हवा में फेल हुए तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम... 4 सेकंड तक कंट्रोल से बाहर था Air India का विमान, जांच में हुआ बड़ा खुलासा
फुकेट-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट में 4 अगस्त को विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे गिर गया था. शुरुआती जांच में पता चला कि A-320 के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम करीब 4 सेकेंड तक फेल रहे, जिससे विमान का नियंत्रण प्रभावित हुआ और ऑटोपायलट बंद हो गया. हादसे में 20 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.
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बीते 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में जो हुआ, उसने विमान में बैठे यात्रियों को कुछ पल के लिए ऐसी दहशत में डाल दिया, जिसे वे शायद ही कभी भूल पाएंगे. उड़ान के दौरान एयरबस A320neo ने अचानक करीब 300 फीट की नीचे आ गई. इस झटके में कई यात्री और क्रू मेंबर अपनी सीटों से उछलकर ऊपर जा गिरे और कुछ लोग विमान की छत तथा ओवरहेड बिन से टकरा गए. शुरुआती रिपोर्टों में 17 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी, जबकि बाद की मीडिया रिपोर्ट में घायल यात्रियों और क्रू की संख्या 24 तक बताई गई है. विमान हालांकि सुरक्षित दिल्ली पहुंच गया. किसी प्रकार की जान-माल की हानि नहीं हुई.
4 सेकंड तक कंट्रोल से बाहर था विमान
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे की जांच में अब तकनीकी पहलू सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहा है. एयरबस की शुरुआती तकनीकी जांच के मुताबिक विमान के तीनों स्वतंत्र हाइड्रोलिक सिस्टम में एक साथ परेशानी आई. इसके कारण करीब 4 सेकंड तक एलिवेटर और एलरोन जैसे महत्वपूर्ण फ्लाइट कंट्रोल सरफेस ने सामान्य तरीके से काम नहीं किया. यही वे हिस्से हैं जिनकी मदद से विमान ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं दिशा में नियंत्रित होता है. इस दौरान ऑटोपायलट भी बंद हो गया और कॉकपिट में स्टॉल की चेतावनी सुनाई दी. स्थिति इसलिए भी गंभीर थी क्योंकि पायलटों को विमान के नियंत्रण में मुश्किल का सामना करना पड़ा. शुरुआती आकलन में हाइड्रोलिक प्रेशर से जुड़े स्विच में खराबी की आशंका जताई गई है, लेकिन इसे हादसे का अंतिम कारण नहीं माना गया है. एयरबस ने आगे की जांच के लिए विमान के रखरखाव से जुड़े रिकॉर्ड भी मांगे हैं.
विमान तेजी से आ गया था नीचे आया
जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार जब हाइड्रोलिक सिस्टम ने कुछ सेकंड बाद दोबारा काम करना शुरू किया, तब विमान ने तेजी से नीचे की ओर गोता लगाया. इसी दौरान केबिन में बैठे लोगों को अचानक ऐसा महसूस हुआ जैसे जमीन उनके पैरों के नीचे से खिसक गई हो. सीट बेल्ट नहीं लगाए यात्रियों के लिए यह झटका और भी खतरनाक साबित हुआ. दिल्ली पहुंचने के बाद घायलों को चिकित्सा सहायता दी गई. विमान सुरक्षित तरीके से लैंड हुआ और घटना के बाद एयरक्राफ्ट का डेटा तथा कॉकपिट रिकॉर्डर जांच एजेंसियों के कब्जे में लिए गए.
पायलट के ड्रग टेस्ट ने बढ़ाई चिंता
इस घटना में तकनीकी जांच के साथ पायलट की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है. घटना के बाद किए गए परीक्षण में विमान के कप्तान के शरीर में गांजा यानी मारिजुआना के संकेत मिले. बाद में पुष्टि परीक्षण में भी इसके पॉजिटिव होने की जानकारी सामने आई. हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि विमान के अचानक नीचे जाने की वजह यही थी. दोनों मामलों के बीच संबंध जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा. रिपोर्टों के मुताबिक पायलट ने नींद से जुड़ी परेशानी और डॉक्टर की सलाह पर नींद की दवा लेने की बात भी कही है. घटना के समय विमान का संचालन को-पायलट कर रहे थे. पायलट की घटना के दौरान और लैंडिंग के बाद की स्थिति को लेकर भी कई दावे सामने आए हैं, लेकिन इन सभी पहलुओं की आधिकारिक जांच अभी जारी है.
जांच में सामने आएगा असली कारण
इस पूरे मामले की जांच भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) कर रहा है. फ्रांस की BEA और एयरबस के विशेषज्ञ भी तकनीकी जांच में सहयोग कर रहे हैं. AAIB ने लोगों और मीडिया से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले किसी एक कारण को हादसे के लिए जिम्मेदार न माना जाए.
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बहरहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक साथ तीन हाइड्रोलिक सिस्टम में समस्या आखिर कैसे आई. अगर यह खराबी किसी विशेष तकनीकी हिस्से से जुड़ी है, तो उसकी पहचान भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बेहद अहम होगी. यात्रियों के लिए यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि विमान में सीट बेल्ट केवल टेकऑफ और लैंडिंग के समय के लिए नहीं होती. अचानक आने वाली ऐसी स्थिति में वही छोटी सी सावधानी बड़ी चोट से बचा सकती है.