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पैरों में बेड़ियां, शरीर पर जख्म…मदरसे की चारदीवारी में खौफ का खुलासा! भागे बच्चों के बयान से मचा हड़कंप

Bihar: बिहार के दरभंगा दरभंगा के एक मदरसे से चार नाबालिग बच्चे पैरों और हाथों में जंजीर व ताला लगे होने की हालत में भाग निकले. बच्चों ने मौलाना पर मारपीट, शौचालय साफ कराने और जबरन काम कराने का आरोप लगाया है. पुलिस ने बच्चों को चाइल्ड केयर संस्थान को सौंपकर जांच शुरू कर दी है.

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22 Jun 2026
( Updated: 22 Jun 2026
09:32 AM )
पैरों में बेड़ियां, शरीर पर जख्म…मदरसे की चारदीवारी में खौफ का खुलासा! भागे बच्चों के बयान से मचा हड़कंप
Image Source: IANS
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बिहार के दरभंगा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया हैं जिसने लोगों को अंदर तक झकझोर कर रख दिया है. बहादुरपुर थाना क्षेत्र के सिनुआरा गांव में चार नाबालिग बच्चे संदिग्ध हालत में मिले, लेकिन सबसे हैरान करने वाली बता यह थी कि उनके पैरों में लोहे की जंजीरे और बड़े -बड़े ताले लगे हुए थे. गांव वालों ने जब यह नजारा देखा तो उन्हें अपनी आखों पर यकीन नहीं हुआ. कड़ी धूप में थके -हारे और भूख -प्यास से परेशान ये बच्चे सड़क किनारे बैठे थे.. उनकी हालत देखकर ग्रामीण तुरंत उनकी मदद के लिए आगे आए और उन्हें सुरक्षित जगह पर ले गए...

बच्चों ने सुनाई दर्दभरी कहानी

जब ग्रामीणों ने बच्चों से बात की तो उन्होंने जो बताया, उसे सुनकर हर कोई स्तब्ध रह गया. बच्चों ने बताया कि वे दरभंगा के अशोक पेपर मिल थाना क्षेत्र में स्थित मदरसा सैफुल उलूम के छात्र हैं. मदरसे में पढ़ाई करते हैं और वहां उन्हें कथित तौर पर जंजीरों से बांधकर रखा जाता था. बच्चों का आरोप है कि उन्हें कहीं जाने की आजादी नहीं थी और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी. मासूमों की जुबानी यह कहानी सुनकर गांव वालों का दिल पसीज गया और गुस्सा भी फूट पड़ा.
चारों बच्चे मधुबनी जिले के अररिया संग्राम गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं.. उनका कहना है कि वे किसी तरह मौका देखकर वहां से भाग निकले और काफी दूर तक पैदल चलते रहे. लंबे समय तक धूप में भटकने के कारण उनकी हालत बेहद खराब हो गई थी.

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मदरसे की चारदीवारी में खौफ का खुलासा

बच्चों ने बताया कि उन्हें अक्सर डर और दबाव में रखा जाता था. आरोप है कि जंजीरें इसलिए लगाई जाती थीं ताकि वे वहां से भाग न सकें. इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि गलती करने या विरोध करने पर उन्हें डंडों से पीटा जाता था. ग्रामीणों के मुताबिक बच्चों के शरीर पर चोट के निशान भी दिखाई दे रहे थे, जिससे उनके आरोपों को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ गई.

गांव वालों ने बच्चों को खाना और पानी दिया. कुछ लोगों ने उनके पैरों में बंधी जंजीरों और तालों को देखकर भावुकता भी जताई. स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी बच्चे के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

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पुलिस और चाइल्ड लाइन ने संभाला मामला

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घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम मौके पर पहुंची. अधिकारियों ने बच्चों से बातचीत की और उनकी स्थिति का आकलन किया. इसके बाद सभी बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराया गया और उन्हें सुरक्षा के मद्देनजर बाल गृह भेज दिया गया. प्रशासन का कहना है कि फिलहाल बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है.

मौलाना के खिलाफ मामला दर्ज, जांच शुरू

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पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए मदरसे के संचालक मौलाना कदीर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है. अधिकारियों का कहना है कि बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है. पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके.
प्रशासन का कहना है कि शुरुआती जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि यदि बच्चों के साथ किसी प्रकार का अत्याचार हुआ है तो जिम्मेदार लोगों को कानून के अनुसार सजा मिले.

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