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योगी सरकार में एक और मील का पत्थर, जनता को समर्पित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, 45 मिनट में पूरा होगा सफर

लखनऊ से कानपुर की दूरी अब महज 45 मिनट में पूरी होगी. कानपुर को जोड़ने वाला 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हो गया है.

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13 Jul 2026
( Updated: 13 Jul 2026
08:03 PM )
योगी सरकार में एक और मील का पत्थर, जनता को समर्पित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, 45 मिनट में पूरा होगा सफर
Image Source- Screengrab/Video/X
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Lucknow-Kanpur Expressway: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तेजी से विकसित हो रहे आधुनिक बुनियादी ढांचे की दिशा में 13 जुलाई सोमवार को एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया. प्रदेश की राजधानी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर को जोड़ने वाला 63 किलोमीटर लंबा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (नेशनल एक्सप्रेसवे-6) उद्घाटन के बाद जनता को समर्पित हो गया है. 

इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के साथ ही दोनों शहरों के बीच वर्षों से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात मिली है. पहले जहां यह सफर ढाई से तीन घंटे में पूरा होता था, वहीं अब महज 35 से 45 मिनट में पूरा किया जा सकता है. 

बदल जाएगा सफर का अनुभव

लगभग 1648 दिनों की कड़ी मेहनत, आधुनिक तकनीक और सूझबूझ से बने इस 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की परियोजना की नींव वर्ष 2018 में रखी गई थी. लखनऊ और कानपुर के बीच लगातार बढ़ते ट्रैफिक, घंटों लगने वाले जाम और तीन घंटे तक के सफर को देखते हुए लगभग 4,500 करोड़ रुपये की लागत से इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई थी. परियोजना का उद्देश्य दोनों महानगरों के बीच विश्वस्तरीय, सुरक्षित और तेज संपर्क उपलब्ध कराना था.

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मार्च 2019 में रखी गई थी परियोजना की आधारशिला

मार्च 2019 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना की आधारशिला रखी थी. इसके बाद दिसंबर 2020 में केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के महत्व को देखते हुए इसे नेशनल एक्सप्रेसवे-6 (एनई-6) का दर्जा प्रदान किया. 

इसी के साथ यह देश का पहला पूरी तरह से एआई और आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट से लैस एक्सप्रेव वे बनने की राह पर आगे बढ़ गया था. निर्माण कार्य को तेज गति देने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने परियोजना को दो पैकेजों में विभाजित कर दिया था. जिसके निर्माण का दायित्व पीएनसी इंफ्राटेक को सौंपा गया था. 

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NHAI ने दो पैकेजों में पूरा कराया महत्वाकांक्षी निर्माण

पहला पैकेज लखनऊ के अमौसी और शहीद पथ क्षेत्र से जुड़ा लगभग 18 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन था. घनी आबादी, यातायात और भूमि अधिग्रहण जैसी चुनौतियों के बावजूद इंजीनियरों ने आधुनिक तकनीक के सहारे इस कठिन कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया, जबकि दूसरा पैकेज लगभग 45 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड सेक्शन था, जो नई भूमि पर विकसित किया गया. 

यह मार्ग लखनऊ के 11 और उन्नाव के 31 गांवों से होकर गुजरता है. भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद वर्ष 2022 में इस हिस्से का निर्माण तेज गति से आगे बढ़ गया था. अक्टूबर 2025 तक इसका 45 किमी वाला ग्रीनफील्ड हिस्सा पूरी तरह तैयार हो चुका था. 2026 के शुरुआती महीनों में लखनऊ पैकेज के अंतिम गर्डर्स और रैंप बनाने का काम 99% तक पूरा कर लिया गया था. जून 2026 में इसका ट्रायल रन हुआ. 
 
बिना टोल प्लाजा पर रुके होगा सफर, फास्ट टैग से कटेगा टोल

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अत्याधुनिक तकनीक है. सड़क निर्माण में बड़े स्तर पर ऑटोमेटेड मशीन गाइड कंस्ट्रक्शन सिस्टम का उपयोग किया गया. कंप्यूटर और सैटेलाइट आधारित तकनीक से संचालित मशीनों ने सड़क निर्माण को अधिक सटीक, मजबूत और टिकाऊ बनाया. इससे निर्माण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ और मानवीय त्रुटियों की संभावना भी काफी कम हो गई. इस एक्सप्रेसवे की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसकी मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोलिंग प्रणाली है, यहां पारंपरिक टोल प्लाजा नहीं बनाए गए हैं. 

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वाहन बिना रुके 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक सफर कर सकेंगे और एडवांस फास्ट टैग और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) तकनीक के माध्यम से टोल खुद ही कट जाएगा. इससे यात्रियों को समय की बचत होगी, ईंधन की खपत कम होगी और टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम से भी पूरी तरह राहत मिलेगी. 

एक्सप्रेसवे के दोनों ओर लगाए 46 हजार से ज्यादा पौधे

सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से भी यह एक्सप्रेसवे देश के सबसे आधुनिक मार्गों में शामिल है. पूरे 63 किलोमीटर मार्ग पर 80 से अधिक हाई डेफिनिशन कैमरे, 16 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम और स्पीड राडार लगाए गए हैं. अगर कोई वाहन निर्धारित गति सीमा से अधिक चलता है तो कंट्रोल रूम से सीधे ऑटोमैटिक चालान कट जाएगा. इस परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया है. एक्सप्रेसवे के दोनों ओर वन विभाग के सहयोग से 46 हजार से अधिक पौधे लगाए गए हैं, ताकि सफर के दौरान यात्रियों को एक खूबसूरत ग्रीन कॉरिडोर का अनुभव मिल सके. 

स्टेट कैपिटल रीजन, निवेश और औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा लाभ लाखों यात्रियों को मिलेगा. दोनों शहरों के बीच प्रतिदिन हजारों नौकरीपेशा लोग, छात्र, व्यापारी, उद्यमी और औद्योगिक इकाइयों से जुड़े कर्मचारी सफर करते हैं। 6-लेन (भविष्य में 8-लेन विस्तार योग्य) लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय ढाई-तीन घंटे से घटकर महज 35 से 45 मिनट रह गया है. यह आधुनिक एक्सप्रेसवे प्रस्तावित स्टेट कैपिटल रीजन, औद्योगिक विकास, निवेश, तेज माल परिवहन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई गति देगा. 

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