अतीक के बेटे के जनाजे से ओवैसी को भेजा गया एक खास पैगाम, अखिलेश की उड़ गई नींद, UP की सियासत में भूचाल के संकेत!
माफिया अतीक अहमद के बेटे अबान के नमाज़-ए-जनाजे में शामिल होने जेल से बाहर आए उमर ने AIMIM प्रमुख ओवैसी को एक ख़ास संदेश दिया. शौकत अली के ज़रिए जो पैग़ाम भेजा गया उसने कांग्रे-सपा, ख़ासकर अखिलेश यादव की नींद उड़ गई है. आख़िर क्या मैसेज भेजा गया है?
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माफिया अतीक अहमद के 21 वर्षीय बेटे अबान को शनिवार शाम कसारी-मसारी कब्रिस्तान में उसके पिता की कब्र के बगल में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. अंतिम विदाई के दौरान उसके तीनों भाई अली, उमर और अहजम ने उसे कंधा दिया. भाई के अंतिम संस्कार और आखिरी विदाई देने उसके दो भाई मोहम्मद उमर और अली अहमद लखनऊ और झांसी जेल से कस्टडी पैरोल पर प्रयागराज आए थे. इस दौरान उमर ने AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को एक खास मैसेज भेजा, जिसने यूपी की सियासत में हड़कंप मचा दिया है. इसके बाद से ही अखिलेश यादव की नींद उड़ी हुई है.
अतीक अहमद के बेटे के जनाजे से ओवैसी को भेजा गया खास संदेश!
अबान की गुरुवार 6 अगस्त की सुबह झांसी-कानपुर हाईवे पर एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी. वह झांसी जेल में बंद अपने भाई अली से मिलने के लिए प्रयागराज से रवाना हुआ था. क्रेटा कार में उसके साथ चार अन्य लोग भी थे. सुबह करीब 10:30 बजे हाईवे पर एक जानवर को बचाने के प्रयास में कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई. हादसे में अबान और उसके दोस्त सोनू की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए. अबान और सोनू के शव शुक्रवार तड़के करीब चार बजे एक ही एंबुलेंस से झांसी से प्रयागराज के हटवा गांव लाए गए थे.
अबान के जनाजे में करीब पांच से छह हजार लोग पहुंचे, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए कब्रिस्तान और आसपास काफी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी. अबान के शव को लेकर उसका बड़ा भाई अहजम जब कब्रिस्तान पहुंचा तो उसके पीछे बड़ी संख्या में लोग भी अंदर जाने लगे. इस दौरान अबान को मिट्टी देने और जनाजे में शामिल होने असदुद्दीन ओवैसी के यूपी में सिपहसालार और AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली पहुंचे थे. खबर है कि उनके जरिए ओवैसी को उमर की ओर से एक पैगाम भेजा गया है.
अतीक के बेटे का ओवैसी को खास पैगाम, अखिलेश की नींद उड़ी!
दरअसल पैरोल कस्टडी पर जेल से जनाजे में शामिल होने आए उमर और अली भी आए थे. इस दौरान सारी रस्में पूरी करने और अपने परिवार से मुलाकात के बाद जेल लौट गए, लेकिन ओवैसी के लिए एक मैसेज छोड़ गए. शौकत अली, जो कि AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष हैं, वो भी अबान को आखिरी विदाई देने आए थे. उनकी मस्जिद में माफिया अतीक अहमद के दोनों बेटों से मुलाक़ात हुई. यहीं से उन्होंने ओवैसी के लिए अपना संदेश दिया, सलाम भेजा.
अखिलेश का खेल बिगाड़ेंगे ओवैसी!
