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‘शादीशुदा मर्द का लिव इन रिलेशनशिप में रहना अपराध नहीं’, इलाहाबाद हाई कोर्ट की बड़ा फैसला

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा, अगर शख्स किसी बालिग लड़की के साथ उसकी सहमति से रह रहा है तो ऐसा करना जुर्म के तहत नहीं आता है.

‘शादीशुदा मर्द का लिव इन रिलेशनशिप में रहना अपराध नहीं’, इलाहाबाद हाई कोर्ट की बड़ा फैसला
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Allahabad High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि  कोई शादीशुदा पुरुष जो किसी बालिग के साथ 'लिव-इन रिलेशनशिप' में रहे तो यह कोई अपराध नहीं बनता. 

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा, अगर शख्स किसी बालिग लड़की के साथ उसकी सहमति से रह रहा है तो ऐसा करना जुर्म के तहत नहीं आता है. उस शख्स पर आपराधिक केस नहीं चलाया जा सकता है. कोर्ट ने माना कि यह नैतिकता के उल्लंघन से जुड़ा मामला जरूर हो सकता है लेकिन ऐसा करने पर कानून के तहत आपराधिक केस नहीं चलाया जा सकता है. 

'नैतिकता और कानून को अलग-अलग'

जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिविजन बेंच ने इस मामले में नैतिकता और कानून को अलग-अलग तराजू पर तोला है. कोर्ट ने कहा, अगर कानून के तहत कोई अपराध बनता हुआ नहीं दिखता है, तो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत की कार्रवाई को सामाजिक राय या नैतिकता निर्देशित नहीं करेगी. कोर्ट ने अगले आदेश तक याचिकाकर्ताओं जोड़े की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए पुलिस को उनको गिरफ्तार न करने का आदेश दिया है. इसी के साथ कोर्ट ने शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक को याचिकाकर्ताओं की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए. 

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क्या है पूरा मामला?

दरअसल, शाहजहांपुर के जैतीपुर थाने में 8 जनवरी 2026 को याची महिला की मां ने एक FIR दर्ज कराई थी. जिसमें कहा गया था कि उनकी बेटी को नेत्रपाल नाम का शख्स बहला फुसला कर अपने साथ ले गया था. इसके बाद नेत्रपाल और उसके मददगार साथी के खिलाफ पुलिस ने BNS की धारा 87 में FIR दर्ज की. 

इस FIR को नेत्रपाल और उसकी पार्टनर (जो शिकायतकर्ता महिला की बेटी है) ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. कपल ने कोर्ट ने FIR रद्द करने की मांग करने के साथ सुरक्षा देने की मांग भी की. दोनों ने कोर्ट में बताया कि वह 'लिव-इन रिलेशनशिप' में रह रहे हैं और दोनों बालिग हैं. 

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महिला के साथ रहने वाले नेत्रपाल विवाहित हैं, ऐसे में यह आपराधिक केस की तरह मुकदमा चलाने की मांग की गई थी, लेकिन सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यह ऐसा कोई अपराध नहीं है, जिसके तहत कोई शादीशुदा शख्स किसी बालिग के साथ सहमति से लिव इन में रहता है तो कानूनी केस चले. कोर्ट अब इस मामले में अगली सुनवाई 8 अप्रैल को करेगा. इससे पहले कोर्ट ने परिवार को निर्देश दिए कि वह कपल को धमकी देना और परेशान करना बंद करे. 

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