‘मैं ऑर्डर देता हूं…’ कागज उछाले, CJI पर अभद्र कमेंट किया, सुप्रीम कोर्ट में बवाल काटने वाले वकील पर एक्शन
सुप्रीम कोर्ट में एक वकील और याचिकाकर्ता की हरकत ने जजों को हैरान कर दिया. शख्स ने सुनवाई के दौरान जजों के सामने कागज उछाले और CJI के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया.
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देश की शीर्ष अदालत में माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया जब एक याचिकाकर्ता सारा लिहाज भूल बैठा. सुनवाई के दौरान शख्स ने पहले जजों से बदतमीजी से बात की, इसके बाद कागज उछालते हुए देश के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को गाली देने लगा.
याचिकाकर्ता के इस रवैया के बाद पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए साथ ले गई. यह पूरा वाकया जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने सुनवाई के दौरान हुआ.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, ये मामला लखनऊ के विकासनगर से जुड़ा था. जिसमें याचिका दायर करने वाला शख्स खुद अपना केस लड़ रहा था. इसी दौरान उसने खुद को स्वतंत्र बताया और जज को आदेश देने लगा. शख्स की पहचान लखनऊ के प्रबल प्रताप के तौर पर हुई है.
सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता ने कहा, न्यायिक अधिकारी महोदय, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के ACP के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दें. इस पर जस्टिस केवी विश्वनाथन ने हैरानी जताई और पूछा, आप मुझे आदेश दे रहे हैं? इसके जवाब में याचिकाकर्ता ने कहा, मेरी तरफ से बस इतना ही. सब कुछ रिकॉर्ड पर है.
इतना बोलने के बाद याचिकाकर्ता ने हाथ में लिए कागज हवा में उछाल दिए और गाली-गलौच करने लगा. उसने CJI सूर्यकांत के लिए भी अपमाननजक टिप्पणी की. हालांकि इस दौरान CJI सूर्यकांत अदालत में मौजूद नहीं थे. इसके बाद कोर्टरूम में मौजूद सुरक्षाकर्मी ने उसे फौरन पकड़ लिया. पुलिस ने भी हिरासत में लेते हुए पूछताछ शुरू कर दी. याचिकाकर्ता की हरकत देख एक बार को तो कोर्ट में मौजूद लोग बुरी तरह डर गए थे.
सुनवाई कर रही बेंच ने क्या कहा?
प्रबल प्रताप की हरकत पर जजों ने हैरानी और सहानुभूति दोनों जताई. जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा, ‘वह (याचिकाकर्ता) बहुत परेशान है, यह सब हताशा है. हमें उसके लिए केवल सहानुभूति है. हम उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते.’
सुप्रीम कोर्ट ने शख्स के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया, हां लेकिन इस अभद्रता के बाद बार कांउसिल लाइसेंस कैंसल करने जैसी कार्रवाई कर सकता है. यह घटना इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान हुई.
क्या थी वकील की मांग?
सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता ने लखनऊ के एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) और एक निजी कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन याचिकाकर्ता और वकील प्रबल प्रताप की हरकत के बाद कुछ समय के लिए कोर्ट रूम में अफरातफरी की स्थिति बन गई. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और याचिकाकर्ता को जबरन बाहर ले गए, जिसके बाद कार्यवाही फिर शुरू हो सकी.
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इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अधिवक्ता के व्यवहार को पूरी तरह से माफ न करने योग्य बताया था और कहा था कि सुप्रीम कोर्ट की संस्थागत गरिमा की रक्षा करना जरूरी है.
No no yeah jaan bujh kar k usko criminal banana galat he..media trial galat he..is desh me har wo shaksh jo agar aadmi he to judiciary se pareshan he...is desh me aadmi k liye survive karna Kitna difficult he ..usse bi mushkil agar wo kisi vivad me phas jaye aur justice k liye lade...aur yadi kisi mahila k sath dispute me pad jaye aur judiciary k khel dekhiye...itna injustice kar rahi he hamari judiciary...Justice k mazak bana k rakh diya in the name discretionary powers misusing the powers. They are living n get paid on our taxes and we r paying them for what injustice we are getting...this man above must be that much frustrated must be gone through all the atrocities of lower courts n high court then reaching supreme court...what a man will do if he dares to do and raise his voice..