जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

Raja Shivaji Movie Review: साहस और वीरता की महागाथा जिसे हर भारतीय को जानना चाहिए, जानें क्या है फिल्म में खास

फिल्म का एक बड़ा हिस्सा शिवाजी के शुरुआती सालों और उनके बड़े होने के सफ़र को समर्पित है. यह उनके पालन-पोषण के उन पहलुओं को बड़ी बारीकी से दिखाती है जिनके बारे में कम लोग जानते हैं. इसमें उनकी मां जीजाबाई की भूमिका पर विशेष ज़ोर दिया गया है.

Raja Shivaji Movie Review: साहस और वीरता की महागाथा जिसे हर भारतीय को जानना चाहिए, जानें क्या है फिल्म में खास
Image Credits: IANS/PR
Advertisement

राजा शिवाजी मूवी रिव्यू

कलाकार: रितेश देशमुख, संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, महेश मांजरेकर, सचिन खेडेकर, भाग्यश्री, फरदीन खान, जितेंद्र जोशी, अमोल गुप्ते, जेनेलिया देशमुख

निर्देशक: रितेश देशमुख

लेखक: अजीत वाडेकर, संदीप पाटिल, रितेश देशमुख

Advertisement

अवधि: 187 मिनट

 रेटिंग: 4.5 

रितेश देशमुख 'राजा शिवाजी' के साथ डायरेक्शन के क्षेत्र में वापसी कर रहे हैं और यहां उनकी महत्वाकांक्षा साफ नजर आती है. उन्होंने अभिनेता, लेखक और निर्देशक तीनों भूमिकाओं को निभाया है. रितेश ने जानी-पहचानी ऐतिहासिक बायोपिक को एक ऐसे रूप में ढाला है कि यह फिल्म एक साधारण ऐतिहासिक कहानी जैसी नहीं लगती, बल्कि एक गहरी और सोचने पर मजबूर करने वाली प्रस्तुति है. फिल्म को अध्यायों में बांटकर, द्विभाषी प्रारूप में दिखाया गया है, जिससे यह किसी किताब की तरह धीरे-धीरे खुलती हुई कहानी लगती है.

Advertisement

फिल्म की कहानी में क्या दिखाया गया है?

जो बात सबसे ज्यादा उभरकर सामने आती है, वह है फिल्म का स्पष्ट उद्देश्य: यह युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि एक योद्धा की कहानी है. इसमें ऐसे कोई ज़बरदस्त और बड़े पैमाने वाले युद्ध के दृश्य नहीं हैं जिन्हें सिर्फ़ तमाशा दिखाने के लिए गढ़ा गया हो. इसके बजाय कहानी शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व के निर्माण पर केंद्रित है- उनके विचार, उन पर पड़े प्रभाव और वह सफर जिसने उन्हें एक महान नेता के रूप में ढाला. यह दृष्टिकोण फिल्म को एक गहरी ताकत देता है, जिससे दर्शक फिल्म से एक ज्यादा निजी और भावनात्मक स्तर पर जुड़ पाते हैं.

फिल्म का एक बड़ा हिस्सा शिवाजी के शुरुआती सालों और उनके बड़े होने के सफ़र को समर्पित है. यह उनके पालन-पोषण के उन पहलुओं को बड़ी बारीकी से दिखाती है जिनके बारे में कम लोग जानते हैं. इसमें उनकी मां जीजाबाई की भूमिका पर विशेष ज़ोर दिया गया है. उनकी उपस्थिति कहानी का भावनात्मक आधार बन जाती है, और यह दर्शाती है कि एक महान हस्ती बनने से बहुत पहले ही, उनमें किन मूल्यों, दूरदृष्टि और सहनशीलता का संचार किया गया था. परिवार और शुरुआती रिश्तों पर दिया गया यह जोर कहानी को और भी समृद्ध बनाता है. इससे शिवाजी की कहानी एक इंसान की तरह महसूस होती है, न कि सिर्फ किसी मिथक या किंवदंती की तरह.

रितेश देशमुख का दमदार अभिनय 

Advertisement

फ़िल्म के केंद्र में, रितेश देशमुख का अभिनय शांत और संयमित है. उनके अभिनय में अनावश्यक भव्यता या दिखावा नहीं है. उन्होंने अपने किरदार को ज्यादा नाटकीय बनाने की बजाय सादगी और गहराई से निभाया है. अभिनय के अलावा, एक फिल्म निर्माता के तौर पर भी उनका नियंत्रण जबरदस्त दिखता है. वे कहानी के मूल तत्वों पर भरोसा करते हुए फिल्म के दृश्यों को स्वाभाविक रूप से उभरने का मौका देते हैं.

जेनेलिया देशमुख ने जीत लिया दिल

जेनेलिया देशमुख का योगदान फिल्म की भावनाओं में साफ दिखता है. रिश्तों को जिस नरमी और संवेदनशीलता के साथ दिखाया गया है, वह बड़े ऐतिहासिक परिदृश्य को संतुलित करती है. यह बात खास तौर पर तब उभरकर आती है जब फिल्म के पल शांत लगते हैं. फिल्म में निजी पलों को भी राजनीतिक घटनाक्रमों जितना ही महत्व दिया गया है.

