जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

ना SC/ST एक्ट का प्रयोग, ना ही लेंगे आरक्षण का लाभ…SC कैटेगरी से निकलना चाह रही ये तमिलनाडु की जाति, आखिर क्यों?

भारत में जहां कई जातियां SC/ST में शामिल होना चाहती हैं, वहीं तमिलनाडु में एक ऐसी जाति है जो SC कैटेगरी से निकलना चाह रही है और इसके लिए वो SC/ST एक्ट और आरक्षण के लाभ तक त्यागना चाह रही है.

Author
27 Sep 2026
( Updated: 27 Sep 2026
06:19 PM )
ना SC/ST एक्ट का प्रयोग, ना ही लेंगे आरक्षण का लाभ…SC कैटेगरी से निकलना चाह रही ये तमिलनाडु की जाति, आखिर क्यों?
Image Source: IANS (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Advertisement

देश में जातिगत जनगणा, OBC-SC/ST और आरक्षण को लेकर जारी बहस के बीच दशकों से द्रविड़ विचारधारा के प्रभुत्व में रहे तमिलनाडु में एक ऐसी जाति है जो ख़ुद को दलित समुदाय से बाहर रखना चाह रही है. इतना ही नहीं ऐसे वक्त में जब कई जातियां आरक्षण के लाभ और दूसरे बेनिफिट्स के कारण ख़ुद को पिछड़ी जातियों वाली कैटेगरी में शामिल करना चाहती हैं, वहीं तमिलनाडु का देवेंद्रकुला वेल्लालर (Devendra kula Vellalar-DKV) समुदाय अनुसूचित जाति (SC) की सूची से बाहर होने की कोशिश कर रहा है. इतना ही नहीं इस जाति ने SC/ST कानून का इस्तेमाल भी नहीं करने का निर्णय लिया है.

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक डीवीके समुदाय ने ख़ुद से फैसला किया है कि वो आगे से किसी के ख़िलाफ़  SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज नहीं कराएंगे. समाज का मानना है कि इस क़ानून के ग़लत इस्तेमाल से समाज में नफ़रत बढ़ती है और दुश्मनी पैदा होती है. समाज के निर्णय की जानकारी तमिलनाडु के तेनकासी से भाजपा जिलाध्यक्ष डीवीके समुदाय से आने वाले अनंतन अय्यासामी ने दी है. समुदाय का ये फैसला ऐसे वक्त में आया है जब IIT बॉम्बे के एक छात्र साहिल वाकोडे की खुदकुशी के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला पर SC/ST अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था. इन आरोपों का अय्यासामी ने भी कड़ा विरोध किया था.

देवेंद्रकुला वेल्लालर-इंद्र के वंशज, खेती-गोपालन काम!

आपको बता दें कि देवेंद्रकुला वेल्लालर यानी कि DKV समुदाय तमिलनाडु की आबादी का बड़ा हिस्सा है. DKV तमिलनाडु में अनुसूचित जाति में शामिल है और इनकी आबादी में हिस्सेदारी क़रीब 5% से 9% के बीच है. दक्षिणी तमिलनाडु और कावेरी डेल्टा क्षेत्रों जैसे कि मदुरै, रामनाथपुरम, तिरुनेलवेली, थूथुकुडी आदि में DKV की अधिकतर आबादी रहती है. जानकारी के मुताबिक़ DKV मुख्य रूप से खेती-किसानी से संबंध जाति है. देवेंद्रकुला वेल्लालर का मतलब यानी कि देवेंद्रकुला का अर्थ है भगवान इंद्र के वंशज और वेल्लालर का संबंध कृषि-खेती. ये समुदाय कृषि के अलावा गोपालन से भी जुड़ी है.

संसद ने दी 7 उपजातियों को देवेंद्रकुला वेल्लालर नाम से अलग पहचान

Advertisement

जहां तक इस समुदाय के कानूनी स्थिति की बात है तो मार्च 2021 में संसद से एक विधेयक पारित हुई, जिसमें पल्लार सहित सात उप-जातियों को मिलाकर देवेंद्रकुला वेल्लालर नाम से एक अलग पहचान दी गई थी. इतना ही नहीं गृह मंत्री अमित शाह ने भी समुदाय के द्वारा खुद के सामाजिक उत्थान के लिए किए गए प्रयासों के लिए DKV की सराहना की गई थी.

SC सूची से बाहर होने की मांग क्यों कर रही DKV?

समाज के लिए SC सूची से बाहर करने की मांग के पीछे आर्थिक संपन्नता और कोई दूसरी ज़रूरत नहीं बल्कि  सामाजिक प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान से जुड़ी. समाज का मानना है कि उनके लिए SC का टैग परेशानी ही खड़ी करता है, SC सूची में शामिल होने से उन्हें कोई विशेष फायदा नहीं हुआ है बल्कि उन्हें उल्टा सामाजिक भेदभाव ही सहना ही पड़ता. तमिलनाडु में पहले से ही 69% आरक्षण लागू है. DKV की दलील है कि जातिगत टैग उनके लिए समग्र विकास, विशेषकर व्यवसाय और व्यापार में बाधा बनता है.

क्या है देवेंद्रकुला-वेल्लाल का अगला प्लान?

DKV मांग कर रही है कि उन्हें पहले SC से OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में ट्रांसफर किया जाए. इसके बाद समुदाय की कोशिश है कि SC से निकलकर 10-15 साल OBC में रहा जाए, फिर उन्हें सामान्य यानी कि अनारक्षित कैटेगरी में शामिल कर दिया जाए. 

Advertisement

DKV के अंदर किसने किया आरक्षण छोड़ने का विरोध?

हालांकि समुदाय के अंदर जातिगत के अलावा धार्मिक मतभेद भी है. जहां एक ओर इस समुदाय का एक बड़ा हिस्सा हिंदू परंपराओं से जुड़ा है तो वहीं एक बड़े तबके ने ईसाई धर्म अपना लिया है, जो कि SC कैटेगरी से बाहर होने और आरक्षण छोड़ने का विरोध कर रहे हैं. एक ओर जहां हिंदू परंपरा को मानने वाले SC सूची से हटने और सामाजिक प्रतिष्ठा हासिल करने के पक्ष में हैं तो वहीं धर्मांतरित DKV आरक्षण मॉडल में विश्वास रखते हैं. 

ये भी पढ़ें: हमास के जिस आतंकी ने कॉन्सर्ट से महिला को जबरन उठाया, उसे तीन साल बाद इजरायली सेना ने किया ढेर, Video

Advertisement

तमिलनाडु विधानसभा से धर्मांतरित दलितों को भी SC आरक्षण की सिफारिश!

यहां ये बता देना जरूरी है कि तमिलनाडु विधानसभा की ओर से एक 2023 में एक प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें धर्म परिवर्तन करने वाले दलितों को भी SC आरक्षण देने की सिफारिश केंद्र सरकार से की गई थी.

आजादी के बाद जाति की कैटेगरी बदलने की मांग वाला पहला मामला

यह भी पढ़ें

इस लिहाज़ से देखें तो ये भारत की आजादी के बाद से ये पहला मामला है जब कोई जाति आरक्षण को छोड़ना चाह रही है, SC से निकलना चाह रही है और SC/ST एक्ट का प्रयोग नहीं करना ताह रही है. वो भी ऐसे दौर में जहां एक बार फिर से जातिगत आरक्षण को लेकर बहस चल पड़ी है और जाति की बहस फिर से तल्ख हो गई है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें