश
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कोर्ट ने न सिर्फ पुलिस प्रशासन को फटकार लगाई, बल्कि सीजेएम मेरठ के ख़िलाफ़ भी गहरी नाराजगी जताई. कोर्ट ने अपने आदेश में इस बात पर गंभीर ऐतराज जताया कि जब सीजेएम मेरठ को यह बात पता थी कि आरोपी को हाई कोर्ट में पेश करना है और उसके ख़िलाफ़ ग़ैर-जमानती वारंट जारी है, फिर भी उन्होंने उसे सीधे न्यायिक हिरासत में जेल कैसे भेज दिया. कोर्ट ने इसे सीजेएम मेरठ की घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता करार दिया. इसके बाद अदालत ने सख्त रुख़ अपनाते हुए निर्देश दिया कि इस आदेश की प्रति मेरठ के प्रशासनिक न्यायाधीश के समक्ष रखी जाए, ताकि सीजेएम के विरुद्ध प्रशासनिक स्तर पर उचित कार्रवाई की जा सके.