जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

एक बार फिर दिखा मोदी सरकार का जलवा, IMF के बाद अब Moody’s ने बंपर GDP ग्रोथ का लगाया अनुमान, विरोधियों को मिला करारा जवाब

मूडीज ने भारत की वित्त वर्ष 26-27 GDP ग्रोथ का अनुमान 6% से बढ़ाकर 7% कर दिया है. एजेंसी ने मजबूत घरेलू मांग, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, निजी निवेश के संकेत और सेवाओं की मजबूती को इसकी प्रमुख वजह बताया है. मिडिल ईस्ट संघर्ष के झटकों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती भी अनुमान बढ़ाने का आधार बनी.

एक बार फिर दिखा मोदी सरकार का जलवा, IMF के बाद अब Moody’s ने बंपर GDP ग्रोथ का लगाया अनुमान, विरोधियों को मिला करारा जवाब
Image Source: IANS
Advertisement

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर अपने संबोधनों में भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हैं. हालांकि, आर्थिक विकास को लेकर सरकार के दावों पर विपक्षी दलों की ओर से सवाल और तंज भी देखने को मिलते रहे हैं. इस बीच अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्टों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर एक अहम तस्वीर पेश की है. IMF के बाद मूडीज रेटिंग् (Moody’s Ratings) ने भी भारत की GDP ग्रोथ को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है. मूडीज ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहले 6 फीसदी आर्थिक वृद्धि का अनुमान जताया था, जिसे अब बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया गया है. रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, मिडिल ईस्ट संघर्ष से पैदा हुए वैश्विक आर्थिक दबाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने जिस तरह अपनी गति बनाए रखी, वह उसके पहले के अनुमान से बेहतर रहा है.

मुश्किल वैश्विक माहौल में भारत ने दिखाई मजबूती

दरअसल, मिडिल ईस्ट संघर्ष ने दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं के सामने ऊर्जा कीमतों, सप्लाई और व्यापार से जुड़ी चुनौतियां बढ़ाई हैं. भारत भी कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए इन परिस्थितियों का असर पड़ने की आशंका थी. हालांकि मूडीज के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था ने इन झटकों को उम्मीद से बेहतर तरीके से संभाला है. हिंदुस्तान में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी का नया अनुमान बताता है कि घरेलू मांग, निवेश और आर्थिक गतिविधियों में बनी मजबूती ने बाहरी जोखिमों के असर को कुछ हद तक कम किया है. मूडीज ने यह भी कहा है कि भारत की ग्रोथ को लेकर जोखिम अभी खत्म नहीं हुए हैं. खासतौर पर ऊंची ऊर्जा कीमतें और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं आगे चुनौती बन सकती हैं.

घरेलू मांग बनी अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत

Advertisement

भारत की आर्थिक रफ्तार में सबसे अहम भूमिका घरेलू मांग की मानी जा रही है. निजी खपत में मजबूती के साथ सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च ने निवेश गतिविधियों को सहारा दिया है. इसके अलावा निजी निवेश में सुधार के संकेत और सेवाओं के क्षेत्र की मजबूत गतिविधियां भी ग्रोथ के लिए सकारात्मक मानी जा रही हैं. यानी वैश्विक स्तर पर परिस्थितियां पूरी तरह आसान नहीं होने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था को सिर्फ बाहरी बाजारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है. देश की अपनी घरेलू मांग भी आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. यही वजह है कि अब भारत मजबूती से आगे बढ़ रहा है. 

GDP के आंकड़े भी दे रहे हैं मजबूती का संकेत

भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े आधिकारिक आंकड़े भी हालिया दौर में मजबूत तस्वीर पेश करते हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक GDP वृद्धि 7.7% रहने का अनुमान लगाया गया था, जबकि 2024-25 में यह दर 7.1% थी. वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि 7.8% दर्ज की गई थी. वहीं वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान वास्तविक GDP में 7.8% की वृद्धि दर्ज की गई. इसी अवधि में वास्तविक GVA की वृद्धि दर 8.2% रही. ये आंकड़े बताते हैं कि नए वित्त वर्ष की शुरुआत में भी आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार बनी हुई थी.

IMF, S&P और RBI के अनुमान से कैसे अलग है मूडीज का आंकड़ा

Advertisement

मूडीज का 7% का नया अनुमान दूसरी प्रमुख संस्थाओं के हालिया अनुमानों से ऊपर है. IMF ने जुलाई 2026 के अपडेट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वृद्धि दर 6.4% रहने का अनुमान लगाया था. IMF ने भारत को दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बताया था और निजी खपत तथा सेवाओं की मजबूती को अहम आधार माना था. S&P Global ने FY27 के लिए 6.6% और RBI ने भी 6.6% का अनुमान रखा है. दोनों संस्थाओं ने ऊर्जा कीमतों, मिडिल ईस्ट संघर्ष, मौसम और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखा था.

यह भी पढ़ें

बताते चलें कि मूडीज का 7% अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा मजबूती को लेकर एक सकारात्मक संकेत जरूर देता है, लेकिन आगे की राह पूरी तरह जोखिम मुक्त नहीं है. तेल की कीमतें, महंगाई, मानसून और वैश्विक तनाव आने वाले महीनों में ग्रोथ की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं. फिलहाल तस्वीर यही है कि मजबूत घरेलू मांग और निवेश के सहारे भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बीच अपनी रफ्तार बनाए रखने की कोशिश कर रही है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें