'राहुल गांधी PM बने तो...', धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी का Gen-Z को लेकर बड़ा ऐलान
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद रेवंत रेड्डी ने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बने तो Gen-Z के किसी नेता को शिक्षा मंत्री बनाया जाएगा. साथ ही उन्होंने चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 से घटाकर 21 वर्ष करने की भी मांग उठाई.
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नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में बड़ी संख्या में Gen-Z युवाओं की भागीदारी देखने को मिली. आंदोलन खत्म होने के बाद विपक्षी दल लगातार युवाओं की भूमिका की सराहना कर रहे हैं और इसे भूनाने की कोशिश में जुट गया है. इसी बीच तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीति के गलियारों में नई बहस छेड़ दी है.
राहुल गांधी PM बने तो Gen-Z को मिलेगा बड़ा मौका
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रेवंत रेड्डी ने कहा कि अगर भविष्य में राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनते हैं, तो वह यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि Gen-Z का कोई प्रतिनिधि देश का केंद्रीय शिक्षा मंत्री बने. उनके मुताबिक जिस पीढ़ी ने सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद की है, उसे केवल आंदोलन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संसद तक पहुंचकर देश की नीतियों में भी भागीदारी निभानी चाहिए.
इंडिया गठबंधन से करेंगे बातचीत
रेवंत रेड्डी ने आगे कहा कि वह इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों से भी चर्चा करेंगे. उनका मानना है कि युवाओं को केवल समर्थन देने की बात नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया का भी हिस्सा बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की सोच और ऊर्जा देश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दे सकती है.
चुनाव लड़ने की उम्र घटाने की भी उठाई मांग
मुख्यमंत्री ने चुनावी सुधार की भी मांग उठाई. उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष की जानी चाहिए. इसके लिए तेलंगाना सरकार जल्द ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर केंद्र सरकार के नाम एक प्रस्ताव पारित करने की तैयारी करेगी. उनका तर्क है कि जब युवा देश के बड़े मुद्दों पर अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं, तो उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर भी पहले मिलना चाहिए.
कैंडल मार्च में भी दिया बड़ा बयान
नीट पेपर लीक मुद्दे पर निकाले गए कैंडल मार्च को संबोधित करते हुए रेवंत रेड्डी ने दावा किया कि Gen-Z के आंदोलन ने केंद्र सरकार पर दबाव बनाया और आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क, कई मंत्री, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और बड़ी संख्या में युवा भी मौजूद रहे. रेवंत रेड्डी के इस बयान के बाद अब युवाओं की राजनीति और उनकी भागीदारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
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बहरहाल, रेवंत रेड्डी के इस बयान ने छात्र आंदोलन को नया राजनीतिक आयाम दे दिया है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि युवाओं की राजनीतिक भागीदारी और चुनावी सुधार को लेकर उठी ये मांग आगे कितनी आगे बढ़ती है. फिलहाल, Gen-Z की भूमिका और उसकी राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर बहस तेज हो गई है.