बंगाल में इमामों और पुरोहितों को झटका, CM सुवेंदु ने बंद किया भत्ता, बोले- शिक्षा और छात्रवृत्ति पर खर्च करेंगे ये पैसा
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इमामों और पुरोहितों का भत्ता बंद कर उस राशि को शिक्षा और छात्रवृत्ति पर खर्च करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है.
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पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित बीजेपी सरकार ने सोमवार को एक अहम फैसला लेते हुए राज्य के इमामों और पुजारियों को मिलने वाले मासिक भत्तों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का ऐलान कर दिया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी पैसे का इस्तेमाल धार्मिक भत्तों पर नहीं, बल्कि शिक्षा और छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए खर्च किया जाएगा.
महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये की आर्थिक मदद
सीएम सुवेंदु ने महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए प्रति माह 3000 रुपये की वित्तीय मदद और निशुल्क बस सफर से संबंधित प्रस्तावों को भी हरी झंडी दी है. मुख्यमंत्री के अनुसार, इन योजनाओं से बचने वाले बजट को अब 'विवेकानंद मेधावी छात्रवृत्ति' (विवेकानंद मेरिटोरियस स्कॉलरशिप) में डाइवर्ट किया जाएगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस स्कॉलरशिप का फायदा बिना किसी भेदभाव के हर धर्म (हिंदू, मुस्लिम, सिख, जैन) और हर राजनीतिक विचारधारा से जुड़े छात्रों को मिलेगा, क्योंकि पश्चिम बंगाल में अब तुष्टिकरण की राजनीति का दौर खत्म हो चुका है.
ममता सरकार में शुरू हुई थी योजना
उन्होंने आगे कहा कि, ये योजनाएं इस माहिने की समाप्ति तक ही चलती रहेंगी और इसके बाद इन्हें पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. बता दें कि ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में इमामों को 3,000 रुपये और पुरोहितों को 2,000 रुपये की मासिक सहायता राशि दी जाती थी. इमामों के लिए यह व्यवस्था साल 2012 में शुरू की गई थी, जबकि पुजारियों के लिए इस आर्थिक मदद की शुरुआत सितंबर 2020 में कोरोना काल के लॉकडाउन के दौरान हुई थी.
1 जून से योजनाएं लागू
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इसके अलावा राज्य सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र के एक मुख्य वादे को पूरा करते हुए 'अन्नपूर्णा योजना' को मंजूरी दे दी है. इसके तहत 1 जून से प्रदेश की महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी. इसके साथ ही 1 जून से ही पूरे सूबे में महिलाओं के लिए सरकारी बसों में यात्रा पूरी तरह मुफ्त कर दी जाएगी.
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