दिल्ली बिल्डिंग हादसे का पहला VIDEO देख कांप उठेंगे, आंखों के सामने मलबे में बदली इमारत
Delhi building Collapse: हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 12 लोग घायल बताए जा रहे हैं. घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है. वहीं, मलबे में अभी भी कुछ लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है.
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Delhi building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके से रविवार दोपहर आई एक दर्दनाक खबर ने हर किसी को झकझोर दिया. दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास एक संकरी गली में बनी करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. इस इमारत में लड़कों के रहने के लिए पेइंग गेस्ट यानी PG चल रहा था. देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे में पूरी बदल गई और वहां रहने वाले छात्रों और दूसरे लोगों के बीच चीख-पुकार मच गई. हादसा इतना अचानक हुआ कि कई लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला.
हादसे में 6 लोगों की मौत, कई घायल
इस हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 12 लोग घायल बताए जा रहे हैं. घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है. वहीं, मलबे में अभी भी कुछ लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है. हादसे के बाद बाद से ही राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाने में जुटे हैं. रेस्क्यू टीम बेहद सावधानी से काम कर रही है, क्योंकि मलबे के अंदर किसी के जिंदा होने की उम्मीद अभी भी बनी हुई है.
हादसे का एक CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें इमारत के अचानक गिरने का दृश्य दिखाई देता है. वीडियो देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि हादसा कितना भयावह था. कुछ ही पलों में खड़ी इमारत मलबे के ढेर में बदल गई.
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— NMF NEWS (@NMFNewsNational) September 7, 2026
दूसरे शहरों से पढ़ने आए छात्रों के परिवार परेशान
सत्य निकेतन और इसके आसपास का इलाका दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों के बीच काफी जाना-पहचाना है. देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली पढ़ने आने वाले बहुत से छात्र यहां PG या किराए के कमरों में रहते हैं. ऐसे में हादसे की खबर फैलते ही कई परिवारों की चिंता बढ़ गई. जिन छात्रों से परिवार वालों का तुरंत संपर्क नहीं हो पाया, उनके घरों में बेचैनी और डर का माहौल बन गया.
यह हादसा सिर्फ एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है, बल्कि उन तमाम छात्रों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है जो पढ़ाई के लिए अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर दिल्ली आते हैं. परिवार अपने बच्चों को सुरक्षित समझकर यहां भेजते हैं, लेकिन अगर रहने वाली इमारत की सुरक्षा ही सुनिश्चित न हो तो उनकी चिंता स्वाभाविक है.
अवैध PG और जर्जर इमारतों पर उठे सवाल
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हादसे के बाद इलाके में चल रहे कई PG और पुरानी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं. आरोप है कि कुछ जगहों पर बिना जरूरी अनुमति के PG चलाए जा रहे हैं और इमारतों में जरूरत से ज्यादा लोगों को रखा जाता है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन जगहों पर रहने वाले छात्रों से किराया तो लिया जाता है, लेकिन उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा, यह साफ नहीं होता.
सत्य निकेतन हादसे ने एक बार फिर दिल्ली की इमारतों की सुरक्षा और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है. आखिर ऐसी जर्जर इमारतों में लोगों को रहने की अनुमति कैसे मिलती है और समय रहते उनकी जांच क्यों नहीं होती? इन सवालों के जवाब अब जरूरी हैं, ताकि किसी दूसरे परिवार को अपने बच्चे को खोने का दर्द न सहना पड़े.