6 महीने में 23 फांसी की सजा सुनाने वाले जज रवि कुमार दिवाकर का ट्रांसफर, फास्ट ट्रैक से फैमिली कोर्ट भेजा गया
फास्ट ट्रैक कोर्ट में अपराधियों को मौत की सजा सुनाने वाले जज रवि कुमार दिवाकर अब फैमिली कोर्ट में पारिवारिक मामलों का निपटारा करेंगे.
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अपने फैसलों से सुर्खियों में रहने वाले मुजफ्फरनगर फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर चर्चा में है. इस बार उन्होंने किसी अपराधी को फांसी की सजा नहीं सुनाई है. चर्चा की वजह तो उनका ट्रांसफर है. उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट से फैमिली कोर्ट में शिफ्ट कर दिया गया है. यानी इस कोर्ट में पारिवारिक मामलों का निपटारा करेंगे, जहां अपराधी की सजा फांसी तक नहीं पहुंचेगी.
जज रवि कुमार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में 6 महीने में 23 लोगों को मौत की सजा सुनाई थी. जिसमें कई गंभीर केसेज शामिल हैं. जैसे हत्या, पत्नी को जिंदा जलाने जैसे कई गंभीर अपराध शामिल थे, लेकिन अब वे आपराधिक नहीं पारिवारिक मामलों का निपटारा करेंगे.
17 साल की सेवा में 36 फांसी की सजा
रवि कुमार दिवाकर का तबादला कर उन्हें मुजफ्फरनगर की ही फैमिली कोर्ट का अतिरिक्त प्रिंसिपल जज बनाया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक जज रवि कुमार दिवाकर अपनी 17 साल की सेवा में कुल 36 दोषियों को फांसी की सजा सुना चुके हैं. मुजफ्फरनगर में उन्होंने 6 अप्रैल से 7 सितंबर के बीच 10 मामलों में 23 दोषियों को मृत्युदंड दिया है. अगस्त में जिला जज ने उनकी कोर्ट से करीब 100 मुकदमों को वापस लेकर दूसरी अदालतों में ट्रांसफर कर दिया था. 7 सितंबर को शाहपुर की शहजादी हत्याकांड में पति नदीम को फांसी की सजा सुनाते हुए दिवाकर ने फैसले में अपना दर्द बयां किया था. उन्होंने कहा था-
‘मैं मरना पसंद करूंगा, लेकिन डरपोक जज कहलवाना नहीं. जब तक मैं अपने सिद्धांतों पर चल सकता हूं, तब तक सेवा में रहूंगा, वरना इस्तीफा दे दूंगा.’
उनकी जगह अपर सत्र न्यायाधीश शिव कुमारी को फास्ट ट्रैक कोर्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल मंजीत सिंह श्योराण ने शुक्रवार को उनके तबादले का आदेश जारी किया.
कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर?
46 साल के रवि कुमार दिवाकर साल 2009 में न्यायिक सेवा से जुड़े थे. उन्होंने बीकॉम, एलएलबी. और एलएलएम की पढ़ाई की है. मुजफ्फरनगर से पहले वह आजमगढ़, सुल्तानपुर और बदायूं में सेवा दे रहे थे. अप्रैल 2021 से जुलाई 2022 तक वाराणसी में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रहे, फिर बरेली गए. अप्रैल से नवंबर 2025 तक चित्रकूट में रहे और उसके बाद मुजफ्फरनगर आए. अब वह मुजफ्फरनगर में फैमिली कोर्ट के अतिरिक्त प्रिंसिपल जज के तौर पर काम करेंगे.