शादी के बाद अफेयर साबित करने के लिए होटल और कॉल रिकॉर्ड चेक करना राइट टू प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं- सुप्रीम कोर्ट
अब राइट टू प्राइवेसी की आड़ में अवैध रिश्ते नहीं छुपा सकते, तलाक के एक मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यह बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा, अफेयर साबित करने के लिए होटल और कॉल रिकॉर्ड खंगालना निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं है.
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पति-पत्नी को एक दूसरे पर अफेयर का शक हो तो होटल बुकिंग या कॉल रिकॉर्ड चेक करने में कुछ भी गलत नहीं. ऐसा करना निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए ये बेहद अहम टिप्पणी की है.
सर्वोच्च अदालत का संदेश साफ था कि अब राइट टू प्राइवेसी की आड़ में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर (विवाह के बाद अवैध संबंध) नहीं छुपा पाएंगे. कोर्ट ने साफ किया कि अगर अफेयर या अवैध रिलेशनशिप को साबित करने के लिए कॉल, या होटल बुकिंग का रिकॉर्ड है तो उसे अदालत में सबूतों के तौर पर पेश किया जा सकता है.
क्या है पूरा मामला?
इस मामले की सुनवाई जस्टिस मनमोहन और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच कर रही थी. उनके सामने एक केस आया था जिसमें एक शख्स ने फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी और कहा गया था कि उसके खिलाफ जयपुर के होटल का रिकॉर्ड पेश किया जाए और उसके दो मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल भी दी जाए.
शख्स पर आरोप था कि वह जयपुर में किसी दूसरी महिला के साथ होटल में ठहरा था. फैमिली कोर्ट ने इसी आरोप की पुष्टि के लिए होटल का रिकॉर्ड मांगा था. जिस पर शख्स ने नाराजगी जताई थी. शख्स ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए निजता का हवाला दिया. इस पर कोर्ट ने कहा था कि निजता हर शख्स का मूल अधिकार है, लेकिन यह हर जगह लागू नहीं होता. अगर जनहित या फिर किसी मामले में न्याय के लिए ऐसा किया जाना जरूरी है तो फिर निजता के अधिकार की परिभाषा अलग होती है.
क्या थी हाई कोर्ट की टिप्पणी?
हाई कोर्ट का कहना था, 'हिंदू मैरिज एक्ट साफ तौर पर कहता है कि अफेयर तलाक का आधार हो सकता है. किसी पर शादी से इतर रिलेशन का आरोप लगता है, तो उसकी जांच के प्रोसेस में राइट टू प्राइवेसी के उल्लंघन जैसी बात नहीं कही जा सकती.’
दऱअसल, ये मामला तलाक से जुड़ा है, जिसमें एक महिला ने अपनी से तलाक लेने की अर्जी दाखिल की थी. आरोप लगाया था कि पति का किसी और महिला से अफेयर है, साथ ही उस पर क्रूरता का भी आरोप था. महिला ने दावा किया था कि उसका पति जयपुर के एक होटल में किसी और महिला और उसकी बेटी के साथ रुका था.
महिला ने आरोपों की पुष्टि के लिए उस होटल की बुकिंग डिटेल की जांच की मांग की थी. साथ ही कॉल रिकॉर्ड चेक करने की भी मांग की. पत्नी की इस मांग को कोर्ट ने सही माना. जबकि पति का कहना था कि यह उसकी प्राइवेसी से जुड़ा मैटर है.
अदालत में पति ने यह भी कहा कि उसकी निजता के साथ-साथ एक महिला की प्राइवेसी भी इससे प्रभावित होगी. अगर यह डिटेल निकली तो फिर उस महिला की छवि पर भी असर पड़ेगा, जिस पर आरोप है कि वह मेरे साथ होटल में थी. शख्स ने दलील दी थी कि यह महिला की नाबालिग बेटी के लिए भी यह ठीक नहीं है.
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हालांकि हाई कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया था. इसके बाद शख्स ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.
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