आवारा कुत्तों को लगेगा ‘मौत का इंजेक्शन’… सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, डॉग लवर्स और NGO को झटका
अब सार्वजनिक जगहों से हर हाल में आवारा कुत्ते हटाए जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने डॉग लवर्स के सामने डॉग बाइट के जानलेवा आंकडे रखे. बेंच ने आदेश दिया कि खतरनाक और बीमार आवारा कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है.
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Supreme Court on Stray Dogs: देश में डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने फैसले को बरकरार रखा है. शीर्ष अदालत ने उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें डॉग लवर्स की ओर से स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के पूर्व आदेश में बदलाव की मांग की गई थी.
यानी अब हर हाल में पब्लिक स्पॉट से अवारा कुत्तों को हटाया ही जाएगा. सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला डॉग लवर्स के लिए बड़ा झटका और निराशा भरा है. कोर्ट ने साफ-साफ कहा है कि पशु जन्म नियंत्रण Animal birth Control Centre (ABC) कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किए जाने के कारण समस्या और गंभीर होती जा रही है.
अवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
जस्टिस विक्रम नाथ (Vikram Nath) की अगुवाई वाली बेंच ने मामले पर सुनवाई की. जिसमें कहा कि
‘खतरनाक और बीमार आवारा कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है. लोगों की जान की सुरक्षा बेहद जरूरी है. जो अफसर निर्देश न मानें, उन पर अवमानना का केस चलाया जाए.’
अपने आदेश में कोर्ट ने आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी को लेकर दिए गए निर्देशों को वापस लेने की मांग वाली सभी याचिकाओं को खारिज किया. इस मामले में बेंच ने अब बेहद सख्त फैसला लिया है. जिससे डॉग लवर्स में मायूसी की लहर है.
डॉग बाइट के कितने मामले सामने आए, कोर्ट ने बताया
कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और यह अब बेहद गंभीर समस्या बन चुकी है. जस्टिस विक्रम नाथ (Vikram Nath) की अगुवाई वाली बेंच ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा, राजस्थान के श्रीगंगानगर शहर में मात्र एक महीने में कुत्तों के काटने के 1,084 मामले दर्ज किए गए.
बेंच ने कहा, कई छोटे बच्चों के चेहरे पर गंभीर चोटें आईं. तमिलनाडु में साल के पहले चार महीनों में करीब दो लाख कुत्तों के काटने के मामले सामने आए.
कोर्ट ने कहा कि दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (आईजीआई) समेत देश के व्यस्त एयरपोर्ट्स पर भी कुत्तों के काटने की घटनाएं हो रही हैं. सूरत में एक जर्मन यात्री को भी कुत्ते ने काट लिया. ऐसी घटनाएं शहरी प्रशासन और गवर्नेंस पर लोगों के विश्वास को प्रभावित कर रही हैं.
नहीं माना आदेश तो होगी अवमानना की कार्रवाई…
सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त और 7 नवंबर 2025 को जारी अपने निर्देशों का जिक्र करते हुए कहा कि इन निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर राज्य सरकारें और संबंधित अधिकारी इन निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई, अनुशासनात्मक कार्रवाई और व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी.
डॉग लवर्स ने याचिका में क्या कहा था?
डॉग लवर्स ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों से हटाने का आदेश बहुत कठोर है और इससे कुत्तों के अधिकारों का हनन हो रहा है. उन्होंने एबीसी कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया था, हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए जनहित और सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को एबीसी कार्यक्रम को सख्ती से लागू करने और आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गरिमा के साथ जीने के अधिकार में कुत्तों के खतरे से मुक्त होकर रहने का अधिकार भी शामिल है.
कोर्ट ने कहा, ‘संविधान ऐसे समाज की परिकल्पना नहीं करता, जहां बच्चों और बुजुर्गों को अपनी शारीरिक ताकत या किस्मत के भरोसे जीना पड़े.’
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दरअसल, नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन जैसे पब्लिक प्लेस से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश जारी किए थे. कोर्ट ने कहा था कि कुत्तों को शेल्टर होम्स में रखें और उन्हें वापस न छोड़ें.
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