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‘बच्चों को इंटरनेट के इस्तेमाल से नहीं रोक सकते’, पूरी पाबंदी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट, सरकार को दिए बड़े निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इंटरनेट पर गलत कंटेंट होने के कारण उसे बच्चों के लिए पूरी तरह बैन करना समाधान नहीं है. ऐसी पाबंदियों से बच्चे कम सुरक्षित वेबसाइटों और प्लेटफॉर्म पर जा सकते हैं.
17 Oct 2026
(
Updated:
17 Oct 2026
03:41 PM
)
Image Source- NMF Input
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सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के लिए इंटरनेट पर रोक लगाने से इंकार कर दिया. शीर्ष अदालत ने कहा है कि इंटरनेट इस्तेमाल करना हर व्यक्ति, यहां तक कि हर उम्र के बच्चे का मौलिक अधिकार है. बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना बेतुका होगा.
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने मामले में सुनवाई करते हुए ये बड़ी टिप्पणी की. इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने उम्र के आधार पर इंटरनेट पर बैन लगाने से इंकार कर दिया. बेंच ने कहा,
‘संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(a) के तहत बच्चों को भी इंटरनेट इस्तेमाल करने, जानकारी हासिल करने और अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है.’
‘आजादी और सुरक्षा एक दूसरे के खिलाफ नहीं’
कोर्ट ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को इंटरनेट से हटाने की व्यवस्था मजबूत करने से जुड़े मामले में ये टिप्पणियां की हैं. कोर्ट ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनकी आजादी एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं. उन्हें दोनों का अधिकार है. इंटरनेट पर गलत कंटेंट होने के कारण उसे बच्चों के लिए पूरी तरह बैन करना समाधान नहीं है. ऐसी पाबंदियों से बच्चे कम सुरक्षित वेबसाइटों और प्लेटफॉर्म पर जा सकते हैं, साथ ही, ऑनलाइन धमकी या शोषण का सामना करने वाले बच्चे शिकायत करने से भी डर सकते हैं.
केंद्र सरकार को दिए निर्देश
कोर्ट ने केंद्र सरकार को ऐसे कंटेंट का नेशनल डेटाबेस बनाने और सोशल मीडिया कंपनियों को दो घंटे के भीतर पुलिस को रिपोर्ट देने समेत कई निर्देश दिए हैं. निर्देशों के अनुसार,
- किसी सामग्री को डेटाबेस में दर्ज करने से पहले उसकी जांच होगी
- 3 प्रशिक्षित विशेषज्ञ स्वतंत्र रूप से तय करेंगे कि वह बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी है या नहीं
- जांच का रिकॉर्ड रखा जाएगा डेटाबेस तक किसने पहुंच बनाई, इसकी जानकारी भी दर्ज होगी
- समय-समय पर स्वतंत्र ऑडिट किया जाएगा, गलत तरीके से दर्ज सामग्री को हटाने और इसकी शिकायत करने की व्यवस्था भी बनानी होगी
- सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री का मिलान डेटाबेस से कर सकेंगी
- इससे वही कंटेंट दोबारा अपलोड होने पर भी पहचाना जा सकेगा
- कंटेंट हटाने के बाद कंपनियां पुलिस को रिपोर्ट करेंगी
सुप्रीम कोर्ट ने दिए सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के लिए इंटरनेट बैन करने से मना कर दिया, लेकिन बच्चों को ऑनलाइन खतरे से बचाने के लिए कई सुझाव भी दिए हैं. इनमें
- बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट प्राइवेट करने का सुझाव
- अंजान लोगों से संपर्क सीमित करने और एडल्ट मैसैज पर रोक
- विज्ञापनों और एडल्ट कंटेट की निगरानी, रिपोर्ट और कंट्रोल
- छोटे बच्चों के लिए टीन अकाउंट या चाइल्ड मोड में इस्तेमाल का सुझाव
- सोशल मीडिया के इस्तेमाल से पहले पैरेंट्स की परमिशन और निगरानी जैसी सहमति
सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों से ऐसे मामलों की जानकारी संबंधित विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU), स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल को देने के लिए कहा है.
यह भी पढ़ें- ‘किस देश में युवा सरकार से सवाल पूछ सकते हैं?’, UN में गरजे इंडियन डिप्लोमैट, CJP प्रदर्शन पर रिपोर्ट को किया खारिज
बेंच ने इस संबंध में कंपनियों पर जुर्माना तय करने के निर्देश भी दिए हैं. कोर्ट ने केंद्र सरकार से IT कानून और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर आर्थिक जुर्माना लगाने की व्यवस्था पर विचार करने को कहा है. साथ ही साथ पेड और सब्सक्रिप्शन वाली वेबसाइटों और सेवाओं की भी सख्त जांच करने को कहा है.
बेंच ने इस संबंध में कंपनियों पर जुर्माना तय करने के निर्देश भी दिए हैं. कोर्ट ने केंद्र सरकार से IT कानून और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर आर्थिक जुर्माना लगाने की व्यवस्था पर विचार करने को कहा है. साथ ही साथ पेड और सब्सक्रिप्शन वाली वेबसाइटों और सेवाओं की भी सख्त जांच करने को कहा है.
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