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अस्पतालों में लंबी लाइनों और झंझट से मिलेगी मुक्ति, गेम चेंजर साबित होगा पेशेंट नेविगेटर, दिल्ली में ट्रायल

अब इलाज करवाने के लिए सरकारी अस्पतालों में चक्कर और धक्के नहीं खाने होंगे. पेशेंट नेवीगेटर की मदद से ट्रैक रखना आसान होगा. दिल्ली से ट्रायल शुरू होने जा रहा है.

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05 Sep 2026
( Updated: 05 Sep 2026
04:21 PM )
अस्पतालों में लंबी लाइनों और झंझट से मिलेगी मुक्ति, गेम चेंजर साबित होगा पेशेंट नेविगेटर, दिल्ली में ट्रायल
Patient Navigator/ Representational Image/ @META AI
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Patient Navigator: मौजूदा समय अगर आप बीमार पड़ते हैं और प्राइवेट अस्पताल में अपना इलाज करवाते हैं तो आप की जेब ढीली होनी तो पक्की है, वहीं सरकारी अस्पताल में इलाज करवाना एक बहुत बड़ा चैलेंज है. इसकी वजह है बड़ी संख्या में इलाज करवाने के लिए आने वाले लोग और सरकारी अस्पताल की अव्यवस्था. ऐसे में मरीज पर्ची लेकर जांच और दवा के लिए चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन अब ये परेशानी दूर होने वाली है. मरीजों की इन्हीं समस्याओं को हल करने के लिए दिल्ली में पेशेंट नेविगेटर का इस्तेमाल किया जाएगा. 

इस नेविगेटर की मदद से उन मरीजों को मदद मिलेगी जो सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए पर्ची बनवाकर डॉक्टर से इलाज करवाने, जांच करवाने और दवा लेने के लिए काउंटरों पर भटकते हैं. साथ ही मरीज और उनके परिजन को मरीज के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलेगी और उन्हें हर कदम पर सही रास्ता और मदद भी मिल सके. 

पेशेंट नेविगेटर व्यवस्था कैसे काम करेगी?

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यह एक तरह की गाइड व्यवस्था है, जिसके तहत प्रशिक्षित स्टाफ और वॉलंटियर की मदद से सरकारी अस्पतालों में मरीजों की मदद की जाएगी, चाहे वह पर्ची बनवाना हो, सही डॉक्टर से इलाज करवाना हो, सही विभाग में जांच करवाना हो या फिर काउंटर से दवा लेनी हो. इन सभी कामों में यह स्टाफ मरीजों की मदद करेगा ताकि उन्हें इधर-उधर भटकना ना पड़े. यह व्यवस्था खासतौर पर बुजुर्गों, गंभीर रूप से बीमार मरीजों और अकेले इलाज करवाने के लिए आए हुए लोगों के लिए बहुत मददगार साबित होगी.

दिल्ली में होगा पहला ट्रायल

इस पेशेंट नेविगेटर सिस्टम का ट्रायल पहले दिल्ली के कुछ चुनिंदा अस्पतालों में होगा. फिर जाकर इसे बाकी जगहों पर शुरू किया जाएगा. इन अस्पतालों की सूची में दिल्ली के एलएनजेपी, जीबी पंत या जीटीबी अस्पताल का नाम शामिल है, जहां यह पेशेंट नेविगेटर तैनात किए जाएंगे और देखा जाएगा कि यह सिस्टम मरीजों के लिए कितनी हेल्पफुल साबित होगी और मरीजों से उन के अनुभव का फीडबैक लिया जाएगा. उसी आधार पर तय किया जाएगा कि आगे इस व्यवस्था को बाकी के सरकारी अस्पतालों में लागू किया जाना चाहिए या नहीं. 

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इस व्यवस्था के तहत इस तरह काम किया जाएगा! 

जब कोई मरीज अस्पताल पहुंचेगा, तब उसे या तो हेल्प डेस्क द्वारा मदद दी जाएगी या तो एक नेवीगेटर असाइन किया जाएगा, इसके बाद उस मरीज को असाइन्ड नेवीगेटर के द्वारा सही रजिस्ट्रेशन काउंटर पर ले जाया जाएगा ताकि उसका रजिस्ट्रेशन करवाया जा सके, फिर उसका संबंधित डॉक्टर से इलाज करवाया जाएगा और जरूरत के अनुसार उसकी लैब में जांच करवाई जाएगी. साथ ही दवा लेने में भी उस की मदद की जाएगी. इससे मरीजों को बार-बार हर जगह पूछताछ नहीं करनी होगी और उन का समय भी बचेगा.

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मरीजों को मिलेगी डिजिटल मदद

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इस व्यवस्था के तहत अस्पतालों में टोकन सिस्टम और डिस्प्ले बोर्ड का इस्तेमाल किया जाएगा. साथ ही मरीजों को मोबाइल एप्स के जरिए उनकी बारी, चेकअप और लोकेशन से जुड़ी जानकारी दी जाएगी. इससे अस्पताल प्रशासन को मरीजों की जरूरतों और उनकी संख्या को मैनेज करने में मदद मिलेगी और अस्पताल में भीड़ भी कम होगी.

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