कहा जा रहा है कि माफिया के एनकाउंटर, मुस्लिम सियासत में उथलपुथ मसलन रामपुर, मुरादाबाद, प्रयागराज सहित पश्चिमी यूपी में माफिया राज के अंत सहित तमाम मुद्दों पर मुस्लिमों के बीच उहापोह की स्थिति है. और दशकों से कांग्रेस-सपा का मुस्लिम वोटबैंक पर एकछत्र राज है. ऐसे में ओवैसी को ज़ोर लगाने और मुस्लिम नेतृत्व में बदलाव को लेकर अतीक अहमद के दोनों बेटों की ओर ओवैसी को संदेश दिया गया. ज़ाहिर है अगर ओवैसी यूपी की सियासत में दम लगाते हैं तो खेल सपा-कांग्रेस की ही ख़राब होगी.
शौकत अली ने बताया कि मस्जिद में जैसे ही उमर ने उन्हें देखा, वह उन्हें पहचान गया. उमर अतीक का दूसरे नंबर का बेटा है, जिसे शौकत अली ने ही AIMIM में शामिल कराया था. उन्होंने बताया कि उमर और अली ने उन्हें देखते ही सलाम किया और कहा कि सदर साहब (असदुद्दीन ओवैसी) को हमारा सलाम कहिएगा. इस तरह अतीक के बेटों ने ओवैसी के लिए सलाम का पैगाम भेजा. शौकत अली ने यह बात बहराइच के मटेरा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भी कही, जहां से वे चुनाव लड़ रहे हैं.
ओवैसी के दूत की अतीक के बेटों से मस्जिद में मुलाकात!
इस मुलाक़ात के संबंध में शौकत अली ने बताया कि अतीक के दूसरे नंबर के बेटे उमर ने उन्हें मस्जिद में देखते ही पहचाना. उमर को शौकत ने ही AIMIM में शामिल कराया था. इसके बाद उमर काफी यूपी की सियासत में एक्टिव रहे, काफी जनसभाएं कीं. उन्होंने बताया कि ‘उमर और अली ने उन्हें देखते ही सलाम किया और कहा कि सदर साहब (असदुद्दीन ओवैसी) को हमारा सलाम कहिएगा. इस तरह अतीक के बेटों ने ओवैसी के लिए सलाम का पैगाम भेजा.
अतीक अहमद के परिवार का AIMIM के साथ सियासी संबंध रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव से एक साल पहले, सितंबर 2021 में अतीक अहमद का परिवार ओवैसी की पार्टी में शामिल हुआ था. अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन और बेटे उमर ने लखनऊ में AIMIM की सदस्यता ली थी. हालांकि, शाइस्ता ने बाद में निकाय चुनाव से पहले बसपा का रुख कर लिया था, लेकिन अतीक अहमद और उनके बेटे AIMIM के सदस्य बने रहे.
आपको बता दें कि हाल के दिनों में माफिया अतीक अहमद के परिवार का AIMIM की ओर रुख़ रहा है. इससे पहले उनका सपा-बसपा से सियासी संबंध कथित तौर पर रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव से एक साल पहले, सितंबर 2021 में अतीक की फैमिली ओवैसी की पार्टी में शामिल हो गई थी. हालंकि फ़िलहाल फ़रार चल रही शाइस्ता ने बाद में निकाय चुनाव से पहले बसपा का रुख कर लिया था, लेकिन उसके बेटे AIMIM में बने रहे. इसकी वजह ये भी है कि मुस्लिम पॉलिटिक्स में ओवैसी की बढ़ती पैठ और बदले दौर में माफिया के ठप्पे के कारण मुख्तार और अतीक से दूरी की सपा और दूसरी पार्टियों की सुनियोजित दूरी की मजबूरी. ऐसा इसलिए क्योंकि जिस तरह यूपी में माफियाओं पर कार्रवाई हुई, सोशल मीडिया का दौर आया, चीजें बाहर निकलकर आईं, सपा से कथित संबंध के आरोप लगे, जिस कारण अब खुलकर माफियाओं का समर्थन-संरक्षण आसान नहीं है.
सपा-कांग्रेस से क्यों नाराज है अतीक का परिवार?
