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मणिपुर में फिर हिंसा: 28 दिनों से बंधक बने 6 नागा लोगों की हत्या से तनाव, गांव-गांव, जगंल-जंगल दबिश दे रही सेंटर फोर्स

मणिपुर पिछले तीन साल से हिंसा की जद में घिरा हुआ है, लोगों की आंखों में दर्द है जो कभी चीख तो कभी खामोशी में बदल जाता है. केंद्रीय बलों की तैनाती के बावजूूद यहां हत्याओं का दौर जारी है.

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12 Jun 2026
( Updated: 12 Jun 2026
08:42 AM )
मणिपुर में फिर हिंसा: 28 दिनों से बंधक बने 6 नागा लोगों की हत्या से तनाव, गांव-गांव, जगंल-जंगल दबिश दे रही सेंटर फोर्स
Source- IANS/Army
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Manipur: मणिपुर में हिंसा को तीन साल होने वाले हैं लेकिन हालात नहीं बदल रहे. केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद यहां हिंसक झड़प और आगजनी थमनें का नाम नहीं ले रही. ताजा मामला कांगपोकपी जिले का है जहां 6 नागा लोगों की हत्या से तनाव बढ़ गया है. 

6 लोगों के शव सैतू-गाम्फाजोल सब-डिविजन में खराम वैफेई गांव के पास एक जंगली इलाके से बरामद किए गए. यह गांव मुख्य रूप से कुकी-जो आदिवासी समुदाय का इलाका है. 

नागा समुदाय ने शव लेने से किया इंकार

आदिवासी संस्था ने यह भी घोषणा की कि जब तक उनकी चार सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई नहीं होती और मणिपुर सरकार और केंद्र सरकार न्याय सुनिश्चित नहीं करत, तब तक वे छह नागा बंधकों के शव स्वीकार नहीं करेंगे. 

उनकी मुख्य मांगों में सभी कुकी उग्रवादी समूहों के साथ 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स' समझौते को रद्द करना है. इसके साथ 13 मई को लेइलोन वैफेई गांव से दो पादरियों सहित 18 नागा नागरिकों के अपहरण और उनमें से छह की हत्या में कथित रूप से शामिल कुकी नेशनल फ्रंट के सभी सदस्यों की तत्काल गिरफ्तारी और उन पर मुकदमा चलाने की मांग शामिल है. 

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13 मई को हिंसा में लोगों को बंधक बनाया गया

13 मई को हुई हिंसक घटनाओं के बाद, कांगपोकपी और सेनापति जिलों में अलग-अलग हथियारबंद समूहों ने कुकी और नागा समुदायों के कम से कम 50 लोगों को बंधक बना लिया था. इन घटनाओं में कांगपोकपी जिले में तीन चर्च नेताओं की मौत हो गई थी और चार अन्य घायल हो गए थे। अधिकारियों, समुदाय के नेताओं और कई नागरिक समाज संगठनों की लगातार कोशिशों के बाद 14 और 15 मई को दोनों समुदायों के लगभग 30 लोगों को रिहा कर दिया गया था. 

तब से, नागा और कुकी समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और अगवा किए गए लोगों, छह नागा और कुकी समुदायों के 14 सदस्यों को सुरक्षित छुड़ाने की मांग कर रहे थे. 

मणिपुर के मुख्यमंत्री ने क्या कहा? 

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लगातार हिंसा पर मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने कड़ा एक्शन लेने की बात कही है. उन्होंने कहा, मणिपुर सरकार अत्याचारों को मूकदर्शक बनकर नहीं देखेगी. दोषियों को कानून के अनुसार सजा दी जाएगी. 

पुलिस ने क्या बताया? 

इस बीच, मणिपुर पुलिस ने एक बयान में कहा कि हाल की घटनाओं को देखते हुए खुफिया जानकारी मिली थी कि हथियारबंद सदस्य पहाड़ी जिलों के अलग-थलग गांवों पर हमले की योजना बना रहे थे. इस जानकारी के आधार पर, सुरक्षा बलों ने उखरुल जिले के होरेई काफुंग हिल्स (लोअर लीशान रिज) इलाके में एक संयुक्त अभियान चलाया. 

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बयान में कहा गया, ‘अभियान के दौरान, पहाड़ियों की चोटी पर लगभग एक दर्जन हथियारबंद सदस्य देखे गए. उनमें से कुछ भाग गए, जबकि आठ सदस्यों को हिरासत में लिया गया, उनके हथियार जब्त किए गए और बाद में कड़ी चेतावनी के साथ छोड़ दिया गया कि वे पहाड़ियों में न जाएं या हथियार न रखें, क्योंकि ऐसी गतिविधियां प्रतिबंधित हैं. पुलिस के अनुसार, पहाड़ी की चोटी पर बने अनधिकृत बंकरों से बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और युद्ध से जुड़ी अन्य सामग्री बरामद की गई. बयान में यह भी कहा गया कि सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र में प्रभावित समुदायों और संवेदनशील गांवों की सुरक्षा के लिए अभियान चलाया है. 

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आपको बता दें कि मणिपुर पिछले तीन सालों से जातीय और सामाजिक नफरत और हिंसा से घिरा हुआ है. यहां मैतेई और कुकी समुदाय के विवाद में हर दिन खून-खराबा और कल्तेआम, अपहरण जैसे अपराध का दौर जारी है. लोग अपनों के शव गिन रहे हैं. कानून व्यवस्था राज्य से केंद्रीय बलों को सौंपी गई लेकिन वह भी हिंसा को रोकने में नाकाम हैं. 

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