PM मोदी पर विवादित टिप्पणी कांग्रेस अध्यक्ष खरगे को पड़ सकता है भारी, किरेन रिजिजू ने चुनाव आयोग से की शिकायत; जानें पूरा मामला
मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर सियासी बवाल मचा हुआ है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चुनाव आयोग से शिकायत कर कांग्रेस अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग की है.
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देश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘आतंकवादी’ कहे जाने के कथित बयान ने सियासी पारा चढ़ा दिया है. भारतीय जनता पार्टी ने इस टिप्पणी को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए सीधे चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है. इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी माहौल में नई बहस को जन्म दे दिया है.
बीजेपी की चुनाव आयोग से शिकायत
बीजेपी ने अपनी शिकायत में कहा है कि तमिलनाडु में चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू है और ऐसे समय में इस तरह का बयान चुनावी वातावरण को प्रभावित कर सकता है. पार्टी का आरोप है कि यह टिप्पणी सिर्फ राजनीतिक आलोचना नहीं, बल्कि व्यक्तिगत हमला है, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) खुद पार्टी नेताओं के साथ चुनाव आयोग पहुंचे और औपचारिक शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत हैं और इस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए.
We have filed a strong complaint against Congress President Shri @kharge ji for his shocking and disgraceful remark calling Hon’ble PM Shri @narendramodi ji a “terrorist.”
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) April 21, 2026
This is not just derogatory, it is a dangerous & unprecedented attack on democratic institutions.
A blatant… pic.twitter.com/xtJWCoS79Z
बीजेपी ने क्या कहा?
बीजेपी ने अपने पत्र में यह भी कहा कि इस बयान को भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की कई धाराओं के तहत देखा जा सकता है. पार्टी का दावा है कि इस तरह के आरोप न सिर्फ मानहानि की श्रेणी में आते हैं, बल्कि यह मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश भी हो सकते हैं. शिकायत में चुनाव आयोग से मांग की गई है कि इस मामले में तुरंत संज्ञान लिया जाए, बयान वापस लिया जाए या सार्वजनिक माफी मांगी जाए, और भविष्य में ऐसी टिप्पणी से बचने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं.
अमित शाह का तीखा हमला
इस पूरे विवाद पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार अपने बयान से राजनीतिक संवाद का स्तर गिरा रही है. अमित शाह ने कहा कि देश के चुने हुए प्रधानमंत्री को इस तरह संबोधित करना न सिर्फ उनका अपमान है, बल्कि उन करोड़ों लोगों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाता है, जो उनका समर्थन करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने वाले नेता को इस तरह संबोधित करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.
Every day, the Congress is hitting new lows in its demeanour, breaking its own record in lowering the standard of public discourse. Today, Congress President Mallikarjun Kharge Ji breached every standard of public conduct and brought shame to the nation by calling the elected…
— Amit Shah (@AmitShah) April 21, 2026
कांग्रेस की सफाई, बयान का बदला संदर्भ
विवाद बढ़ने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने बयान पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि उनका आशय प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर ‘आतंकवादी’ कहना नहीं था, बल्कि उनका मतलब यह था कि सरकार की नीतियों के जरिए राजनीतिक दलों और लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है. खरगे ने यह भी कहा कि उन्होंने केवल यह जताने की कोशिश की थी कि केंद्रीय एजेंसियों के जरिए विपक्ष पर दबाव बनाया जा रहा है. हालांकि, बीजेपी ने इस सफाई को खारिज करते हुए कहा कि यह बयान पहले ही सार्वजनिक हो चुका है और इससे नुकसान हो चुका है.
तमिलनाडु चुनाव और बयान की टाइमिंग
दरअसल, यह पूरा मामला तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के संदर्भ में सामने आया है. खरगे एआईएडीएमके और बीजेपी के संभावित गठबंधन पर सवाल उठा रहे थे. इसी दौरान उन्होंने यह विवादित टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और समानता की बात करने वाले नेताओं की विचारधारा के खिलाफ इस तरह का गठबंधन है. इसी बहस के दौरान उनका बयान सामने आया, जिसने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया. जानकारों का मानना है कि चुनावी दौर में नेताओं के बयान पहले से ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं. आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद हर शब्द का राजनीतिक और कानूनी महत्व बढ़ जाता है. ऐसे में इस तरह के विवाद चुनाव आयोग के लिए भी चुनौती बन जाते हैं.
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बहरहाल, चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. लेकिन यह साफ है कि आने वाले दिनों में इस पर कोई न कोई फैसला जरूर लिया जाएगा. इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या चुनावी राजनीति में बयानबाज़ी की सीमा तय होनी चाहिए. एक तरफ आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, तो दूसरी तरफ आम जनता यह देख रही है कि आखिर इस विवाद का अंत किस दिशा में जाएगा. फिलहाल इतना तय है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस के केंद्र में बना रहेगा.
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