बांग्लादेश जेल में बंद हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास, नहीं करने दी मां से आखिरी मुलाकात, जाहन्वी कपूर का खौल गया खून!
बॉलीवुड एक्ट्रेस जान्हवी कपूर ने भी इस मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर की है. एक्ट्रेस ने अपने एक्स अकाउंट पर चिन्मय कृष्ण दास से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि कुछ तस्वीरें हमेशा हमारे दिलों में बसी रहती हैं, यह उन्हीं में से एक है. चिन्मय प्रभु अपनी बीमार माँ को आखिरी बार देख नहीं पाए; मरने से पहले अपने बेटे को देखने की उनकी आखिरी इच्छा भी अधूरी रह गई.उनके इस दुख के लिए कौन ज़िम्मेदार है.
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बांग्लादेश के प्रमुख हिंदू अधिकार नेता चिन्मय कृष्ण दास की मां का गुरुवार को निधन हो गया. उनकी अंतिम इच्छा जेल में बंद बेटे से मिलने की थी लेकिन जेल प्रशासन ने पैरोल पर रिहा करने से इनकार कर दिया था.
जेल में बंद बेटे चिन्मय कृष्ण दास को देखे बिना मां ने त्यागे प्राण
गुरुवार सुबह चटगांव जिले के हथजारी उपजिले में स्थित श्री श्री पुंडरीक धाम आश्रम में 71 साल की संध्या रानी धर का निधन हो गया. उन्होंने मंगलवार को खुद उस आश्रम में जाने की इच्छा जताई थी, जहां उनका बेटा लंबे समय से रह रहा था. लेकिन अमानवीयता की हद देखिए, जेल प्रशासन की बेरुखी और नियमों के सख्त रवैये के चलते वो अपने बेटे का चेहरा देखे बिना ही इस दुनिया से अलविदा कह गईं.
चिन्मय कृष्ण दास मामले पर जान्हवी ने जताई नाराजगी
एक मां का तड़प-तड़पकर दम तोड़ देना और बेटे को अंतिम समय में भी पास न आने देना… यह घटना अब सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश पैदा कर रही है. वहीं इस बीच बॉलीवुड एक्ट्रेस जान्हवी कपूर ने भी इस मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर की है. एक्ट्रेस ने एक्स अकाउंट पर चिन्मय कृष्ण दास से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “कुछ तस्वीरें हमेशा हमारे दिलों में बसी रहती हैं, यह उन्हीं में से एक है. चिन्मय प्रभु अपनी बीमार माँ को आखिरी बार देख नहीं पाए; मरने से पहले अपने बेटे को देखने की उनकी आखिरी इच्छा भी अधूरी रह गई.उनके इस दुख के लिए कौन ज़िम्मेदार है…?”
Some pictures stay in our hearts forever, This is one of them. Chinmoy Prabhu could not see his sick mother for the last time, His mother's last wish to see her son before she died and also remained unfulfilled.
— Jahnavi Kapoor (@JanhvikapoorFC_) September 11, 2026
Who is responsible for his Pain....? pic.twitter.com/4qy1UTptSz
जान्हवी के पोस्ट की क्या है सच्चाई
बता दें कि सोशल मीडिया पर जाहन्वी कपूर को लेकर जो दावा किया जा रहा है, उसकी सच्चाई कुछ और है, वायरल हो रही पोस्ट जान्हवी के फैन क्लब की है, ये पोस्ट एक्ट्रेस के फैन क्लब ने शेयर किया है.
दास के साथ हुई अमानवीयता पर भड़के लोग
अब जान्हवी कपूर फैन क्लब के इस पोस्ट पर लोग जमकर रिएक्शन दे रहे हैं, हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास के साथ जिस तरह की अमानवीयता बांग्लादेश सरकार और वहां के प्रशासन ने की है, उसने लोगों को गुस्सा दिला दिया है. एक यूजर ने मोदी सरकार से अपील करते हुए कहा. “मोदी सरकार से निवेदन है कि उन्हें बांग्लादेश के जेल से निकलवाए 2 साल हो गए हैं. एक छोटा सा बांग्लादेश आँख दिखा रहा है. इसकी आंखे फोर्डे.”
वहीं एक और यूजर ने लिखा, “इस्लामिस्ट जिहादी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं और वे 'सिकुलर' हिंदू भी ज़िम्मेदार हैं जो इस्लामिस्ट जिहादियों का समर्थन करते हैं.”
इतना ही नहीं एक और यूजर ने लिखा,” इसके लिए बांग्लादेश सरकार ज़िम्मेदार है... क्योंकि वे हिंदू-विरोधी हैं.”
आखिरी दिन अपने बेटे के आश्रम में बिताना चाहती थीं मां
इससे पहले बीमार पड़ने पर दास की मां को चटगांव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने कैंसर की पुष्टि की थी. हालांकि, बांग्लादेश के बंगाली अखबार 'कालबेला' की रिपोर्ट के अनुसार, वह अस्पताल में नहीं रहना चाहती थीं और अपनी जिंदगी के आखिरी दिन अपने बेटे के आश्रम में बिताना चाहती थीं.
दास के भाई अंजन ने की मां के निधन की पुष्टि
अपनी मां के निधन की पुष्टि करते हुए, दास के भाई अंजन कुमार धर ने रुंधे गले से 'कालबेला' को बताया, "मेरी मां चली गईं. मेरा भाई अपनी मां के जीवित रहते उन्हें देख भी नहीं सका.”
