4.5 घंटे की बैठक, 8 ग्रुप और 4 बड़े मुद्दे पर फोकस... PM मोदी ने 'चिंतन शिविर' में मंत्रियों को दिया जनसेवा का बड़ा मंत्र
पीएम मोदी ने 'सेवा तीर्थ' में केंद्रीय मंत्रिपरिषद के दो दिवसीय 'चिंतन शिविर' की अध्यक्षता की. करीब साढ़े चार घंटे चली बैठक में सरकार के कामकाज, योजनाओं और शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर मंथन हुआ. पीएम मोदी ने मंत्रियों से सीधे संवाद कर जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया.
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PM Modi Chintan Shivir: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर आज दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं, तो इसके पीछे सबसे बड़ा और मुख्य कारण है उनकी अपने कामकाज और ज़िम्मेदारियों के प्रति अटूट मेहनत. पीएम मोदी शायद ही पहले ऐसे प्रधानमंत्री होने जो अपने पद के काम के अलावा पार्टी संगठन और मंत्रियों के कामकाज की ख़ुद समीक्षा भी करते हैं और समय-समय पर अपने साथियों को जनता की सेवा को लेकर नसीहत भी देते हैं. ऐसा ही कुछ वाक्या एक बार फिर हुआ जब बुधवार की शाम पीएम मोदी ने सरकार के कामकाज को और बेहतर बनाने और आने वाले समय की प्राथमिकताएं तय करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 'सेवा तीर्थ' में केंद्रीय मंत्रिपरिषद के दो दिवसीय 'चिंतन शिविर' की अध्यक्षता की.
हर टेबल पर ख़ुद पहुंचे PM मोदी
बैठक में सरकार की योजनाओं की स्थिति से लेकर शासन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. यह मंथन आज यानी गुरुवार को भी जारी रहेगा. करीब साढ़े चार घंटे चली बैठक में केंद्रीय मंत्रियों को आठ अलग-अलग समूहों में बांटा गया था. हर समूह के लिए अलग टेबल तय की गई थी. प्रधानमंत्री मोदी खुद एक-एक टेबल पर पहुंचे और मंत्रियों के साथ सीधे बातचीत की. इससे बैठक सिर्फ औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के कामकाज को लेकर सीधे विचार-विमर्श भी हुआ. मुख्य बैठक खत्म होने के बाद भी चर्चा का सिलसिला जारी रहा. अलग-अलग समूहों के मंत्रियों ने अपने आवास पर आंतरिक बैठकों के जरिए संबंधित विषयों पर आगे की बातचीत की.
हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे सरकारी योजनाओं का लाभ
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जनहित को सरकार के कामकाज के केंद्र में रखने पर जोर दिया. टीवी9 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी ने इस बैठक में मंत्रियों से कहा कि सरकारी योजनाओं का असली मकसद तभी पूरा होगा, जब उनका लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे. इसके लिए योजनाओं की निगरानी, बेहतर क्रियान्वयन और लोगों तक उनकी जानकारी पहुंचाने पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई. इसके साथ ही उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण बात को एक बार फिर दोहराया, उन्होंने बैठक में मौजूद मंत्रियों से कहा कि आप लोग अपने-अपने क्षेत्र का दौरा बढ़ाइए. जितना हो सकते जनता से सीधा संपर्क साधते रहिए.
गवर्नेंस समेत इन मुद्दों पर हुआ मंथन
चिंतन शिविर के पहले दिन मुख्य फोकस 'गवर्नेंस' पर रहा. इसमें हितधारकों की भागीदारी बढ़ाने, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल बनाने, नीतिगत पहलों को प्रभावी तरीके से लागू करने और शिकायतों के समाधान की व्यवस्था मजबूत करने पर चर्चा हुई. इसके साथ ही 'जन विश्वास से जन आधार', सरकारी योजनाओं की डिलीवरी, महिलाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दे तथा प्रभावी संचार भी चर्चा के अहम विषय रहे. इन मुद्दों पर विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ सचिवों के समूह, कैबिनेट सचिवालय और नीति आयोग से मिले इनपुट के आधार पर विचार किया गया.
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बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस चिंतन शिविर का मकसद सिर्फ मौजूदा कामकाज की समीक्षा करना नहीं है, बल्कि 'विकसित भारत@2047' के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आगे की दिशा तय करना भी है. बाकी विषयों पर 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को अगले चरण में चर्चा होने की संभावना है. ऐसे में आने वाले दिनों में इन बैठकों से निकलने वाली प्राथमिकताओं और उनके अमल पर खास नजर रहेगी.