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ब्रिटेन में हिंदुओं की बड़ी जीत… इकलौते हिंदू मंदिर की जमीन मुस्लिम संस्था को बेची, कोर्ट ने पलट दिया फैसला

ब्रिेटेन के पीटरबरो सिटी काउंसिल कैबिनेट फैसले के बाद शहर का इकलौता हिंदू मंदिर और सामुदायिक केंद्र बंद होने जा रहा था, क्योंकि 40 साल पुराने इस मंदिर की जमीन इस्लामिक संस्था को बेच दी गई.

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12 Jun 2026
( Updated: 12 Jun 2026
10:57 AM )
ब्रिटेन में हिंदुओं की बड़ी जीत… इकलौते हिंदू मंदिर की जमीन मुस्लिम संस्था को बेची, कोर्ट ने पलट दिया फैसला
Image By Meta AI
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कट्टरपंथी सोच किस हद तक हावी हो सकती है इसका बड़ा उदाहरण सात समंदर पार विदेशी जमीन पर मिला. जहां हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंचाने के लिए मुस्लिम कट्टरपंथियों ने एक बड़ी साजिश रच डाली, लेकिन हिंदुओं ने इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी और उन्हों न केवल बेनकाब किया बल्कि अदालत में बड़ी जीत भी हासिल की. 

ये वाकया है ब्रिटेन का, जहां इकलौते 40 साल पुराने हिंदू मंदिर की जगह मुस्लिम संस्था को दे दी गई. वो भी गैर-कानूनी तरीके से, इसके बाद पूरा मामला कोर्ट पहुंचा और हिंदू समुदाय ने इसके लिए लंबी लड़ाई लड़ी. सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने काउंसिल के फैसले को रद्द कर दिया. ये सनातन की जीत थी जिसने कट्टरपंथी सोच को मात दी. 

क्या है पूरा मामला, विस्तार से समझिए

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दरअसल, लंदन में रहने वाले हिंदुओं का संगठन भारत हिंदू समाज (BHS) ने आरोप लगाया था कि है कि पीटरबरो सिटी काउंसिल के कैबिनेट फैसले के बाद शहर का इकलौता हिंदू मंदिर और सामुदायिक केंद्र बंद होने जा रहा था. 

फरवरी में पीटरबरो सिटी काउंसिल ने 1986 में बने इस मंदिर को बंद कर उसकी जमीन 'यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन' को बेचने का फैसला किया था. उस दौरान हिंदू समाज ने PM मोदी से भी मंदिर को बचाने की गुहार लगाई थी. अब तीन महीने बाद इस पर कोर्ट का फैसला हिंदुओं के पक्ष में आया है. 

हिंदू समाज ने अपनी याचिका में कहा था, ‘पीटरबरो सिटी काउंसिल के मंदिर की जमीन बेचने के फैसले में कई खामियां हैं. मंदिर प्रबंधन 2017 से इस जमीन को खरीदने के लिए काउंसिल से बातचीत कर रहा था, लेकिन उसकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया.’ 

आरोप लगे कि यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन को मंदिर की जमीन देने के मामले में 'इक्वालिटी एक्ट 2010' का पालन नहीं किया गया. अपनी याचिका में हिंदुओं ने कहा कि ये मंदिर भी बंद हो गया तो उनके पास पूजा का कोई स्थल नहीं बचेगा. दूसरी ओर इस्लामिक संस्था के पास 40 सेंटर और 60 शाखाएं हैं. 

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लालच में हिंदुओं को दी गहरी चोट 

बताया जा रहा है इस्लामिक कट्टरपंथियों ने इन संस्थाओं को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया था, इसी लालच में वह इकलौते हिंदू मंदिर की जमीन पर भी हक जताते हुए अवैध रूप से हथियाना चाहते थे. 

40 साल से इस जमीन पर मंदिर संचालित किया जाता था. यह मंदिर हिंदुओं की आस्था के साथ-साथ 18 हजार हिंदू श्रद्धालुओं का आश्रय स्थल भी है. जहां बुज़ुर्गों के लिए भोजन, बच्चों के लिए सांस्कृतिक शिक्षा और सामाजिक सहयोग जैसी सेवाएं दी जाती थीं. यह कदम सरकार के खर्च को भी बचाता है.  

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एक तरफ इस्लामिक संस्था को मंदिर की जमीन गुपचुप बेच दी गई, दूसरी ओर BHS इस जमीन को खरीदने के लिए 14 साल से परिषद से बातचीत कर रहा है, लेकिन उसके प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था. 

इस्लामिक संस्था के सदस्यों का पाकिस्तान कनेक्शन 

पीटरबरो सिटी में करीब 12% मुस्लिम आबादी रहती है, लेकिन इनका प्रभाव सबसे ज्यादा है. आरोप है कि पीटरबरो सिटी काउंसिल को कथित तौर पर शरिया काउंसिल और शरिया सेंटर में बदल दिया है. पीटरबरो सिटी काउंसिल के ज्यादातर सदस्य पाकिस्तान मूल के हैं. 

काउंसिल की लीडर डॉ. शबीना कय्यूम हैं, फाइनेंस और कॉर्पोरेट मामलों के प्रमुख मोहम्मद जमील हैं, सार्वजनिक सुरक्षा मामलों के प्रमुख ज़मीर अली हैं, डेवलपमेंट से जुड़े मामलों के प्रमुख नुमान अली इकबाल हैं जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग एन शहीद के पास है.

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इन लोगों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया, लेकिन औरंगजेब वाली कट्टर सोच पर सनातनी शक्ति ने मात दी. कोर्ट ने काउंसिल के फैसले को रद्द कर दिया और अब मंदिर में हिंदू आस्था का उद्घोष होता रहेगा. 

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