Brics Summit 2026: ब्रिक्स सम्मेलन पर सियासी घमासान, विपक्ष ने उठाए सवाल तो भाजपा ने बताया भारत के बढ़ते प्रभाव का प्रमाण
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की कोशिश की. जिसके बाद भाजपा नेताओं ने जवाब देते हुए इसे भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और कूटनीतिक प्रभाव का प्रमाण बताया है.
Follow Us:
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर देश की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है. विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने जहां सम्मेलन के आयोजन को सकारात्मक बताते हुए इसके वास्तविक परिणामों पर सवाल उठाए हैं, वहीं भाजपा नेताओं ने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और कूटनीतिक प्रभाव का प्रमाण बताया है. इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) ने ब्रिक्स को लेकर राजनीति से बचने की अपील की है.
क्लाइड क्रास्टो ने सम्मेलन को बताया सकारात्मक कदम
मुंबई में एमसीपी (एसपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन अच्छी बात है, क्योंकि इसमें ब्राजील, रूस, चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के नेता एक मंच पर आ रहे हैं. हालांकि, इसके साथ-साथ देश के भीतर हो रहे विकास पर भी ध्यान देना जरूरी है.
BRICS पर कांग्रेस में दो फाड़! चिदंबरम ने पूछा- समिट से क्या मिलेगा? शशि थरूर ने दिया जवाब
क्रास्टो ने केंद्र की भाजपा सरकार से देश की प्रगति पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही. उन्होंने कहा कि सरकार को केवल जीडीपी के आंकड़ों में बढ़ोतरी या कमी के बड़े दावों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. यह देखना चाहिए कि आम लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव कितना आया है. हालांकि, ब्रिक्स सम्मेलन को उन्होंने सकारात्मक कदम बताया.
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान हुई बिहार के मखाना और सत्तू की चर्चा
पटना में मंत्री राम कृपाल यादव ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान बिहार के मखाना और सत्तू को बढ़ावा दिए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया. उन्होंने कहा कि बिहार से जुड़े इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने उपहार के तौर पर पेश किया जाना राज्य के लिए गर्व की बात है. बिहार के किसान चना उगाते हैं और उससे सत्तू तैयार होता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी बेहतर मार्केटिंग होने से इसके बारे में दुनिया में संदेश जाएगा. मखाना को भी ऊर्जा देने वाला खाद्य पदार्थ बताते हुए उन्होंने इसके औषधीय गुणों का उल्लेख किया.
केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन में विभिन्न देशों से अंतरराष्ट्रीय मेहमानों का आना भारत के लिए निश्चित रूप से लाभदायक साबित होगा.
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि पूरी दुनिया की नजरें भारत पर हैं. उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत बड़े नेताओं की भारत यात्रा को देश के बढ़ते सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि ब्रिक्स एक मजबूत संगठन है और इसमें भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है.
ओडिशा के भाजपा नेता अमर पटनायक ने भी सम्मेलन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वैश्विक दक्षिण भारत को अपनी आवाज के रूप में देख रहा है. उन्होंने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव और अस्थिरता के दौर में ब्रिक्स के भीतर होने वाली बातचीत का महत्व और बढ़ जाता है.
चिदंबरम के सवालों पर भाजपा का पलटवार
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के ब्रिक्स से जुड़े सवालों पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी. भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस के ही दो नेताओं के बयानों में विरोधाभास दिखाई देता है. उन्होंने कांग्रेस सांसद शशि थरूर के ब्रिक्स के सकारात्मक आकलन का हवाला देते हुए कहा कि यह मंच आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक संबंध मजबूत करने का अवसर देता है. खंडेलवाल ने सवाल किया कि जब चिदंबरम वित्त मंत्री थे, तब ब्रिक्स जैसे सम्मेलन नहीं होते थे क्या? उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष में रहने के कारण चिदंबरम अब ऐसे आयोजनों पर सवाल उठा रहे हैं.
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने भी चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा कि वे हर चीज में कमी निकालते हैं. उन्होंने कहा कि चिदंबरम और सलमान खुर्शीद जैसे नेता विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के महत्व को अच्छी तरह समझते हैं और ऐसे सम्मेलनों से होने वाले संभावित लाभों से परिचित हैं.
टीएसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियां चल रही हैं. रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया के शीर्ष नेता इसमें शामिल हो रहे हैं. उन्होंने माना कि उच्चस्तरीय बातचीत होगी, लेकिन साथ ही कहा कि उन्हें इससे किसी बड़े या खास नतीजे की उम्मीद नहीं है.
यह भी पढ़ें
मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने कहा कि भारत को ब्रिक्स से किसी न किसी रूप में फायदा होगा. उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह समझना जरूरी है कि दुनिया भारत को किस नजर से देखती है और भारत दुनिया को किस तरह देखता है. दुबे ने कहा कि विभिन्न देशों के नेताओं के बीच बातचीत, परिचय और चर्चा जरूरी है. उन्होंने विपक्ष से भी ब्रिक्स को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाने की अपील करते हुए कहा कि केवल विपक्ष में होने का मतलब यह नहीं है कि हर मुद्दे पर राजनीति की जाए.