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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक का पहला रिएक्शन, बोले- यह लोकतंत्र की जीत है, अब सुधारों की बारी

छात्र आंदोलन के दबाव में शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफ़े दे दिया है. इस पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया सामने आई है.

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक का पहला रिएक्शन, बोले- यह लोकतंत्र की जीत है, अब सुधारों की बारी
Image Source: X/ @Wangchuk66
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह जीत सीधे सड़कों से निकले लोकतांत्रिक आंदोलन, शांति, धैर्य और निरंतर संघर्ष की जीत है.

यह लोकतंत्र की जीत: सोनम वांगचुक 

वांगचुक ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'यह लोकतंत्र की जीत है... सीधे सड़कों से निकले प्रत्यक्ष लोकतंत्र की जीत। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी), देश की जेन जी जेनरेशन और उन सभी नागरिकों को बधाई, जिन्होंने डर और डर के माहौल से ऊपर उठकर देश के हर कोने से अपनी आवाज़ बुलंद की.' उन्होंने आगे लिखा, 'अब जवाबदेही के बाद सुधारों की बारी है.' वांगचुक की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से देशभर में विरोध प्रदर्शन चल रहे थे और जंतर-मंतर पर भी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में आंदोलन जारी था.

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धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?

इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि 'राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है.' उन्होंने एक्स पर जारी लंबे संदेश में कहा कि वे पिछले चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं तथा युवाओं की आकांक्षाओं और न्यायोचित अपेक्षाओं का हमेशा सम्मान करते रहे हैं. प्रधान ने स्वीकार किया कि 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएं सामने आई थीं, जिसके बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया। उन्होंने यह भी बताया कि अगले वर्ष से नीट परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही उन्होंने इस पूरे मामले की जिम्मेदारी ली और कभी इससे पीछे नहीं हटे। उनका उद्देश्य था कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो।

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बताते चलें कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में जंतर-मंतर पर पिछले दस दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मामला उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का है. उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि देश की युवा शक्ति किसी भ्रम या राजनीतिक टकराव में उलझे या छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों में फंस जाए. प्रधान ने लिखा कि देश की एकता बनाए रखने, छात्रों के हितों की रक्षा करने और उन्हें पढ़ाई व करियर पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देने के उद्देश्य से उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया.

(INPUT-IANS)

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