राहिल देशमुख का शानदार अभिनय

Advertisement

युवा राहिल देशमुख ने युवा शिवाजी के किरदार में एक स्वाभाविक आकर्षण भर दिया है. उन्होंने बचपन की मासूमियत और जिज्ञासा को जिस तरह से पर्दे पर उतारा है, वह फ़िल्म के शुरुआती हिस्सों को बेहद दिलचस्प और दिल को छू लेने वाला बना देता है.

छा गए विद्या बालन और संजय दत्त 

सहायक कलाकारों में, विद्या बालन ने 'बड़ी बेगम' के रूप में अपनी अदाकारी से एक गहरी छाप छोड़ी है. उन्होंने बिना किसी बनावटी नाटकीयता के, किरदार में भावनात्मक गहराई और राजनीतिक बारीकियों को बखूबी उकेरा है. वहीं संजय दत्त ने अफजल खान के रूप में एक डर पैदा करने वाला किरदार निभाया है, जिसमें चालाकी और क्रूरता साफ दिखती है. यह सब मिलकर उनके किरदार को बेहद बेचैन कर देने वाला बना देता है.

फरदीन खान ने कर दिया कमाल 

Advertisement

फरदीन खान ने शाहजहां के रोल को बहुत ही शांत और गंभीर तरीके से निभाया है. उनका रोल ज्यादा बोलने से ज्यादा देखने और समझने वाला है. खासकर ताज महल के पूरा होने के दौरान के सीन काफी असरदार हैं, जब उनका किरदार सिर्फ़ हुक्म चलाने वाला राजा नहीं, बल्कि एक धैर्यवान और सतर्क इंसान जैसा दिखता है. अभिषेक बच्चन ने 'संभाजी' के रूप में फिल्म के सबसे अधिक भावनात्मक रूप से बहुआयामी किरदारों में से एक को निभाया है. इस किरदार में जिम्मेदारी और अंदरूनी संघर्ष नजर आता है.

सलमान के किरदार ने दिल छू लिया

सलमान खान ने 'जीवा महाला' के रूप में एक छोटा, मगर बेहद प्रभावशाली कैमियो किया है, जो फिल्म में भावनात्मक वज़न जोड़ता है. यह पल अपनी भव्यता या पैमाने के कारण नहीं, बल्कि उस गहरी निजी वफ़ादारी के कारण दर्शकों के दिलों को छू जाता है, जिसका यह प्रतीक है.

Advertisement

दमदार निकली फिल्म के अन्य कलाकार 

अन्य कलाकार जैसे भाग्यश्री (जीजाबाई), सचिन खेडेकर, महेश मांजरेकर, बोमन ईरानी, जितेंद्र जोशी और अमोल गुप्ते ने भी अपने-अपने किरदारों को अच्छे से निभाया है, जिससे पूरी कहानी पूरी और संतुलित लगती है. हर किरदार फ़िल्म की कहानी के भावनात्मक और राजनीतिक ताने-बाने में अपना सार्थक योगदान देता है.

शानदार है सिनेमेटोग्राफी और म्यूज़िक 

फिल्म की सिनेमेटोग्राफी संतोष सिवन ने की है, जो बहुत सुंदर और वास्तविक लगती है. दृश्य भव्य होने के साथ-साथ सच्चाई के करीब महसूस होते हैं. यहां तक कि एक्शन दृश्यों को भी पूरी स्पष्टता और सलीके के साथ फ़िल्माया गया है. अजय-अतुल का संगीत इस अनुभव को और भी ऊंचाई पर ले जाता है. वे एक ऐसी भावनात्मक ताल बनाए रखते हैं जो कहानी कहने के अंदाज़ को और निखारता है. मराठी और हिंदी का मिश्रण फिल्म को और भी प्रमाणिक बनाता है.

किसने किया फिल्म को प्रोड्यूस 

Advertisement

जियो स्टूडियोज के साथ बनी और ज्योति देशपांडे व जेनेलिया देशमुख द्वारा 'मुंबई फिल्म कंपनी' के बैनर तले निर्मित यह फिल्म बड़े पैमाने पर बनी है, लेकिन इसमें अनुशासन भी बना रहता है. फिल्म की महत्वाकांक्षा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, लेकिन यह अपनी कहानी से कभी भटकती नहीं है. हालांकि 'राजा शिवाजी' को एक अखिल-भारतीय फिल्म के तौर पर बनाया गया है, लेकिन मुंबई और महाराष्ट्र के दर्शकों के लिए इसका एक विशेष महत्व है. महाराष्ट्र दिवस के आस-पास रिलीज़ होने वाली यह फिल्म महज़ एक सिनेमाई आयोजन से कहीं बढ़कर लगती है. यह एक सांस्कृतिक श्रद्धांजलि के रूप में सामने आती है.

यह भी पढ़ें

यह फिल्म सिर्फ युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि नेतृत्व, हिम्मत और गर्व का संदेश देती है. यह ऐसी कहानी है जिसे हर भारतीय को जानना और महसूस करना चाहिए.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें