अब वंदेमातरम् का किया अपमान तो खैर नहीं...राज्यसभा से राष्ट्र-गौरव अपमान निवारण बिल पारित, जानें क्या हैं दंडनीय प्रावधान
राज्यसभा में राष्ट्र-गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित हो गया है. अब वंदेमातरम् का अपमान दंडनीय होगा. यानी कि राष्ट्रगीत के गायबन में अगर बाधा डाली तो वही सजा मिलेगी जो राष्ट्रगान के लिए बने कानून के तहत मिलती आई है.
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राज्यसभा ने बुधवार को विपक्ष के जोरदार हंगामे और वॉकआउट के बीच राष्ट्र-गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया. चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह केवल एक विधायी संशोधन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है. वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस बल के इस्तेमाल का विरोध करते नजर आए.
राज्यसभा से वंदेमातरम् बिल पारित
इस बिल का उद्देश्य 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' राज्यसभा में पेश किया. इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन करना है. मौजूदा कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान का अपमान करने पर तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है. नए प्रावधानों के तहत, 'वंदे मातरम' के गायन में बाधा डालने या किसी भी तरह से इसका अपमान करने पर सजा होगी. इस घटनाक्रम ने जबरदस्त राजनीतिक बहस छेड़ दी है. प्रस्तावित संशोधन में 'वंदे मातरम' के अपमान पर भी इसी तरह की सजा का प्रावधान है.
वंदेमातरम् के गायन में बाधा अब कानूनी अपराध
प्रस्तावित कानून का मकसद राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन का अपमान करने या उसमें बाधा डालने को अपराध बनाना है. इसके लिए इसे वही कानूनी सुरक्षा दी जाएगी, जो अभी राष्ट्रगान 'जन गण मन' को मिली हुई है.
यह बिल 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971' में संशोधन का प्रस्ताव करता है. यह कानून अभी राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान को अपराध मानता है. मौजूदा कानून के तहत, अगर कोई जानबूझकर राष्ट्रगान गाने से रोकता है या उसे गाते समय बाधा डालता है, तो उसे तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है.
राष्ट्रगीत को भी मिला अब राष्ट्रगान वाला कानूनी संरक्षण
संसद से इसकी मंजूरी के बाद ‘वंदे मातरम’ भी उसी कानूनी दायरे में आ जाएगा, जिसके तहत राष्ट्रीय गीत का जान-बूझकर अपमान करना, उसमें बाधा डालना या रुकावट पैदा करना एक दंडनीय अपराध होगा और इसके लिए अधिकतम तीन साल की जेल की सजा हो सकती है.
प्रस्तावित कानून के अनुसार, जो कोई भी व्यक्ति जान-बूझकर ‘वंदे मातरम’ गाने से रोकता है या उसमें बाधा डालता है, या इसे गा रहे लोगों के समूह में व्यवधान पैदा करता है, उसे वही सजा मिलेगी जो अभी राष्ट्रगान से जुड़े अपराधों के लिए तय है.
1971 के कानून के तहत नहीं मिल पाया था ‘वंदे मातरम’ को वैधानिक दर्जा
इस कदम का मकसद राष्ट्रीय गीत को भी राष्ट्रीय गान के बराबर कानूनी और वैधानिक दर्जा दिलाना है. हालांकि ‘वंदे मातरम’ को लंबे समय से भारत का राष्ट्रीय गीत माना जाता रहा है, लेकिन 1971 के कानून के तहत इसे अब तक वैधानिक सुरक्षा का वैसा दर्जा नहीं मिला है.
यह विधायी कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के 9 जुलाई के उस निर्देश के कुछ दिनों बाद उठाया गया है, जिसमें सभी राज्यों से कहा गया था कि वे सरकारी कार्यक्रमों में 'जन गण मन' से पहले 'वंदे मातरम' बजाने के आदेश का सख्ती से पालन करें.
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दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद अब इस पर राष्ट्रपति की सहमति ली जाएगी. इसके बाद इस संशोधन के तहत राष्ट्रीय गीत का अपमान करना या उसमें बाधा डालना भारतीय कानून के तहत एक आपराधिक अपराध बन जाएगा.