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वनटांगियों संग दीपावली की खुशियां साझा करेंगे CM योगी, सांसद के रूप में शुरू किया सिलसिला

मुख्यमंत्री रविवार (8 नवंबर) को एक बार फिर जंगल तिकोनिया नंबर तीन पहुंचकर वनटांगिया परिवारों के साथ दीपोत्सव मनाएंगे और दशकों तक वंचित रहे इस समुदाय के लोगों के साथ दीपावली की खुशियां साझा करेंगे. इस अवसर पर वह 82.41 करोड़ रुपये की लागत वाली 52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे.

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07 Nov 2026
( Updated: 07 Nov 2026
05:02 PM )
वनटांगियों संग दीपावली की खुशियां साझा करेंगे CM योगी, सांसद के रूप में शुरू किया सिलसिला
Image Credit: NMF Input
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गोरखपुर जनपद मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर कुसम्ही जंगल के बीच बसे वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन के लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन की उत्साहपूर्वक प्रतीक्षा कर रहे हैं. गांव में उल्लास और उमंग का माहौल है. वजह भी खास है. सीएम योगी हर साल इस वनटांगिया गांव में दीपावली मनाने आते हैं. यहां हर घर में दीपों की रोशनी अपने 'योगी बाबा' के नाम समर्पित होती है. मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए प्रशासन अपनी तैयारियों में जुटा है तो गांव के लोग भी अपने घर-द्वार को साफ-सुथरा बनाने, रंग-रोगन करने और सजाने-संवारने में लगे हैं. पूरा गांव मिल-जुलकर अपने प्रिय अतिथि की अगवानी की तैयारी कर रहा है.

मुख्यमंत्री रविवार (8 नवंबर) को एक बार फिर जंगल तिकोनिया नंबर तीन पहुंचकर वनटांगिया परिवारों के साथ दीपोत्सव मनाएंगे और दशकों तक वंचित रहे इस समुदाय के लोगों के साथ दीपावली की खुशियां साझा करेंगे. इस अवसर पर वह 82.41 करोड़ रुपये की लागत वाली 52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे. इनमें वनटांगिया गांव की बाहरी कनेक्टिविटी के लिए इंटरलॉकिंग सड़क, कुसम्ही जंगल में ईको पार्क और पिपराइच में वैश्विक नगर बाजार का निर्माण शामिल है. जंगल तिकोनिया नंबर तीन में बतौर सांसद और गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया समुदाय के साथ दीपावली मनाने की जो परंपरा शुरू की थी, वह मुख्यमंत्री बनने के बाद भी अनवरत जारी है. उनकी दीपावली की शुरुआत इसी गांव से होती है. इस बार भी सीएम योगी के आगमन को लेकर गांव का हर व्यक्ति उत्साहित है. प्रशासन के साथ ग्रामीण भी अपने 'बाबा' के स्वागत के लिए घर-आंगन को सजाने-संवारने में जुटे हैं. ऐसा होना स्वाभाविक भी है, क्योंकि करीब सौ साल तक उपेक्षा और बदहाली का सामना करने वाले वनटांगिया समुदाय को नागरिक का दर्जा दिलाने और समाज व विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों में योगी आदित्यनाथ की अहम भूमिका रही है.

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वनटांगियों ने बसाया जंगल, लेकिन बना रहा बेदखली का भय

ब्रिटिश हुकूमत के दौरान जब रेल पटरियां बिछाई जा रही थीं, तब रेलवे स्लीपर बनाने के लिए जंगलों से बड़े पैमाने पर साखू के पेड़ों की कटाई हुई. इसकी भरपाई के लिए अंग्रेज सरकार ने साखू के नए पौधे लगाने और उनकी देखरेख करने के लिए गरीब भूमिहीनों और मजदूरों को जंगल में बसाया. साखू के जंगल विकसित करने के लिए वर्मा देश की 'टांगिया विधि' का इस्तेमाल किया गया. इसी विधि से जंगल में रहकर पौधों की देखरेख करने वाले लोग वनटांगिया कहलाए. कुसम्ही जंगल के पांच इलाकों जंगल तिकोनिया नंबर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी और चिलबिलवा में वर्ष 1918 में इनकी पांच बस्तियां बसीं. इसी के आसपास महराजगंज के जंगलों में अलग-अलग स्थानों पर इनके 18 गांव भी बसे. वर्ष 1947 में देश आजाद हुआ, लेकिन वनटांगियों का जीवन गुलामी के दौर जैसा ही बना रहा. जंगल बसाने वाले इस समुदाय के पास देश की नागरिकता तक नहीं थी. नागरिकों को मिलने वाली सुविधाएं तो दूर की बात थीं. जंगल में झोपड़ी बनाने के अलावा किसी अन्य निर्माण की अनुमति नहीं थी. पेड़ों के पत्ते तोड़कर बेचने और मजदूरी करने के अलावा आजीविका का कोई दूसरा साधन भी नहीं था. इसके साथ ही वन विभाग की ओर से समय-समय पर जंगलों से बेदखली की कार्रवाई का भय भी बना रहता था.