ऐसे में अतीक के बेटे को कानूनी के साथ-साथ सियासी संरक्षण की भी ज़रूरत हुई. ऐसे में उनके लिए ओवैसी से मुखर कोई नहीं मिल सकता. सपा की खामोशी भी अतीक और दूसरे परिवार को पसंद नहीं आ रही. उन्हें लगता है कि अतीक के जाने के बाद उन्हें अनाथ छोड़ दिया गया. उनकी लड़ाई वैसी नहीं लड़ी गई, जैसे कि लड़ने की ज़रूरत है. इसलिए तो इन दिनों कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी का भी विरोध बढ़ा है, जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अतीक के साथ कथित मंच साझा कर ही ख्याति पाई और राजनीति की सीढ़ी चढ़ी, लेकिन संसद में उनके परिवार की आवाज़ नहीं उठाई.
इस लिहाज़ से देखें तो एक तबका है जो सपा का विकल्प तलाश रहा है और वो कायदे से ओवैसी पूरी करते नज़र आ सकते हैं. ऐसे में अगर AIMIM पूरे दमख़म से लड़ती है तो आने वाले विधानसभा चुनाव में देखा जा सकता है.
जहां तक अबान के नमाज़-ए-जनाजे की बात है तो इस दौरान काफी भीड़ देखने को मिली. इस दौरान पुलिस को भी काफी मशक़्क़त करने पड़ी. पुलिस ने भीड़ को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति बिगड़ गई और बैरिकेडिंग टूट गई. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को सख्ती करनी पड़ी. कसारी-मसारी कब्रिस्तान में अबान के दादा फिरोज अहमद, चाचा अशरफ और भाई असद की कब्रें भी हैं.
अबान के जनाजे में काफी भीड़ आई!
पुलिस ने अंतिम संस्कार के दौरान केवल परिवार और चुनिंदा रिश्तेदारों को कब्रिस्तान के भीतर जाने की अनुमति दी थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट से पैरोल मिलने के बाद अली और उमर शनिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच प्रयागराज पहुंचे थे. अली को झांसी जेल से करीब 400 किलोमीटर की दूरी तय कर लाया गया, जबकि उमर को लखनऊ जेल से प्रयागराज लाया गया. दोनों को अंतिम समय में पुलिस वैन से बाहर निकाला गया. आमना-सामना होते ही अली और उमर एक-दूसरे से गले मिले. इसके बाद दोनों ने मस्जिद में नमाज अदा की और अबान को मिट्टी दी.
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परिजन के मुताबिक, अली को सुबह करीब साढ़े नौ बजे झांसी जेल से लगभग 30 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में रवाना किया गया था. यात्रा के दौरान पुलिस वैन पर पर्दे लगाए गए थे, ताकि अली का चेहरा बाहर से दिखाई न दे. उमर को भी इसी तरह सुरक्षा घेरे में लखनऊ से रवाना किया गया. उमर करीब साढ़े चार बजे और अली करीब साढ़े पांच बजे प्रयागराज पहुंचा.
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जब अबान के शव को वाहन से उतारा जा रहा था, उस समय अली पुलिस वैन में मौजूद था. उसने वहां मौजूद लोगों को शव उतारने के तरीके को लेकर निर्देश भी दिए. अंतिम संस्कार के बाद अली और उमर को परिवार से मिलने की अनुमति दी गई. हाईकोर्ट ने पैरोल के दौरान दोनों को अपने भाई अहजम और बुआ से मुलाकात की अनुमति दी थी.
4 साल में पहली बार पैरोल पर छूटे अतीक के बेटे!
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पुलिस ने कब्रिस्तान से कुछ दूरी पर स्थित एक मस्जिद के बाहर इसके लिए इंतजाम किया था. मस्जिद के बाहर टेंट लगाया गया था, जहां दोनों ने परिवार के सदस्यों से मुलाकातें कीं. दोनों को करीब चार साल बाद पहली बार पैरोल मिली थी. अबान की मां शाइस्ता परवीन अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुईं. वह वर्ष 2023 से फरार हैं. इससे पहले वह अपने पति अतीक अहमद और बेटे असद के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुई थीं.