जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद RSS का बड़ा प्लान, 100 से ज्यादा शहरों के Gen-Z युवाओं से बात करेंगे मोहन भागवत
Gen-Z के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी जुड़ने के लिए मुहिम शुरू करने की तैयारी कर ली है. सरसंघचालक मोहन भागवत 6 अगस्त को देश युवाओं से बातचीत करेगे.
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जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद आंदोलन की शक्ल बदल गई. इस प्रदर्शन में और प्रदर्शन के बाद जिनकी सबसे ज्यादा चर्चा रही वो हैं Gen-Z छात्र. इस जनरेशन का करिश्मा ही है कि नेताओं की जुबां पर भी Gen-Z स्लोगन आ गए.
खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों, सांसदों और नेताओं को Gen-Z से कनेक्ट रहने के लिए कहा है. अब युवाओं की इस जनरेशन के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी जुड़ने के लिए मुहिम शुरू करने की तैयारी कर ली है.
Gen-Z और Gen-Alpha से बातचीत करेंगे मोहन भागवत
सरसंघचालक मोहन भागवत 6 अगस्त को देश युवाओं से बातचीत करेगे. RSS का यह कार्यक्रम मुंबई में होगा. जिसे 'इण्डियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' (I.I.M.U.N.) की 15वीं वर्षगांठ और उसकी वार्षिक चैंपियनशिप कांफ्रेंस में आयोजित किया जा रहा है.
जानकारी के मुताबिक, इस सम्मेलन में देश भर के 100 से ज्यादा शहरों से करीब दो हजार छात्र हिस्सा लेंगे. जो 15 से 19 साल के एज ग्रुप के होंगे. यानी Gen-Alpha और Gen-Z दोनों एक ही मंच पर होंगे.
Gen-Z पर मोहन भागवत ने क्या कहा था?
संघ प्रमुख ने एक कार्यक्रम में बात करते हुए सलाह दी थी कि जमाना बदल गया है, अब वो दौर चला गया है जब बच्चे ऑर्डर मान लेते हैं. अब बच्चे सवाल करते हैं तो उनसे उसी अंदाज में बात करने की जरूरत है. मोहन भागवत ने मातृत्व, भारतीय संस्कृति और समाज में बदलते मूल्यों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए एक कार्यक्रम में कहा कि अब बच्चों के साथ बात करने और उन्हें अपनी बात मनवाने के लिए डिक्टेशन की नहीं डिस्कशन की ज़रूरत है. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि बच्चों पर ऑर्डर झाड़ने की ज़रूरत नहीं है, कंसेंसस बिल्ट करना जरूरी है.
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संघ प्रमुख ने इसके पीछे कि वजह समझाते हुए कहा कि मौजूदा पीढ़ी ज्यादा जिज्ञासु है. वो हर चीज के पीछे का तर्क समझना चाहती है, सवाल करती है. उन्होंने आजकल परिवारों के भीतर बातचीत बंद हो हो जाने पर चिंता जताते हुए कहा कि फिर से संवाद शुरू करना जरूरी है. इसके अलावा उन्होंने अपने जमाने को याद किया और कहा कि जब वे युवा थे, तब आज्ञा मानने का दौर था, लेकिन आज के दौर में ऐसा नहीं रह गया है. अब नई पीढ़ी सवाल पूछती है और उन्हें तर्क समझाना पड़ता है.