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महाराज जी नहीं आते तो बदहाली में ही मर-खप जाते'

वर्ष 1998 में योगी आदित्यनाथ पहली बार गोरखपुर के सांसद बने. उनके संज्ञान में आया कि वनटांगिया बस्तियों में रहने वाले लोगों का जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा है. उन्होंने सबसे पहले इन बस्तियों तक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का संकल्प लिया. इस काम में उनके नेतृत्व वाली महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं एमपी कृषक इंटर कॉलेज और एमपीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़ के साथ गोरखनाथ मंदिर की ओर से संचालित गुरु श्री गोरक्षनाथ अस्पताल की मोबाइल मेडिकल सेवा को लगाया गया. जंगल तिकोनिया नंबर तीन वनटांगिया गांव में वर्ष 2003 से शुरू हुए ये प्रयास वर्ष 2007 तक आकार लेने लगे. गांव के रामगणेश बताते हैं कि वनटांगिया समुदाय पूरी तरह उपेक्षित था. वह कहते हैं, 'महाराज जी (योगी आदित्यनाथ को वनटांगिया समुदाय के लोग इसी संबोधन से बुलाते हैं) नहीं आते तो बदहाली में ही मर-खप जाते.'

सीएम योगी के संघर्षों का साक्षी है गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ

वनटांगिया समुदाय के बच्चों को शिक्षा के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योगी आदित्यनाथ को मुकदमे का सामना भी करना पड़ा. वर्ष 2009 में जंगल तिकोनिया नंबर तीन में योगी के सहयोगी वनटांगिया बच्चों के लिए एस्बेस्टस शीट डालकर एक अस्थायी स्कूल का निर्माण कर रहे थे. वन विभाग ने इस काम को अवैध बताते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया. योगी ने अपने तर्कों से विभाग को निरुत्तर किया और अस्थायी स्कूल का निर्माण हो सका. गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ के नाम से संचालित यह विद्यालय आज भी उनके संघर्षों का साक्षी है.

मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वनटांगियों संग दीपोत्सव की परंपरा कायम

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वनटांगियों को सामान्य नागरिकों की तरह अधिकार दिलाने की लड़ाई शुरू करने वाले योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2009 से इस समुदाय के साथ दीपावली मनाने की परंपरा शुरू की. इससे पहली बार वनटांगिया समुदाय के लोगों को जंगल से बाहर भी जीवन के नए रंगों का अहसास हुआ. धीरे-धीरे यह सिलसिला परंपरा बन गया. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी योगी आदित्यनाथ ने इसे जारी रखा. परिस्थितियां कैसी भी रहीं, वनटांगियों के साथ दीपोत्सव मनाने का क्रम नहीं टूटा. वनटांगिया गांव में दीपावली मनाने के दौरान मुख्यमंत्री बच्चों को मिठाई, कॉपी-किताबें और आतिशबाजी के उपहार देकर पढ़ाई के लिए प्रेरित करते हैं. साथ ही बस्ती के लोगों को भी विभिन्न सौगातें देते हैं. इस बार भी मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर ग्रामीण उत्साह के साथ स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं.

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मिटा दी सौ साल की कसक

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मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया समुदाय की सौ साल पुरानी कसक मिटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए. लोकसभा में वनटांगिया अधिकारों के लिए आवाज उठाते हुए वर्ष 2010 में उन्हें अपने स्थान पर बने रहने का अधिकार पत्र दिलाने वाले योगी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने कार्यकाल के पहले ही वर्ष में वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाया. राजस्व ग्राम घोषित होने के बाद ये वनग्राम भी उन सुविधाओं के हकदार हो गए, जो सामान्य नागरिकों को मिलती हैं. जंगल तिकोनिया नंबर तीन ही नहीं, बल्कि गोरखपुर और महराजगंज के 23 वनटांगिया गांवों में भी बदलाव दिखाई देने लगा.

