‘गलत मतलब निकाला गया, दुख हुआ…’ चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी पर दी सफाई, खुद बताया सच
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को अपनी टिप्पणी पर राजनेता से लेकर युवाओं तक की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है. अब CJI ने ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ वाली टिप्पणी पर सफाई दी है.
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‘कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें न तो कोई रोजगार मिलता है और न ही किसी पेशे में कोई जगह. उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया में, कुछ RTI कार्यकर्ता बन जाते हैं और कुछ अन्य तरह के कार्यकर्ता बनकर हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं.’
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को अपनी इस टिप्पणी पर राजनेता से लेकर युवाओं तक की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है. अब CJI सूर्यकांत ने ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ वाली टिप्पणी पर सफाई दी है.
कॉकरोच वाली टिप्पणी पर CJI ने सफाई में क्या कहा?
CJI सूर्यकांत ने कहा है कि एक फिजूल मामले की सुनवाई के दौरान की गई उनकी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया गया है, जिससे उन्हें बेहद पीड़ा हुई है. उन्होंने कहा, सोशल मीडिया और मीडिया के एक तबके ने उनकी टिप्पणी को युवाओं हमला बताकर पेश किया. उन्होंने कहा,
'मुझे दुख है कि मीडिया के एक हिस्से ने मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया. मैंने खास तौर पर उन लोगों की आलोचना की थी जो फर्जी डिग्री के जरिए बार यानी कानूनी पेशे में आए हैं. ऐसे लोग मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे सम्मानित पेशों में भी घुस गए हैं और वे परजीवियों की तरह हैं. यह कहना पूरी तरह गलत है कि मैंने देश के युवाओं की आलोचना की.’
सर्वोच्च न्यायधीश सूर्यकांत ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, उनका मकसद देश के युवाओं का अपमान करना कभी नहीं था. उन्होंने साफ किया कि वह उन लोगों की बात कर रहे थे जो फर्जी और जाली डिग्रियों के सहारे वकील बनने आए हैं, जबकि वकालत एक गंभीर पेशा है.
CJI सूर्यकांत युवाओं पर क्या कहा?
CJI सूर्यकांत ने देश के युवाओं को अपनी प्रेरणा बताया. उन्होंने तारीफ करते हुए कहा, ‘मुझे वर्तमान और भविष्य की हमारी युवा शक्ति पर हमेशा गर्व रहता है. भारत का हर युवा मुझे काम करने के लिए प्रेरित करता है. उनके प्रति बहुत सम्मान और स्नेह है.’
उन्होंने कहा, ‘यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मैं भी युवाओं को विकसित भारत का सबसे मजबूत स्तंभ मानता हूं.’
क्या था मामला, जिस पर CJI ने की टिप्पणी
दरअसल, एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. इस याचिका में आरोप लगाया गया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट बनाने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों को सही तरीके से लागू नहीं किया. वकील का कहना था कि वह तीसरी बार इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक नियमों का पालन नहीं हुआ.
CJI ने कहा, अगर दिल्ली हाई कोर्ट याचिकाकर्ता को सीनियर एडवोकेट का दर्जा देता है, तो सुप्रीम कोर्ट उसके पेशेवर आचरण को देखते हुए उस फैसले को रद्द कर देगा. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता की फेसबुक पर की गई पोस्ट में इस्तेमाल भाषा का जिक्र किया.
उन्होंने कहा, ‘समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं, और क्या आप उनके साथ हाथ मिलाना चाहते हैं? इस दौरान उन्होंने कहा था, कुछ बेरोजगार कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें न तो कोई रोजगार मिलता है और न ही किसी पेशे में कोई जगह. उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया में, कुछ RTI कार्यकर्ता बन जाते हैं और कुछ अन्य तरह के कार्यकर्ता बनकर हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं.’
पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाए थे सवाल
CJI सूर्यकांत के बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवी से करने पर कई लोगों ने सवाल उठाया. उद्धव गुट की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि न्यायपालिका आलोचना नहीं सह पा रही.
So a wait of over 3 years and yet no judgement on an issue which has a constitutional impact and weakens democracy is not worth calling out or expressing anguish over, Hon SC? The high priest of morality and justice calling those who raise their voice over the delay as ‘petty…
— Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) May 16, 2026Advertisement
प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, '3 साल से ज़्यादा का इंतज़ार और फिर भी एक ऐसे मुद्दे पर कोई फैसला नहीं आया, जिसका संवैधानिक असर है और जो लोकतंत्र को कमजोर करता है, तो क्या यह बात आलोचना या नाराजगी जाहिर करने लायक नहीं है?
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उन्होंने कहा, ‘न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करने वाले युवाओं और कार्यकर्ताओं को 'कॉकरोच' और 'परजीवी' कहना साबित करता है कि हमारी न्यायपालिका में आलोचना का सीधे-सीधे सामना करने की क्षमता नहीं है. ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.’
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