कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, नामांकन से जुड़ी याचिका खारिज, दखल देने से साफ इंकार
कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द से जुड़ी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने चुनावी प्रक्रिया में दखल देने से साफ इंकार कर दिया.
Follow Us:
मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द किए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चंदूरकर की बेंच में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट से मीनाक्षी नटराजन को राहत नहीं मिली. शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता इलेक्शन पिटीशन हाईकोर्ट मे दाखिल कर सकते हैं. मीनाक्षी नटराजन की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए. उन्होंने दलील देते हुए कहा कि एक प्राईवेट शिकायत पर नोटिस हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा,
‘चुनाव से जुड़े मामलों में आमतौर पर अदालत बीच में दखल नहीं देती. संविधान के अनुच्छेद 329(b) के तहत चुनाव प्रक्रिया को सुरक्षित रखा गया है. अनुच्छेद 329(b) में चुनावी मामलों में अदालतों के हस्तक्षेप पर रोक है.’
बेंच ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में सीधे सुप्रीम कोर्ट नहीं आया जा सकता. उम्मीदवार बाद में चुनाव याचिका (चुनाव के बाद हाईकोर्ट में केस) दाखिल कर सकता है और अपने सभी मुद्दे वहां उठा सकता है.
कांग्रेस ने जताई नाराजगी
जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने प्रथमदृष्टया शिकायत में कुछ वजन देखने के बाद ही समन किया होगा. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ये एक निजी शिकायत है. जिसमें संज्ञान नहीं लिया गया है. आरपी एक्ट का कानून कहता है कि कम से कम आरोप तय होने चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है. सिंघवी ने कहा कि अगर रिटर्निंग ऑफिसर मनमाने ढंग से काम करता जिससे किसी एक पार्टी को फायदा होता है, तो उसमें कोर्ट दखल दे सकता है.
सिंघवी ने कहा कि कानून में साफ है जब तक आरोप तय न हो, तब तक नामांकन पत्र में घोषणा करना जरूरी नहीं है. उन्होंने कहा कि जिस शिकायत में मीनाक्षी नटराजन का जिक्र है और घटना का जो समय बताया गया है, उस वक्त मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना की प्रभारी नहीं थीं. ये उनके अप्वाइंट होने के 3 साल पहले की बात है.
चुनाव आयोग की चुप्पी पर सवाल
सिंघवी ने कहा कि इस मामले में कोई आरोप तय नहीं हुआ है, तो इसकी जानकारी उन्हें क्यों देनी चाहिए? अगर कोई क्रिमिनल केस पेंडिंग है, तो वह कैंडिडेट के तौर पर बताएंगी. हम लोग केंद्रीय चुनाव आयोग भी गए थे, एक घंटे तक बहस की और आयोग इस मामले पर चुप है, यह निंदनीय है.
सिंघवी ने दलील में कहा कि कल मुझे अदालत में नहीं सुना गया. इसका नतीजा ये हुआ कि कोई चुनाव नहीं हुआ और दूसरा प्रत्याशी निर्विरोध चुनाव जीत गया. उन्होंने कहा, इंदिरा गांधी बनाम राजनारायण में ये साफ हुआ था कि चुनाव के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड होना चाहिए. सिंघवी की ओर से कहा गया कि इस चुनाव में चुनावी प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की जगह उसे खत्म किया गया.
अभिषेक मनु सिंघवी की दलील पर कोर्ट ने कहा कि हमें कोई ऐसा जजमेंट दिखाइए, जिसमे हमने आरओ के रिजेक्ट किए जाने के बाद नॉमिनेशन स्वीकार करके मामलों में दखल दिया है. जहां पार्लियामेंट्री या लेजिस्लेटिव इलेक्शन में नॉमिनेशन के बाद हमने आरओ के ऑर्डर को खारिज किया हो.
जस्टिस मिश्रा ने कहा कि कोर्ट बार-बार कहता रहा है कि अगर एक बार नॉमिनेशन रद्द हो जाए, सही या गलत, तो इलेक्शन पिटीशन ही एकमात्र रास्ता है. सिंघवी ने कहा कि यहां आरओ ने 2+2 को 6 बता दिया. कानून के खिलाफ जाकर रिटर्निंग ने फैसला लिया. उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन को चुनाव तक लड़ने नहीं दिया गया, लड़ कर हारती या जीतती उससे तय होता.
एकतरफा नतीजे देने का आरोप
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव हुए बिना ही एकतरफा नतीजे घोषित कर दिए गए. आरओ की जिम्मेदारी कानून का पालन करना था, जो फैसला दिया गया, उसके हिसाब से आरओ का फैसला पलटना ही नहीं चाहिए, बल्कि उसे पद से हटा देना चाहिए.
BJP प्रत्याशी महेश केवट के वकील ने क्या कहा?
वहीं, BJP प्रत्याशी महेश केवट के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि 2018 के संशोधन के बाद से ये साफ है कि हर तरह के पेंडिंग केस बताना जरूरी है, चाहे संज्ञान हुआ है या नहीं.
रोहतगी ने कहा कि आर्टिकल 32 या 226 के तहत ये याचिका सुनवाई लायक नहीं है. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता के किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है. चुनावी याचिका लगाना मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि कानूनी अधिकार है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ज्योति बसु जजमेंट में साफ किया था.
यह भी पढ़ें- ‘मोदी ने मरवा दिया…’ कांग्रेस की मीटिंग में राहुल गांधी ने ऐसा क्यों कहा? कर दिया बड़ा ऐलान
यह भी पढ़ें
दरअसल, मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था. कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल भी था, लेकिन 9 जून को BJP ने आपत्ति लगाई कि मीनाक्षी ने अपने खिलाफ दर्ज एक केस की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी. इसे स्वीकार करते हुए रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा ने मीनाक्षी का नामांकन निरस्त कर दिया था.
10 जून को कांग्रेस ने नामांकन रद्द करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. इससे पहले चुनाव आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई गई थी.