जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

‘शादी का मकसद सिर्फ बच्चे पैदा करना नहीं’, तलाक के केस में कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, पत्नी पर थे क्रूरता के आरोप

जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस एमडी सुमति की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, बच्चा पैदा न कर पाना पत्नी की 'वैवाहिक गलती' नहीं मानी जा सकती. कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा.

‘शादी का मकसद सिर्फ बच्चे पैदा करना नहीं’, तलाक के केस में कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, पत्नी पर थे क्रूरता के आरोप
Representative Image
Advertisement

तलाक के एक मामले में सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि बच्चा न होना अपने आप में 'क्रूरता' नहीं माना जा सकता. जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस एमडी सुमति की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, बच्चा पैदा न कर पाना पत्नी की 'वैवाहिक गलती' नहीं मानी जा सकती. 

दरअसल, अदालत में एक शख्स ने पत्नी से तलाक के लिए याचिका दायर की थी. उसने पत्नी पर क्रूरता के आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की थी. जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा, 

'शादी का एकमात्र मकसद बच्चा पैदा करना नहीं हो सकता. सिर्फ इसलिए कि किसी कपल के बच्चे नहीं हैं, किसी पार्टनर को वैवाहिक रिश्ते में असफल नहीं माना जा सकता.'क्या है पूरा मामला 

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कपल ने साल 2007 में शादी की थी. पति ने आरोप लगाया कि शुरुआत में तो उनका वैवाहिक जीवन सही चल रहा था, लेकिन बाद में पत्नी उसे अपमानित करने लगी, शक और बेइज्जत करने लगी. पति ने यह आरोप भी लगाया कि वह बात-बात पर घर छोड़कर चली जाती थी. पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी ने उसे सबके सामने नामर्द कहा, मारपीट की और मंगलसूत्र उतारकर घर चली गई. 

पत्नी ने आरोपों पर क्या कहा? 

Advertisement

हालांकि याचिकाकर्ता अदालत में आरोपों को सही साबित नहीं कर पाया. पत्नी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, उसने गर्भाशय में गांठ के लिए सर्जरी करवाई थी और बच्चा पैदा करने और वैवाहिक जीवन जारी रखने की उम्मीद में इलाज भी करवाया था. पत्नी ने जोर दिया कि उसने अपनी शादी बचाने के लिए बेबी कंसीव करने की भी पूरी कोशिश की. इसी आधार पर फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद उसने हाई कोर्ट का रुख किया. 

हालांकि हाई कोर्ट ने भी फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा. बेंच ने कहा, मारपीट, अपमान और घर छोड़ने के आरोप ठीक से साबित नहीं हुए.

‘शादी का एकमात्र मकसद बच्चा पैदा करना नहीं हो सकता. सिर्फ इसलिए कि जोड़े के बच्चे नहीं हैं, किसी जीवनसाथी को वैवाहिक रिश्ते में असफल नहीं माना जा सकता’कोर्ट ने क्या सुझाव दिया? 

Advertisement

इस मामले में कोर्ट ने पति-पत्नी को मेडिकल एक्सपर्ट से कंसल्ट करने की सलाह दी. बेंच ने कहा, ऐसे इलाज में हार्मोनल इंजेक्शन, बार-बार स्कैन और ब्लड टेस्ट, शरीर के अंदर किए जाने वाले प्रोसीजर, शारीरिक तकलीफ, चिंता, उम्मीद और निराशा के बार-बार आने वाले दौर शामिल हो सकते हैं.

कोर्ट ने कहा, 'जब कोई पत्नी, शारीरिक और भावनात्मक मुश्किलों को जानते हुए भी, बच्चा पैदा करने और वैवाहिक रिश्ते को बचाने की उम्मीद में खुशी-खुशी ऐसा इलाज करवाती है, तो उसके इस व्यवहार को किसी भी तरह से शादी को ठुकराना या पति के प्रति क्रूरता नहीं माना जा सकता.’

यह भी पढ़ें- ‘पीरियड्स में बेटी खुदको नहीं संभाल पाती…’, कोर्ट में माता-पिता की इमोशनल गुहार, मांगी गर्भाश्य हटाने की परमिशन

यह भी पढ़ें

कोर्ट ने आरोपों को हकीकत के उलट माना औऱ कहा, पत्नी का ऐसा इलाज करवाने के लिए तैयार होना इस आरोप के उलट है कि उसने शादी छोड़ दी थी या जानबूझकर वैवाहिक जीवन से दूर रही थी. अदालत ने जोर देते हुए कहा, जो महिला अपने पति के साथ परिवार बसाने की उम्मीद में बार-बार दर्दनाक इलाज से गुजरती है, उसे ऐसा व्यक्ति नहीं दिखाया जा सकता जिसने वैवाहिक बंधन को छोड़ दिया हो. अदालत ने पति की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि लंबे समय तक पति से दूर रहना पत्नी की क्रूरता हो सकती है. इसे शादी टूटने का आधार नहीं माना जा सकता है. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें