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माता-पिता नहीं थे साथ, मुस्लिम भाई बना सहारा! हिंदू बहन की शादी में निभाई हर रस्म

UP Marriage Viral Video: उत्तर प्रदेश के बदायूं में एक शादी जिलेभर में चर्चा का विषय बनी हुई है. हिंदू लड़की के माता-पिता के निधन के बाद मुस्लिम भाई ने पूरी जिम्मेदारी निभाई और हिंदू बहन का कन्यादान किया.

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13 Jul 2026
( Updated: 13 Jul 2026
11:39 AM )
माता-पिता नहीं थे साथ, मुस्लिम भाई बना सहारा! हिंदू बहन की शादी में निभाई हर रस्म
Image Source: Meta AI (Representative Image)
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UP Marriage Viral Video: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के उझानी कस्बे में हुई एक शादी ने यह साबित कर दिया कि सच्चे रिश्ते सिर्फ खून से नहीं, बल्कि भरोसे प्यार और अपनापन से बनते हैं. यह शादी सिर्फ दो लोगों के विवाह तक सिमित नहीं रही, बल्कि इंसानियत की ऐसी मिसाल बन गई जिसने हर किसी का दिल छू लिया. ऐसे समय में जब अक्सर समाज में धर्म के नाम पर दूरियां और मतभेद देखने को मिलते हैं, वहीं इस शादी ने लोगों को यह एहसास कराया कि इंसानियत हर पहचान से बड़ी होती हैं..

माता-पिता के न होने पर भाई ने संभाली हर जिम्मेदारी

दीपांशी के माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं. ऐसे में उनकी शादी की जिम्मेदारी कौन निभाएगा, यह सबसे बड़ा सवाल था. लेकिन वर्षों पहले दीपांशी को अपनी बहन मान चुके रियासत उर्फ बबलू सिद्दीकी ने यह जिम्मेदारी पूरे दिल से अपने ऊपर ले ली. उन्होंने सिर्फ मदद ही नहीं की, बल्कि एक सगे भाई की तरह हर छोटी-बड़ी जिम्मेदारी निभाई. शादी की तैयारियां, मेहमानों का स्वागत, बारात की व्यवस्था और हर रस्म को उन्होंने पूरी लगन और खुशी के साथ पूरा किया. उन्होंने कहीं भी यह महसूस नहीं होने दिया कि दीपांशी अपने माता-पिता के बिना यह दिन देख रही हैं.

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कन्यादान की रस्म ने हर किसी की आंखें कर दीं नम

शादी हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुई और सबसे भावुक पल तब आया जब कन्यादान की रस्म निभाई गई. यह जिम्मेदारी भी बबलू सिद्दीकी ने निभाई. यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया. खून का रिश्ता न होने के बावजूद उन्होंने अपनी बहन का हाथ उसी सम्मान और प्यार से दूल्हे के हाथ में सौंपा, जैसा कोई सगा भाई करता है. उस पल वहां मौजूद लोगों ने सिर्फ एक भाई का फर्ज नहीं देखा, बल्कि इंसानियत का सबसे खूबसूरत रूप देखा.

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विदाई के समय छलक पड़े सभी के आंसू

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जब विदाई का समय आया तो माहौल बेहद भावुक हो गया. बबलू सिद्दीकी और उनके परिवार की आंखें भी नम थीं. उन्होंने दीपांशी को कभी यह एहसास नहीं होने दिया कि इस खास मौके पर उसके माता-पिता उसके साथ नहीं हैं. परिवार के हर सदस्य ने उसे बेटी और बहन की तरह प्यार दिया. यह विदाई सिर्फ एक दुल्हन की विदाई नहीं थी, बल्कि एक ऐसे रिश्ते की कहानी थी जो भरोसे और अपनापन की मजबूत नींव पर खड़ा था.

यह कहानी पूरे समाज को देती है एक खूबसूरत संदेश

दीपांशी ने भी खुले दिल से कहा कि बबलू सिद्दीकी ने हमेशा सगे भाई से बढ़कर उनका साथ दिया. उनके प्यार, सम्मान और जिम्मेदारी ने यह साबित कर दिया कि रिश्ते धर्म देखकर नहीं निभाए जाते. यह शादी हमें सिखाती है कि अगर दिल साफ हो और नीयत अच्छी हो, तो इंसानियत हर भेदभाव से ऊपर होती है. आज के समय में ऐसी कहानियां समाज को जोड़ने का काम करती हैं और यह विश्वास दिलाती हैं कि प्यार, भरोसा और अपनापन ही सबसे बड़े रिश्ते होते हैं.

इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है

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बदायूं की यह शादी सिर्फ एक स्थानीय खबर नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है. यह कहानी याद दिलाती है कि धर्म, जाति और पहचान से पहले हम सभी इंसान हैं. जब लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में बिना किसी भेदभाव के साथ खड़े होते हैं, तभी समाज मजबूत बनता है. दीपांशी और बबलू सिद्दीकी की यह अनोखी भाई-बहन की कहानी आने वाले समय तक लोगों को यह संदेश देती रहेगी कि दुनिया में सबसे मजबूत रिश्ता वही होता है, जो दिल से निभाया जाए.

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