उनके दूसरे भाई रंजन कुमार धर ने कहा, "हम अब अपनी मां का शव लेकर हथजारी उपजिला हेल्थ कॉम्प्लेक्स जा रहे हैं. वहां से, हम मेडिकल सर्टिफिकेट के साथ अपने भाई की पैरोल पर रिहाई के लिए आवेदन करेंगे. हमारी मां का अंतिम संस्कार हथजारी के पुंडरीक धाम में किया जाएगा.”
मानसिक रूप से टूट गई थीं दास की मां
सूत्रों के हवाले से 'कालबेला' ने बताया कि अपने बेटे की लंबी जेल की सजा के कारण संध्या रानी धर मानसिक रूप से टूट गई थीं. बेटे की बीमारी की खबर ने भी उन्हें तोड़ दिया था, वहीं बार-बार जमानत नामंजूर होने और जेल से रिहाई न मिल पाने से भी वो हैरान-परेशान थीं.
हालांकि उन्हें जमानत की हालिया सुनवाई के बाद अपने बेटे की रिहाई की उम्मीद थी, लेकिन जमानत न मिलने से उनकी चिंताएं और बढ़ गईं.
बीमार मां से मिलने के लिए नहीं मिली थी पैरोल
बुधवार को, दास के परिवार ने चटगांव के डिप्टी कमिश्नर और जेल प्रबंधन समिति के पदेन अध्यक्ष मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम मिया को आवेदन सौंपकर अपनी बीमार मां से मिलने के लिए उनके वास्ते सशर्त पैरोल की मांग की थी.
हालांकि, बांग्लादेशी दैनिक 'समकाल' की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने परिवार को बताया कि किसी बीमार रिश्तेदार से मिलने के लिए कैदी को पैरोल देने का कोई प्रावधान नहीं है.
चटगांव के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सैयद महबूबुल हक ने कहा था कि सशर्त अस्थायी रिहाई (पैरोल) के लिए चिन्मय दास के परिवार ने आवेदन किया है. लेकिन बीमार के चलते पैरोल का कोई प्रावधान नहीं है. किसी रिश्तेदार की मृत्यु होने पर पैरोल का प्रावधान है. उनके मुताबिक, इस मामले की जानकारी उनके परिवार को मौखिक रूप से दे दी गई.
मां की मौत के बाद पैरोल मंजूर की गई
द डेली स्टार अखबार की खबर के अनुसार, चटगांव के जिला उपायुक्त मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम ने दास के परिवार की ओर से दिए गए आवेदन के बाद गुरुवार दोपहर हिंदू संत को पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया. अखबार ने जाहिदुल इस्लाम के हवाले से कहा, "मां के निधन के बाद दास के भाई की ओर से दिए गए आवेदन के आधार पर हमने कानून के अनुसार चिन्मय कृष्ण को पांच घंटे के लिए पैरोल पर जेल से रिहा करने का आदेश दिया है.”
कट्टरपंथियों के इशारे पर हुई थी अंतरिम सरकार में चिन्मय की गिरफ्तारी!
इस बीच, दुनिया के प्रमुख एडवोकेसी संगठन, 'कोएलिशन ऑफ हिंदुज ऑफ नॉर्थ अमेरिका' (सीओएचएनए) ने चिन्मय की लगातार जेल में कैद की निंदा की और इसे "मजाक" और "सरकार द्वारा प्रायोजित उत्पीड़न" बताया. संगठन ने फैसले के बाद सोमवार को एक्स पर लिखा, "बांग्लादेश में एक हिंदू नेता, जिन्होंने अपने देश में अल्पसंख्यकों की बुनियादी सुरक्षा और मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाई थी, वे अब लगभग 2 साल से जेल में हैं. यह सरकार द्वारा प्रायोजित उत्पीड़न का एक सटीक उदाहरण है - उन पर एक ऐसी हत्या का आरोप लगाया गया है जो उनके पुलिस हिरासत में होने के बाद हुई थी."
चिन्मय के खिलाफ क्या है मामला?
चिन्मय को 25 नवंबर, 2024 को ढाका में गिरफ्तार किया गया था और चट्टोग्राम की अदालत द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अगले दिन जेल भेज दिया गया था. 11 दिसंबर को, उसी अदालत ने इस मामले में फिर से जमानत देने से इनकार कर दिया. उनकी गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश और दुनिया भर में हिंदू समुदाय ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए.
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा बढ़ी है. यह हिंसा मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के अठारह महीने के कार्यकाल के दौरान देखी गई और मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) प्रशासन के तहत भी ऐसी घटनाएं जारी हैं.
जानें क्या है मामला
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश सम्मिलित सनातन जागरण जोत के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास को दो मामलों में जमानत मिल गई थी, लेकिन दो अन्य मामलों के कारण उनकी रिहाई रुकी रही.
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दास को 25 नवंबर, 2024 को ढाका में गिरफ्तार किया गया था, और चट्टोग्राम की अदालत द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अगले दिन उन्हें जेल भेज दिया गया था. 11 दिसंबर को उसी अदालत ने इस मामले में फिर से जमानत देने से इनकार कर दिया था.
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