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ममता बनर्जी का बड़ा फैसला...खुद नहीं लड़ेंगी चुनाव, इस चेहरे पर किया भरोसा; जानिए कौन हैं संचिता प्रधान डे?

Mamata Banerjee: पार्टी ने हाई प्रोफाइल नंदीग्राम सीट से संचिता प्रधान डे को अपना उम्मीदवार बनाया है. इस ऐलान के साथ ही एक बात लगभग साफ हो गई है कि पिछले 15 सालों में पहली बार ममता बनर्जी विधानसभा के अंदर नजर नहीं आएंगी.

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14 Sep 2026
( Updated: 14 Sep 2026
09:58 AM )
ममता बनर्जी का बड़ा फैसला...खुद नहीं लड़ेंगी चुनाव, इस चेहरे पर किया भरोसा; जानिए कौन हैं संचिता प्रधान डे?
Image Source:IANS
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Sanchita Pradhan Dey: पश्चिम बंगाल की राजनीति में नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बड़ा फैसला लिया है. पार्टी ने हाई प्रोफाइल नंदीग्राम सीट से संचिता प्रधान डे को अपना उम्मीदवार बनाया है. इस ऐलान के साथ ही एक बात लगभग साफ हो गई है कि पिछले 15 सालों में पहली बार ममता बनर्जी विधानसभा के अंदर नजर नहीं आएंगी. चुनाव से पहले ऐसी चर्चा जरूर थी कि ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से उपचुनाव लड़ सकती हैं, लेकिन पार्टी के उम्मीदवार के ऐलान के बाद इन अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है... 

कौन हैं संचिता प्रधान डे?

नंदीग्राम जैसी महत्वपूर्ण सीट पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सचिता प्रधान डे पर भरोसा जताया है. हालांकि, उनके राजनीतिक करियर और व्यक्तिगत जीवन के बारे में फिलहाल बहुत ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संचिता प्रधान डे ने 2023 में पंचायत चुनाव लड़ा था. उन्होंने नंदीग्राम-2 से पंचायत समिति का चुनाव भी लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें इस बार इतनी अहम विधानसभा सीट से मैदान में उतारने का फैसला किया है. वहीं, रेजीनगर सीट से टीएमसी ने रबीउल आलम चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया है.. 

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क्या अखिल गिरी को टिकट मिलने वाला था?

उम्मीदवार के ऐलान से पहले नंदीग्राम को लेकर एक और नाम काफी चर्चा में था और वह था वरिष्ठ नेता अखिल गिरी का. रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ममता बनर्जी ने खुद अखिल गिरी से फोन पर बात की थी और उन्हें कालीघाट स्थित अपने आवास पर मिलने के लिए बुलाया था.. इसके बाद यह माना जाने लगा कि शायद पार्टी उन्हें नंदीग्राम से चुनाव मैदान में उतार सकती है. अखिल गिरी ने भी कहा था कि ममता बनर्जी ने उनसे उपचुनाव को लेकर राय मांगी थी और उन्होंने अपनी जानकारी पार्टी को भेज दी थी. उन्होंने खुद को पार्टी का सच्चा सिपाही बताते हुए कहा था कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, वह उसे निभाएंगे. हालांकि, आखिरकार पार्टी ने संचिता प्रधान डे के नाम पर मुहर लगा दी.

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नंदीग्राम क्यों है इतनी अहम?

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नंदीग्राम सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि ममता बनर्जी की राजनीतिक यात्रा से जुड़ी बेहद अहम जगह है. 2007 में यहीं भूमि आंदोलन ने जोर पकड़ा था और ममता बनर्जी इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरी थीं...,इसके कुछ साल बाद 2011 में टीएमसी ने पश्चिम बंगाल की सत्ता से तीन दशक से ज्यादा पुराने वाम शासन को हटा दिया.. 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से मैदान में उतरी थीं, लेकिन उन्हें बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से हार मिली थी. इसके बाद उन्होंने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री पद बरकरार रखा था.

15 साल बाद विधानसभा से बाहर ममता

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ममता बनर्जी 2011 से लगातार बंगाल की राजनीति में सत्ता के केंद्र में रही हैं. लेकिन नंदीग्राम उपचुनाव नहीं लड़ने के फैसले के बाद पहली बार ऐसा होगा कि वह विधानसभा की सदस्य नहीं होंगी. यही वजह है कि इस चुनाव ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि बागी गुट सोमवार को किन नामों का ऐलान करता है और नंदीग्राम की यह लड़ाई आगे किस दिशा में जाती है....

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