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‘ये बदले का कॉम्पिटिशन नहीं’, पति ने कोर्ट में दिखाई पत्नी की प्राइवेट फोटो… जज ने लगाई फटकार, जानें क्या रुख अपनाया

कोर्ट ने पति की हरकत पर सख्त ऐतराज जताया लेकिन इस कदम को अवमानना मानने से इंकार कर दिया. हाई कोर्ट ने कहा,  यह कृत्य गंभीर चूक की श्रेणी में आता है.

‘ये बदले का कॉम्पिटिशन नहीं’, पति ने कोर्ट में दिखाई पत्नी की प्राइवेट फोटो… जज ने लगाई फटकार, जानें क्या रुख अपनाया
Image Source- Canva
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दिल्ली हाईकोर्ट में एक अजीब केस सामने आया. जिसने जजों को हैरान कर दिया. यहां तलाक की अर्जी के साथ एक शख्स ने अपनी पत्नी की निजी तस्वीरें भी भेज दीं. हालांकि सुनवाई कर रही बेंच ने इसके बावजूद पति पर अवमानना की कार्यवाही करने से इंकार कर दिया. 

इस मामले की सुनवाई जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच कर रही थी. कोर्ट ने पति की हरकत पर सख्त ऐतराज जताया लेकिन इस कदम को अवमानना मानने से इंकार कर दिया. हाई कोर्ट ने कहा, 
यह कृत्य गंभीर चूक की श्रेणी में आता है, हालांकि अर्जी दायर करने वाले और उनके वकील दोनों ने माफी मांग ली. 

ये बदले का कॉम्पिटिशन नहीं- कोर्ट 

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दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक मामलों में निजी तस्वीरों के दुरुपयोग पर सख्त नाराजगी जताई है. पत्नी की फोटो पेश करने पर कोर्ट ने युवक को फटकार लगाते हुए कहा, 'शादी का विवाद बदला लेने का कॉम्पिटिशन नहीं है.'

हाई कोर्ट यह भी कहा कि इस तरह से संवेदनशील दस्तावेजों को सीलबंद लिफाफे में सबमिट करना चाहिए. सुनवाई के दौरान अदालत ने यह माना कि इस तरह के कृत्य को खुली मंजूरी नहीं दी जा सकती, लेकिन इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि वैवाहिक विवाद के मामलों में इस तरह की गलतियां अकसर हो जाती हैं, इन्हें सुधारा जाना चाहिए. 

जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि ऐसे दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में होने चाहिए. इस दौरान साल 2015 एक फैसले का हवाला दिया गया. जिसमें निर्देश दिए गए थे कि संवेदनशील या निजी प्रकृति के दस्तावेजों को पहले अदालत की अनुमति लेकर सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाना चाहिए. 

उस केस में महिला याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि प्रतिवादियों ने फैमिली कोर्ट में दायर तलाक की अर्जी के साथ बिना किसी बदलाव के निजी तस्वीरें लगाकर उन निर्देशों का उल्लंघन किया था. 

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यह भी पढ़ें- ‘इस्लाम अपनाकर पिछड़ा होने का दावा नहीं कर सकते’, हिंदू से मुस्लिम बने शख्स पर कोर्ट का बड़ा फैसला, जानें पूरा मामला

बेंच ने कहा, जब प्रतिवादी पति और उसके वकील से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपने कार्यों को सही ठहराने की कोशिश नहीं की, बल्कि बिना शर्त माफी मांगी है. उन्होंने फैमिली कोर्ट में उन तस्वीरों को सीलबंद लिफाफे में रखने के लिए एक अर्जी दाखिल की है. पीठ ने कहा कि इसे गंभीर चूक माना जा सकता है, लेकिन अवमानना की कार्रवाई शुरु करना सही नहीं है. 

कोर्ट ने पति को क्या चेतावनी दी

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कोर्ट ने पति की हरकत पर ऐतराज जताते हुए उसे सख्त चेतावनी भी दी. जिसमें कहा गया, ये मामला महिला से संबंधित है ऐसे में भविष्य में इस तरह की कोई गलती नहीं होनी चाहिए. इसी के साथ जस्टिस सचिन दत्ता ने अवमानना याचिका का निपटारा करते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता महिला को अपनी पहचान छिपाने और संबंधित सामग्री की सुरक्षा के लिए फैमिली कोर्ट में जाने की छूट दी. कोर्ट ने फैमिली कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि वे तस्वीरों को खुले रिकॉर्ड से हटा दें, उन्हें सीलबंद लिफाफे में रखें. 

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