×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

‘गलती कर्मचारियों की तो अधिकारी भी आपराधिक जिम्मेदार', इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने कहा, जिस तरह सेना में कमांड रिस्पांसबिलिटी होती है, उसी तरह अब सचिव, विभागाध्यक्ष और अन्य शीर्ष अफसरों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि नीचे क्या हो रहा है?

‘गलती कर्मचारियों की तो अधिकारी भी आपराधिक जिम्मेदार', इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
Image By Meta AI
Advertisement

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में अफसरशाही पर बड़ी और कड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने यूपी सरकार से अफसरों की जवाबदेही तय करने को कहा है. न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की सिंगल बेंच में कहा गया कि अब समय आ गया है कि बड़े अधिकारियों के अधीनस्थ कर्मचारियों की गलती के लिए अधिकारियों को भी आपराधिक तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाए. 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी बरेली के व्यवसायी अवनीश कुमार अग्रवाल की याचिका पर की है. अदालत ने विशेष न्यायाधीश का वह आदेश निरस्त कर दिया है. जिसमें दो FIR के चलते पासपोर्ट के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किए जाने से इंकार कर दिया गया था. अब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया है. 

क्या था मामला? 

Advertisement

कोर्ट ने क्षेत्रीय पासपोर्ट प्राधिकरण बरेली को निर्देश दिया है कि वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार याचिकाकर्ता के पक्ष में पासपोर्ट जारी या नवीनीकरण करें. 

दरअसल, याचिकाकर्ता अवनीश कुमार के खिलाफ 18 साल पहले वाणिज्य कर अफसरों के साथ मिलकर दस्तावेज जलवाने के आरोप में FIR दर्ज की गई थी. यह FIR बिजनौर के नजीबाबाद और मंडावली में दर्ज हैं. इसी को आधार बनाते हुए पुलिस-प्रशासन ने अवनीश कुमार को पासपोर्ट के लिए NOC देने से इंकार कर दिया था. इसके बाद याची ने निचली अदालत का रुख किया, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली. इसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका लगाई. याची का कहना था कि एक FIR में जांच लगभग दो दशकों से लंबित है.

साल 2023 के फैसले का जिक्र 

बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए मनीष कुमार सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में हाई कोर्ट के 2023 के आदेश का जिक्र किया. जिसमें कहा गया था कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी वाली FIR की जांच की निगरानी के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाए और सरकारी विभागों की ओर से दर्ज प्राथमिकी की जांच चरणबद्ध ढंग से जल्दी पूरी की जाए. 

यह भी पढ़ें- "हाथ-पैर काट दिए जाएं तो लोग कानून मानेंगे..." रेप आरोपी की जमानत पर कर्नाटक HC की टिप्पणी

Advertisement

यह भी पढ़ें

कोर्ट ने कहा, जिस तरह सेना में कमांड रिस्पांसबिलिटी होती है, उसी तरह अब सचिव, विभागाध्यक्ष और अन्य शीर्ष अफसरों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि नीचे क्या हो रहा है? कोर्ट ने कहा कि हमें उम्मीद है कि UP सरकार अफसरशाही में जवाबदेही तय करने के लिए 'सुपीरियर रिस्पॉन्सिबिलिटी' का सिद्धांत अपनाएगी. 
कोर्ट ने कहा कि  अफसर अपने अधीनस्थों के भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, रिकार्ड दबाने, सरकारी आदेशों की अवहेलना को रोकने या दंडित करने में नाकाम रहते हैं तो उनका दायित्व तय होना चाहिए. उनको नाकामी के लिए आपराधिक रूप से भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
अधिक
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें