PM मोदी के समर्थन में ईशा कोप्पिकर का बेबाक जवाब, बोलीं- ‘हूं मैं अंधभक्त, देश के लिए’
Isha Koppikar: एक्ट्रेस ने इस पूरे विवाद पर एक इंटरव्यू में खुलकर बात की है. ईशा का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोग उन्हें चाहे जो नाम दें या उन्हें फॉलो करना बंद कर दें, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. वह अपनी बात सिर्फ इसलिए बदलने के पक्ष में नहीं हैं कि उनके फॉलोअर्स कम हो जाएंगे या उनके फिल्मी करियर पर इसका असर पड़ सकता है.
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Isha koppikar Video: बॉलीवुड की ‘खल्लास गर्ल’ के नाम से मशहूर ईशा कोप्पिकर एक बार फिर अपने बेबाक बयान को लेकर चर्चा में हैं.जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर ईशा ने खुलकर नाराजगी जाहिर की थी. उन्होंने प्रदर्शनकारियों के इस रवैये की आलोचना करते हुए खुद को राष्ट्रवादी बताया था. उनके इस रुख के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा और कथित तौर पर कुछ लोगों ने उन्हें अनफॉलो भी कर दिया. अब एक्ट्रेस ने इस पूरे विवाद पर एक इंटरव्यू में खुलकर बात की है. ईशा का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोग उन्हें चाहे जो नाम दें या उन्हें फॉलो करना बंद कर दें, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. वह अपनी बात सिर्फ इसलिए बदलने के पक्ष में नहीं हैं कि उनके फॉलोअर्स कम हो जाएंगे या उनके फिल्मी करियर पर इसका असर पड़ सकता है.
‘लोगों ने मुझे अंधभक्त कहा, हां हूं मैं’
ईशा कोप्पिकर ने ‘फिल्मीबीट’ से बातचीत में कहा कि इंस्टाग्राम पर बहुत से लोगों ने उन्हें अनफॉलो किया, लेकिन वह इससे परेशान नहीं हैं. उनके मुताबिक, कुछ लोग अगर उन्हें फॉलो नहीं करना चाहते तो यह उनका फैसला है. वहीं दूसरी तरफ ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने उनके विचारों का समर्थन किया और उन्हें फॉलो किया.
अपने ऊपर लगाए गए ‘अंधभक्त’ के टैग को लेकर भी ईशा ने काफी बेबाक जवाब दिया..उन्होंने कहा कि अगर लोग उन्हें अंधभक्त कहते हैं तो वह इसे स्वीकार करती हैं. उनके शब्दों में, वह अपने देश के लिए अंधभक्त हैं. यानी सोशल मीडिया की आलोचना या किसी लेबल की वजह से वह अपनी देशभक्ति की सोच से पीछे हटने वाली नहीं हैं.
‘मैं अपनी बात सिर्फ फॉलोअर्स के लिए नहीं बदलूंगी’
ईशा ने साफ कहा कि एक सेलिब्रिटी होने के नाते उनके पास लोगों को प्रभावित करने की ताकत होती है. ऐसे में अगर वह किसी चीज में विश्वास रखती हैं तो सिर्फ अपने फॉलोअर्स बढ़ाने या बनाए रखने के लिए अपनी सोच को बदलना उन्हें सही नहीं लगता. एक्ट्रेस का कहना है कि अगर उन्हें डर हो कि अपनी राय रखने से लोग उन्हें अनफॉलो कर देंगे या उनके साथ कुछ गलत हो सकता है, तो भी वह अपनी बात छिपाने के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि हर इंसान की अपनी सोच होती है और वह उन लोगों का भी सम्मान करती हैं जो सोशल मीडिया के दबाव में अलग तरह से व्यवहार करते हैं. उनके मुताबिक, यह हर व्यक्ति की अपनी परवरिश और संस्कार पर निर्भर करता है.
‘किसी को दुख पहुंचाना मेरा मकसद नहीं’
ईशा ने यह भी साफ किया कि अपनी राय रखना और जानबूझकर किसी को दुख पहुंचाना दो अलग-अलग बातें है. उनका कहना है कि वह किसी के पास जाकर उसे चोट पहुंचाने या परेशान करने वालों में से नहीं हैं, लेकिन अगर किसी मुद्दे पर उनकी अपनी सोच है तो उसे बताने से भी पीछे नहीं हटेंगी.
उन्होंने कहा कि उनकी सोच काफी स्पष्ट और मजबूत है, इसलिए अगर वह किसी बात में विश्वास रखती हैं तो केवल लोगों की प्रतिक्रिया के डर से अपने बयान से पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता. उनके लिए अपनी बात रखना किसी को नीचा दिखाने से अलग है.
छात्रों के सवाल पूछने के अधिकार का समर्थन
ईशा ने जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन को लेकर अपनी बात रखते हुए यह भी कहा कि छात्रों को सरकार से सवाल पूछने और अपनी समस्याओं को सामने रखने का पूरा अधिकार है. किसी भी लोकतंत्र में सरकार से सवाल करना और अपनी आवाज उठाना जरूरी हिस्सा है.
हालांकि, वह प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर व्यक्तिगत गाली-गलौज और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल से सहमत नहीं हैं. उनका मानना है कि किसी सरकार या नेता की नीतियों पर सवाल उठाना अलग बात है, लेकिन किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत तौर पर अपशब्द कहना उचित नहीं है. इसी अंतर को लेकर उन्होंने प्रदर्शनकारियों के कुछ तौर-तरीकों पर सवाल उठाए थे.
‘लोकतंत्र सिर्फ बोलने की आजादी नहीं’
ईशा ने इससे पहले भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए लोकतंत्र और राजनीतिक बहस को लेकर अपनी राय रखी थी. उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र का मतलब केवल अपनी बात कहने की आजादी नहीं है, बल्कि उसके साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है.
उन्होंने राजनीतिक चर्चाओं में ‘तानाशाही’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर भी लोगों को सावधान रहने की बात कही थी. ईशा के मुताबिक, हर राजनीतिक असहमति को तानाशाही कहना सही नहीं है. उन्होंने यह समझाने की कोशिश की कि वास्तविक तानाशाही वह स्थिति होती है, जहां लोग सरकार की आलोचना करने की वजह से गंभीर परिणाम भुगतने के डर में रहें.
जुलाई में भी ट्रोलर्स को दिया था जवाब
जुलाई में छात्रों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े अपने पोस्ट के बाद ईशा को सोशल मीडिया पर काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था. इसके बाद उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए ट्रोलर्स को जवाब भी दिया था. ईशा ने तब कहा था कि अगर देश से प्यार करने की वजह से उन पर कोई लेबल लगाया जाता है तो वह इसे लेकर शर्मिंदा नहीं होंगी. उन्होंने खुद को ‘भारत भक्त’ बताते हुए कहा था कि देश के प्रति प्रेम को लेकर उन्हें किसी तरह की सफाई देने की जरूरत महसूस नहीं होती.
राजनीति में पहले भी दिखा चुकी हैं दिलचस्पी
ईशा कोप्पिकर साल 2019 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई थीं. इसके बाद से वह समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखती रही हैं. यही वजह है कि जब वह किसी राजनीतिक मुद्दे पर खुलकर बोलती हैं तो सोशल मीडिया पर उनकी बात को लेकर बहस भी शुरू हो जाती है.
इस बार भी मामला कुछ ऐसा ही है. एक तरफ उनके समर्थक उनकी बेबाकी की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके विरोध में भी आवाजें उठ रही हैं. लेकिन ईशा का ताजा रुख साफ है कि सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग, आलोचना या अनफॉलो किए जाने के डर से वह अपनी राय बदलने वाली नहीं हैं.
फिलहाल ईशा कोप्पिकर का बयान एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. उनकी बात से लोग सहमत हों या असहमत, लेकिन एक्ट्रेस ने यह जरूर साफ कर दिया है कि वह अपनी राजनीतिक और राष्ट्रवादी सोच को लेकर सार्वजनिक रूप से बोलने से पीछे हटने वाली नहीं हैं.