योगी सरकार में वनटांगिया गांवों का हुआ कायाकल्प

अपने कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया गांवों को आवास, सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, स्ट्रीट लाइट, आंगनबाड़ी केंद्र और आरओ वाटर मशीन जैसी सुविधाओं से आच्छादित किया है. आज वनटांगिया गांवों के लोगों के पास मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान, कृषि योग्य भूमि, आधार कार्ड, राशन कार्ड और रसोई गैस जैसी सुविधाएं हैं. बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं और पात्र लोगों को वृद्धावस्था, विधवा तथा दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ मिल रहा है. अकेले जंगल तिकोनिया नंबर तीन की बात करें तो यहां लक्ष्य के सापेक्ष हर योजना की उपलब्धि शत-प्रतिशत है.

'बाबा के गोड़ पड़ल त उदयार हो गइल', लोकभाषा में झलकता है आत्मीय आभार

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जंगल तिकोनिया नंबर तीन के रामगणेश बताते हैं, 'गांव में जवन भी काम लउकत बा, सब बाबा के ही करावल है. नाइ त के पूछे वाला रहल. बाबा के गोड़ (पैर) पड़ल त समझा कि उदयार हो गइल.' गांव में सभी के लिए पक्के मकान, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, खेती के लिए जमीन का पट्टा और बच्चों के लिए स्कूल जैसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिली सौगातों का जिक्र करते हुए रामगणेश दीपावली पर मुख्यमंत्री के आगमन की चर्चा करते हुए उत्साहित हो जाते हैं. वह कहते हैं, 'अब त बाबा के बिना तिउहार (त्योहार) अधूरा लगेला.' वनटांगिया समुदाय के लोगों के मन में उनके उत्थान के लिए योगी आदित्यनाथ के संघर्षों की याद आज भी जीवंत है. रामगणेश कहते हैं, 'बाबा जी (योगी) के नजर नाही पड़त त जिनगी बदहाली के नरकवे में बीत जात.'

दीपावली पर सीएम योगी देंगे विकास कार्यों का उपहार

वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन में पारंपरिक रूप से दीपावली मनाने के साथ ही मुख्यमंत्री विकास कार्यों की सौगात भी देंगे. वह कुल 82.41 करोड़ रुपये की लागत वाली 52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे. इनमें 77 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये की लागत वाले 26 कार्यों का शिलान्यास और 4 करोड़ 43 लाख 79 हजार रुपये के 26 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है. इनमें रजही चौराहे से जंगल तिकोनिया नंबर तीन होते हुए पिपराइच मार्ग तक इंटरलॉकिंग सड़क का शिलान्यास प्रमुख है. इसके निर्माण पर 3 करोड़ 65 लाख 11 हजार रुपये खर्च होंगे. इससे वनटांगिया समुदाय के लोगों का आवागमन और सुगम होगा. इसके अलावा लोकार्पण और शिलान्यास के अधिकांश कार्य विभिन्न गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विकास से जुड़े हैं.

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कुसम्ही जंगल में ईको पार्क और पिपराइच में वैश्विक नगर बाजार का होगा शिलान्यास

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मुख्यमंत्री के हाथों दीपोत्सव के दिन जिन विकास परियोजनाओं की सौगात मिलेगी, उनमें कुसम्ही जंगल में ईको पार्क का विकास और पिपराइच नगर पंचायत में वैश्विक नगर बाजार का निर्माण भी शामिल है. मुख्यमंत्री इन दोनों परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे. ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कुसम्ही जंगल में 4 करोड़ 84 लाख 81 हजार रुपये की लागत से ईको पार्क विकसित किया जाएगा. स्विस कॉटेज और कई सुविधाओं से युक्त इस ईको पार्क में पर्यटक हरियाली से घिरे शांत वन क्षेत्र में सुकून के पल बिता सकेंगे. वहीं, पिपराइच नगर पंचायत में वैश्विक नगर बाजार के निर्माण पर 1 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपये खर्च होंगे. इसके तैयार होने से पिपराइच की बाजार व्यवस्था बेहतर होगी और स्थानीय स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.

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