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CWG 2026: एक हाथ नहीं तो क्या हुआ...दिलीप गावित ने रचा इतिहास, भारत ने एक ही रेस में जीते गोल्ड-सिल्वर

CWG 2026: स्कॉटलैंड में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के दो पैरा एथलीटों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया. एक ही रेस में भारत ने गोल्ड और सिल्वर दोनों मेडल जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया.

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30 Jul 2026
( Updated: 30 Jul 2026
09:36 AM )
CWG 2026: एक हाथ नहीं तो क्या हुआ...दिलीप गावित ने रचा इतिहास, भारत ने एक ही रेस में जीते गोल्ड-सिल्वर
Image Source: X/WeAreTeamIndia
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CWG 2026: कई बार जिंदगी इंसान से बहुत कुछ छीन लेती है, लेकिन अगर हिम्मत साथ हो तो वही इंसान दुनिया को अपनी ताकत दिखा देता है. स्कॉटलैंड में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के दो पैरा एथलीटों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया. एक ही रेस में भारत ने गोल्ड और सिल्वर दोनों मेडल जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया. 29 जुलाई की देर रात हुए पुरुषों की 100 मीटर पैरा T47 स्पर्धा में महाराष्ट्र के दिलीप महादु गावित ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया. वहीं, मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ ने सिल्वर मेडल जीतकर भारत की खुशी को दोगुना कर दिया. दोनों खिलाड़ियों की रफ्तार ऐसी थी कि ऐसा लगा जैसे वे सिर्फ जीतने नहीं, बल्कि इतिहास लिखने के लिए ट्रैक पर उतरे हों.

गेम्स रिकॉर्ड बनाकर जीता गोल्ड

दिलीप गावित ने फिनिश लाइन महज 10.71 सेकंड में पार की और नया गेम्स रिकॉर्ड बना दिया. उनकी इस दौड़ का जवाब किसी भी खिलाड़ी के पास नहीं था. वहीं भारत के ही मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया. इंग्लैंड के केविन सैंटोस ने 10.85 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता. इस तरह पोडियम पर भारत का दबदबा साफ दिखाई दिया.

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महज पांच साल की उम्र में खो दिया था अपना हाथ

दिलीप गावित की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि संघर्ष, हिम्मत और सपनों की कहानी है. महाराष्ट्र के नासिक के पास स्थित छोटे से गांव तोरण डोंगरी में जन्मे दिलीप जब सिर्फ पांच साल के थे, तब खेत में एक पेड़ से गिर गए. इस हादसे में उनका दाहिना हाथ बुरी तरह घायल हो गया. परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. समय पर इलाज नहीं मिल पाया और घाव में संक्रमण इतना बढ़ गया कि डॉक्टरों को उनकी कोहनी के नीचे से दाहिना हाथ काटना पड़ा. इतनी छोटी उम्र में एक हाथ खो देना किसी भी बच्चे के लिए बहुत बड़ा झटका होता है, लेकिन दिलीप ने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.

गांव की पगडंडियों से शुरू हुआ सफर

दिलीप बचपन में अपने माता-पिता के साथ खेतों में काम करने जाते थे. वहीं दौड़ना-भागना उनकी आदत बन गया. धीरे-धीरे यही दौड़ उनके जीवन का सपना बन गई. गांव की धूल भरी सड़कों पर दौड़ते हुए उनकी प्रतिभा पर कोच वैजनाथ काले की नजर पड़ी. उन्होंने दिलीप को सही ट्रेनिंग दी और एक साधारण किसान परिवार के बेटे को अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट बनने का रास्ता दिखाया दिलीप ने मेहनत को कभी नहीं छोड़ा और लगातार खुद को बेहतर बनाते रहे.

पहले भी देश के लिए जीत चुके हैं कई बड़े मेडल

कॉमनवेल्थ गेम्स का यह गोल्ड दिलीप की पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है. इससे पहले उन्होंने 2022 एशियाई पैरा खेलों में 400 मीटर T47 स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया था. इसके अलावा पेरिस पैरालंपिक 2024 में भी उन्होंने 400 मीटर T47 स्पर्धा के फाइनल तक पहुंचकर अपनी काबिलियत साबित की थी.अब कॉमनवेल्थ गेम्स में नया रिकॉर्ड बनाकर उन्होंने अपने शानदार करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ दी है.

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क्या होती है T47 कैटेगरी?

T47 कैटेगरी उन पैरा एथलीटों के लिए होती है जिनका एक हाथ पूरी तरह नहीं होता या उसकी क्षमता सामान्य से कम होती है. ऐसे खिलाड़ियों के लिए दौड़ना आसान नहीं होता, क्योंकि शरीर का संतुलन और गति दोनों प्रभावित होते हैं. इसके बावजूद इन खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास उन्हें दुनिया के बेहतरीन एथलीटों की कतार में खड़ा कर देता है. दिलीप और बासिल ने इसका सबसे बड़ा उदाहरण पेश किया है.

भारत की झोली में लगातार बढ़ रहे हैं मेडल

कॉमनवेल्थ गेम्स के सातवें दिन भारत को कुल तीन पदक मिले. इसके बाद भारत के खाते में अब 15 मेडल हो चुके हैं, जिनमें 3 गोल्ड, 9 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज शामिल हैं. मेडल तालिका में भारत फिलहाल आठवें स्थान पर है. इतना ही नहीं, भारतीय मुक्केबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली है, जिससे देश के लिए 10 और पदक लगभग पक्के हो गए हैं. इससे पहले मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम भारोत्तोलन वर्ग में गोल्ड जीता था, जबकि शर्मिला धनखड़ ने महिलाओं की पैरा गोला फेंक F57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल कर भारत का गौरव बढ़ाया.

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यह जीत सिर्फ मेडल नहीं, लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है

दिलीप गावित की कहानी यह बताती है कि जिंदगी में मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर इंसान हार मानने की बजाय आगे बढ़ता रहे तो वह हर चुनौती को पीछे छोड़ सकता है. एक हाथ खोने के बाद भी उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा. आज वही खिलाड़ी देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर करोड़ों भारतीयों के चेहरे पर मुस्कान लेकर आया है. वहीं मोहम्मद बासिल ने सिल्वर जीतकर यह साबित कर दिया कि भारतीय पैरा एथलीट किसी से कम नहीं हैं. इन दोनों खिलाड़ियों की सफलता सिर्फ खेल की जीत नहीं है, बल्कि यह विश्वास, मेहनत और कभी हार न मानने वाले जज्बे की भी जीत है.

 

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Input- IANS

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