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संवैधानिक बिलों का विरोध कर विपक्ष ने अपने पैर पर मारी कुल्हाड़ी? तमिलनाडु-बंगाल के नतीजों पर भारी पड़ेगा रुख!

विपक्ष संवैधानिक विधेयकों को रोककर भले ही अपनी पीठ थपथपा रहा हो लेकिन वह अपनी बात रखने में नाकाम रहा.

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18 Apr 2026
( Updated: 18 Apr 2026
01:37 PM )
संवैधानिक बिलों का विरोध कर विपक्ष ने अपने पैर पर मारी कुल्हाड़ी? तमिलनाडु-बंगाल के नतीजों पर भारी पड़ेगा रुख!
Source- IANS/Sansad TV
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विपक्ष भले ही शुक्रवार को लोकसभा में दो दिनों की जोरदार बहस के बाद केंद्र सरकार को तीन अहम संविधान संशोधन बिल पास करने से रोकने में अपनी कथित सफलता का जश्न मना रहा हो, लेकिन वह अपनी बात रखने में नाकाम रहा. 

सामाजिक न्याय, जाति जनगणना और आरक्षण नीतियों का चैंपियन होने के उसके दावे पर अब फिर से सोचने और उसे नए सिरे से तय करने की जरूरत होगी, जिससे 'जीत' के बीच भी उसे एक राजनीतिक झटका लगा है. विपक्ष को महिला-विरोधी और ओबीसी-विरोधी के तौर पर पेश करके, सरकार ने प्रभावी ढंग से अपनी बात का रुख बदल दिया और आलोचकों को विकास में बाधा डालने वाले अभिजात वर्ग के तौर पर दिखाया. 

कितने वोटों से गिरा संविधान संशोधन विधेयक? 

528 सदस्यों की मौजूदगी और वोटिंग के साथ, संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 के पक्ष में 298 वोट पड़े और विरोध में 230 वोट, जहां सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को लगभग 54 वोटों की कमी रह गई।

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गुरुवार 16 अप्रैल को लोकसभा में केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 और परिसीमन बिल, 2026 भी पेश किए गए थे. इन बिलों में 'हाउस ऑफ द पीपल' (लोकसभा) का आकार बढ़ाने, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने और इस परिसीमन के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान करने का प्रस्ताव था. 

जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी और दिल्ली कानून बिल का मकसद इन केंद्र शासित प्रदेशों में भी इसी तरह के प्रावधानों को लागू करना था. विपक्ष ने परिसीमन को महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने से जोड़ने का विरोध किया. 

विपक्ष ने दिखाया अड़ियल रवैया? 

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बहस के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने घोषणा की कि किसी भी सूरत में उनका गुट इन विधेयकों का समर्थन नहीं करेगा. परिणाम आने के बाद, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पीकर ओम बिरला से अनुरोध किया कि वे बाकी दो विधेयकों पर मतदान न करवाएं, क्योंकि ये तीनों विधेयक आपस में गहरे तौर पर जुड़े हुए थे. 

गुरुवार को PM मोदी ने सदन से महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से लाए गए बिल का समर्थन करने का आग्रह किया, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बार-बार इस बात पर जोर दिया कि दक्षिणी राज्यों को अपनी मौजूदा ताकत की तुलना में अपना प्रतिनिधित्व खोने की चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है। हालांकि, विपक्ष अपनी बात पर अड़ा रहा. 

जैसे ही डिस्प्ले पर आंकड़े दिखाई दिए, रिजिजू ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम करने के मोदी सरकार के संकल्प को दोहराया. उन्होंने विपक्षी बेंचों से कहा, ‘यह खेदजनक है कि आपने इस ऐतिहासिक विधेयक के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने का अवसर गंवा दिया.’

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अमित शाह ने लोकसभा में कौनसे आंकड़े रखे? 

इस बीच, अपने दावे को सही साबित करने के लिए कांग्रेस शासनकाल की कुछ खास घटनाओं का जिक्र करते हुए, गृह मंत्री ने राहुल गांधी की पार्टी की आलोचना की. उन्होंने कहा कि सत्ता में रहने के अपने दशकों के दौरान, इस पार्टी ने लगातार जाति-आधारित जनगणना और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण का विरोध किया है. उन्होंने इस झूठे नैरेटिव को भी गलत साबित कर दिया कि इन विधेयकों से दक्षिणी राज्यों को नुकसान होगा. इसके बजाय, उन्होंने ऐसे आंकड़े पेश किए जिनसे पता चलता है कि परिसीमन के बाद उन्हें सीटों का फ़ायदा ही होगा. 

अमित शाह ने विपक्ष पर महिलाओं के लिए आरक्षण से लेकर उचित प्रतिनिधित्व तक हर चीज का विरोध करने का आरोप लगाया. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत नियमों के अनुसार, बिल पेश किए जाने के समय उसकी विषय-वस्तु पर बहस की अनुमति नहीं होती. 

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PM मोदी ने आलोचकों से इन ऐतिहासिक सुधारों का समर्थन करने का भी आग्रह किया और इन विधेयकों को संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन किए बिना, महिलाओं के सशक्तिकरण की लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करने वाले कदम के रूप में प्रस्तुत किया. 

सत्ता पक्ष ने दक्षिण भारत में परिवार नियोजन की सफलता के लिए सज़ा के बजाय समानता पर जोर दिया. अमित शाह ने कांग्रेस के इस दावे का भी खंडन किया कि महिलाओं को सशक्त बनाने वाली एकमात्र पार्टी वही है. उन्होंने इसके उलट BJP के  उदाहरण दिए, जैसे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री का समर्थन करना, और भारत की राष्ट्रपति के रूप में एक आदिवासी महिला का चयन करना. 

बंगाल-तमिलनाडु चुनावों के नतीजे देंगे विपक्ष को झटका? 

इस महीने के आखिर में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल समेत कई अहम राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और उसके बाद उत्तर प्रदेश, पंजाब और दूसरे राज्यों में भी चुनाव होंगे. ऐसे में जब असलियत सामने आएगी, तो विपक्ष को बचाव का कोई रास्ता ढूंढना पड़ेगा. 

क्योंकि माना जा रहा है महिला वोटर्स TMC से कट रही हैं. ऐसे में इन बिलों का घोर विरोध ममता बनर्जी की नैया डूबो सकता है. वहीं, केंद्र की ऐसी कई योजनाएं हैं, जिनमें लाडली बहन योजना, उज्जवला योजना समेत महिला कल्याणकारी कदम हैं, जिसने महिलाओं का रुख BJP की तरफ मोड़ा है. 

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जाति जनगणना की मांग के संबंध में गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की जनगणना, जो अभी चल रही है, उसमें इसे भी शामिल किया गया है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी और अगली 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था. 

यह भी पढ़ें- हार को हथियार बना रही BJP... महिला आरक्षण बिल पर PM मोदी ने तैयार कर दी सियासी पिच, बंगाल चुनाव में होगा बड़ा खेल

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पिछले 12 साल में यह पहली बार है कि संसद में कोई बिल गिरा है, जो पास नहीं हो पाया. इस बीच, 2023 के महिला आरक्षण अधिनियम को, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, गुरुवार को केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा अधिसूचित कर दिया गया. 
With IANS Input

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