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अयोध्या में क्या होने वाला है बड़ा बदलाव? चंपत राय के पत्र से मची हलचल

Ram Mandir Case: ट्रस्ट के नए महासचिव कृष्ण मोहन और कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी ने चंपत राय से मुलाकात की. इसके कुछ समय बाद कई प्रमुख संत, महंत और ट्रस्ट से जुड़े पूर्व सदस्य भी कोषाध्यक्ष से मिलने पहुंचे. करीब एक घंटे तक चली इस बैठक के बाद बाहर आए संतों ने सिर्फ इतना कहा कि आने वाले समय में कुछ बड़ा फैसला देखने को मिल सकता है.

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09 Jul 2026
( Updated: 09 Jul 2026
10:41 AM )
अयोध्या में क्या होने वाला है बड़ा बदलाव? चंपत राय के पत्र से मची हलचल
Image Source: IANS
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Ram Mandir Case: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर इन दिनों हलचल तेज हो गई है.  ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की ओर से जारी किए गए एक पत्र के बाद लगातार बैठकों ओर मुलाकातों का दौर शुरू हो गया है. बताया जा रहा है कि इस पत्र के सामने आने के बाद ट्रस्ट के मौजूदा ओर पूर्व पदाधिकारियों के बीच बातचीत बढ़ गई है. माना जा रहा है कि सभी लोग हालात को सामान्य करने ओर किसी भी तरह के विवाद को आगे बढ़ने से रोकने कि कोशिश में जुटे है. इसी सिलसिले में ट्रस्ट के नए महासचिव कृष्ण मोहन और कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी ने चंपत राय से मुलाकात की. इसके कुछ समय बाद कई प्रमुख संत, महंत और ट्रस्ट से जुड़े पूर्व सदस्य भी कोषाध्यक्ष से मिलने पहुंचे. करीब एक घंटे तक चली इस बैठक के बाद बाहर आए संतों ने सिर्फ इतना कहा कि आने वाले समय में कुछ बड़ा फैसला देखने को मिल सकता है.

महासचिव पद से हटने के बाद नाराज बताए जा रहे हैं चंपत राय

सूत्रों के मुताबिक, महासचिव पद से हटाए जाने के बाद चंपत राय काफी नाराज हैं. उनका मानना है कि कठिन समय में उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिला. उन्होंने हाल ही में जारी अपने पत्र में रामायण का एक श्लोक भी लिखा, जिसे कई लोग उनकी भावनाओं और पीड़ा को व्यक्त करने की कोशिश मान रहे हैं.
बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के भीतर अब यह कोशिश की जा रही है कि मामला ज्यादा न बढ़े और चंपत राय की ओर से कोई दूसरा पत्र सार्वजनिक न हो. इसी वजह से लगातार बातचीत और मुलाकातों का दौर जारी है. 

संघ और विश्व हिंदू परिषद भी बताए जा रहे हैं सक्रिय

जानकारी के अनुसार, चंपत राय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी फोन पर बात की है. सूत्रों का कहना है कि उनसे कुछ समय तक शांत रहने और बातचीत के जरिए स्थिति को संभालने का आग्रह किया गया है. हालांकि इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है                                                                                      

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संतों ने व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई

कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी ने भी कई प्रमुख संतों और मंदिरों के महंतों के साथ लंबी बैठक की. बैठक के बाद श्री राम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास ने कहा कि आने वाले समय में ट्रस्ट में ऐसे बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिनकी हर तरफ सराहना होगी.
वहीं, बड़ा भक्तमाल मंदिर के महंत अवधेश दास ने बताया कि बैठक का मुख्य विषय राम मंदिर की व्यवस्था को और बेहतर बनाना था. उनका कहना था कि ट्रस्ट के कामकाज में सुधार को लेकर गंभीर चर्चा हुई है.

ट्रस्ट में संतों की भूमिका बढ़ाने की उठी मांग

जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण ने कहा कि ट्रस्ट के संचालन में संतों की भूमिका और मजबूत होनी चाहिए. उनका मानना है कि राम मंदिर आंदोलन में संत समाज ने पीढ़ियों तक महत्वपूर्ण योगदान दिया है, इसलिए ट्रस्ट के फैसलों और नेतृत्व में उनकी भागीदारी भी अधिक होनी चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि अगर संतों की बातों को समय रहते महत्व दिया जाता, तो शायद आज जैसी स्थिति पैदा नहीं होती.उनके मुताबिक, ट्रस्ट के कई लोग भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं.

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22 जुलाई से पहले हो सकती है संतों की बड़ी बैठक

सूत्रों के अनुसार, 22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक से पहले संतों और महंतों की एक बड़ी बैठक भी हो सकती है. बताया जा रहा है कि इस बैठक में देशभर से करीब 500 से ज्यादा संतों के शामिल होने की संभावना है.
माना जा रहा है कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी मामले के बाद समाज में फैली नकारात्मक सोच को दूर करना होगा. संतों से यह भी आग्रह किया जा सकता है कि वे अपने प्रवचनों और धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को सही जानकारी दें और यह संदेश पहुंचाएं कि पूरे ट्रस्ट को इस मामले से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

आने वाले दिनों में बड़े फैसलों पर रहेंगी नजरें

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राम मंदिर ट्रस्ट में चल रही लगातार बैठकों और बातचीत से साफ है कि आने वाले दिनों में कुछ अहम फैसले लिए जा सकते हैं. फिलहाल सभी की नजर 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक और उससे पहले प्रस्तावित संतों की बैठक पर टिकी हुई है. माना जा रहा है कि इन बैठकों के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, संतों की भूमिका और भविष्य की रणनीति को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकते हैं.

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