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जब अपनों ने छोड़ा साथ, तब मुस्लिम महिला बनी बेटी... हिंदू बुजुर्ग को दी अंतिम विदाई

Kerala: केरल के कासरगोड गांव की इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग महिला के इस नेक काम की जमकर तारीफ़ कर रहे हैं.

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29 Jun 2026
( Updated: 29 Jun 2026
10:41 AM )
जब अपनों ने छोड़ा साथ, तब मुस्लिम महिला बनी बेटी... हिंदू बुजुर्ग को दी अंतिम विदाई
Image Source: Meta AI
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Kerala: आज के समय में जब छोटी -छोटी बातों पर धर्म और जाति को लेकर बहस छिड़ जाती है, ऐसे में केरल से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने लोगों का दिल छू लिया. यहां एक मुस्लिम महिला ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत किसी धर्म या पहचान की मोहताज नहीं होती. उन्होंने एक ऐसे हिंदू बुजुर्ग का अंतिम संस्कार पूरे धार्मिक रीति - रिवाजों के साथ कराया, जिसे मौत के बाद उसके अपने भी अपनाने नहीं आए. केरल के कासरगोड गांव की इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग महिला के इस नेक काम की जमकर तारीफ़ कर रहे हैं.

सड़क किनारे मिली थी बुजुर्ग की दर्दभरी जिंदगी

64 वर्षीय नारायणन काफी समय से बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे थे. करीब एक महीने पहले वह कासरगोड में एक दुकान के बाहर बेहद कमजोर और बीमार हालत में मिले थे. उनकी हालत देखकर स्थानीय लोगों ने वार्ड सदस्य को इसकी जानकारी दी. बात जब पंचायत सदस्य इरफाना इकबाल तक पहुंची तो उन्होंने बिना देर किए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया. एक स्थानीय चैरिटेबल संस्था के स्वयंसेवकों की मदद से नारायणन को अस्पताल पहुंचाया गया ताकि उनका इलाज शुरू हो सके.

जांच में सामने आई गंभीर बीमारी

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शुरुआत में योजना थी कि नारायणन को एक वृद्धाश्रम भेज दिया जाए, जहां उनकी देखभाल हो सके. लेकिन मेडिकल जांच में पता चला कि उन्हें कैंसर की चौथी स्टेज है और उनकी हालत बेहद नाजुक है. इसके बाद उन्हें तुरंत कोझिकोड सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन आखिरकार इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

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जब परिवार ने भी शव लेने से कर दिया इनकार

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नारायणन की मौत के बाद पुलिस ने उनके परिजनों से संपर्क किया, ताकि वे अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभा सकें. लेकिन दुख की बात यह रही कि परिवार के लोगों ने उनका शव लेने से ही इनकार कर दिया. ऐसे में पुलिस ने पंचायत सदस्य इरफाना इकबाल को अंतिम संस्कार कराने की अनुमति दे दी.
इसके बाद इरफाना ने वह किया, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी. उन्होंने खुद आगे बढ़कर नारायणन का अंतिम संस्कार एक बेटी की तरह कराया. उप्पला के हिंदू श्मशान घाट में पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान इरफाना बुर्का पहने मौजूद थीं, लेकिन उन्होंने हर धार्मिक परंपरा का पूरा सम्मान रखा.

'मैंने उन्हें एक बेटी की तरह विदा किया'

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अंतिम संस्कार के बाद इरफाना ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश भी लिखा. उन्होंने कहा कि नारायणन को विदा करने के लिए उनका कोई करीबी रिश्तेदार नहीं आया, इसलिए उन्होंने एक बेटी का फर्ज निभाते हुए उन्हें अंतिम विदाई दी..उन्होंने यह भी लिखा कि इंसानियत हमेशा धर्म और राजनीति से ऊपर होती है.
इरफाना ने कहा कि आगे भी अगर कोई बेसहारा या लावारिस बुजुर्ग मदद का मोहताज मिलेगा, तो वह बिना किसी भेदभाव के उसकी मदद करेंगी.  उन्होंने बताया कि उनकी संस्था पहले भी अलग-अलग धर्मों के लावारिस लोगों का अंतिम संस्कार उनके अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार कराती रही है. इस काम को लेकर उनके समुदाय की ओर से भी किसी तरह की आपत्ति नहीं हुई.

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