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अदालतों के चक्कर काटते-काटते दर्ज हो गए 61 केस, सुप्रीम कोर्ट में 32 साल बाद कपल को मिला तलाक

कोर्ट ने इस केस की सुनवाई करते हुए सभी 61 मामलों को रद्द कर दिया. पति-पत्नी ने एक दूसरे के खिलाफ संगीन धाराओं में केस दर्ज करवा रखे थे.

अदालतों के चक्कर काटते-काटते दर्ज हो गए 61 केस, सुप्रीम कोर्ट में 32 साल बाद कपल को मिला तलाक
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Divorce Case in Supreme Court: देश की शीर्ष अदालत एक ऐसे मामले में फैसला सुनाया जो 32 साल से अटका हुआ था. सुप्रीम कोर्ट ने 32 साल पहले दायर किए गए तलाक के केस का निपटारा किया. कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दे दी है. यह मामला 1994 से लंबित था और केस में 61 मामले दर्ज थे. 

जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जवल भुईयां की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की. इससे पहले जनवरी-फरवरी में हुई सुनवाई के तहत कोर्ट ने इस मामले में जल्द से जल्द निपटारे की बात कही थी. कोर्ट ने दोनों पक्षों की मौजूदगी में इस बात पर जोर दिया कि तलाक का फैसला दोनों की मंजूरी से लिया गया है, इसमें कोई कानूनी बाधा नहीं है. 

कपल के बीच 61 मामले क्या थे?

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कोर्ट ने इस केस की सुनवाई करते हुए सभी 61 मामलों को रद्द कर दिया. पति-पत्नी ने एक दूसरे के खिलाफ संगीन धाराओं में केस दर्ज करवा रखे थे. जिनमें घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद और अन्य आपराधिक केस के साथ रिट याचिकाएं थीं. कोर्ट ने तलाक की प्रक्रिया पर फाइनल मुहर लगाकर इन मामलों को भी रद्द कर दिया. हालांकि कोर्ट ने अपने आदेश में कई शर्तों और पत्नी की एलिमनी संबंधी कई शर्तें भी रखीं. 

कोर्ट के आदेश की बड़ी बातें 

कोर्ट के आदेश के मुताबिक, पति को पत्नी को 1 करोड़ रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता देना होगा. इसके साथ ही लोनावला स्थित अपनी संपत्ति में पत्नी के हिस्सा देना होगा. 

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इसके अलावा पति को पत्नी के खाते में प्रॉपर्टी के शेयर के रूप में 90 लाख रुपए जमा करने के भी आदेश दिए गए हैं. इसके बाद ही सारे मामले खत्म माने जाएंगे. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि शादी से शुरू हुए सभी दीवानी और आपराधिक विवाद तलाक और समझौते की सभी शर्तों को खत्म करते हुए पूरे मान लिए जाएंगे. कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 (सुप्रीम कोर्ट का विशेषाधिकार) का इस्तेमाल करते हुए लंबे समय से अलग रह रहे पति-पत्नी के तलाक को मंजूरी दे दी. 

यह भी पढ़ें- पत्नी को मायके से मिली संपत्ति पर मौत के बाद किसका हक? कोर्ट ने कर दिया क्लियर, सुनाया बड़ा फैसला

इसी के साथ कोर्ट ने साफ किया कि भविष्य में कपल फिर से वही केस लेकर आएंगे तो उन पर सुनवाई नहीं होगी. यानी जिन मामलों को कोर्ट ने खत्म किया है उन पर कोई सुनवाई नहीं होगी. दोनों पक्षों ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस समझौते को मानते हुए कहा कि वे आगे कोई केस नहीं लड़ना चाहते. 

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