जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

बंगाल में दुर्गा पूजा समितियों को ₹1 लाख के अनुदान का ऐलान...हिंदुओं को नहीं हुई खुशी, ममता राज से जुड़ी है वजह!

बंगाल में सभी दुर्गा पूजा समितियों को 1 लाख के अनुदान का ऐलान किया गया है. इसके बावजूद हिंदू संगठनों को खुशी नहीं हुई. ऐसा इसलिए कि जो ममता राज में मदरसा, इमामों, मुएज्जिनों की खातिरदारी हुई उसके मुकाबले ये फूटी कौड़ी के समान है.

Author
08 Sep 2026
( Updated: 08 Sep 2026
10:59 AM )
बंगाल में दुर्गा पूजा समितियों को ₹1 लाख के अनुदान का ऐलान...हिंदुओं को नहीं हुई खुशी, ममता राज से जुड़ी है वजह!
Image Source: IANS/ CANVA
Advertisement

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को राज्य की सभी सामुदायिक दुर्गा पूजा समितियों के लिए एक लाख रुपए अनुदान देने का ऐलान किया. मुख्यमंत्री ने यह घोषणा राज्य की विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद की. मुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआत में उन्होंने केवल कम बजट वाली दुर्गा पूजा समितियों को सहायता देने की बात कही थी, लेकिन अब यह अनुदान सभी सामुदायिक पूजा समितियों के लिए उपलब्ध रहेगा. 

उन्होंने बड़ी और आर्थिक रूप से सक्षम पूजा समितियों से अपील की कि वे स्वेच्छा से सरकारी सहायता लेने से इनकार करें, ताकि जरूरतमंद समितियों को अधिक लाभ मिल सके. सीएम सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "हम चाहते हैं कि यह एक लाख रुपए की सहायता उन समितियों तक पहुंचे, जो इस वित्तीय मदद के बिना पूजा का आयोजन करने में कठिनाई महसूस करती हैं."

आपको बता दें कि बंगाल में दुर्गा पूजा समितियों को दिया जाने वाला अनुदान विवादास्पद रहा है. इस पर खूब राजनीति होती आई है. हिंदू संगठनों, बीजेपी और दूसरे दलों का पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर आरोप रहा है कि ऐसा नहीं है कि ममता को इन समितियों, दुर्गा पूजा से खास लगाव है, इसलिए वो अनुदान हर साल अनुदान बढ़ाती आईं जो 2011 के 25000 से बढ़कर करीब 1 लाख तक पहुंच गया. ऐसा इसलिए है क्योंकि वो ममता को मदरसा, मुएज्जिन और माइनॉरिटी को दिए जाने वाले पैसे और वजीफे को बैलेंस और दिखावे के लिए ही बराबरी दिखाने की कोशिश थी.

ममता राज में अल्पसंख्यक विभाग के बजट में 1,111 प्रतिशत की वृद्धि!

आपको बता दें कि बंगाल में ममता राज में बीते बजट में IT एवं इलेक्ट्रॉनिक्स को महज 217 करोड़ और MSMEs को महज 1,250 करोड़ के करीब दिए गए जबकि 2026-27 के बजट Minority Affairs & Madrasah Education विभाग के लिए 5,713.61 करोड़ आवंटित किए गए. यानी कि 2011 के मुकाबले 1,111 प्रतिशत की चौंकाने वाली वृद्धि. ये राशि मुख्य रूप से मदरसों, धार्मिक शिक्षण संस्थानों और एक विशेष समुदाय के क्लेरिक्स के लिए है.

Advertisement

इमाम-मुएज्जिन वेतन योजना-हिंदू पुजारियों से इमामों को दोगुना वेतन!

इतना ही नहीं अगर ममता को दुर्गा पूजा समितियों का इतना ही ख्याल था तो हिंदू पुजारियों के साथ ऐसा भेदभाव क्यों? ममता के सत्ता में आने के बाद एक साल के अंदर 2012 में शुरू की गई इमाम-मुएज्जिन वेतन योजना को ही देख लीजिए. इसमें इमामों को 2,500 मासिक वेतन सार्वजनिक कोष से दिया जाता है, जो कि हिंदू पुजारियों को मिलने वाले वेतन से दोगुना है. कहा जाता है कि बंगाल में दशकों से निवास प्रमाण-पत्र की सख्ती नहीं होने से अवैध प्रवासियों को इन मदरसा सिस्टम के जरिए सिस्टम के अंदर लेने और फायदा पहुंचाने के लिए इतना भारी भरकम बजट की व्यवस्था की गई.

बंगाल में ममता राज में मदरसा और अल्पसंख्यक विभाग को 5,713.61 करोड़ आवंटित!

इसलिए बंगाल में दुर्गा पूजा समितियों को मिलने वाले अनुदान पर लोगों को ना कोई खुशी होती थी और ना ही कोई सवाल. ऐसे इसलिए क्योंकि बंगाल में जिस पैमाने पर एक खास धर्म को नवाजिशें होती थीं, एक खास विभाग में 5,713.61 करोड़ आवंटित किए तो सोचिए दूसरे विभाग और अन्य मद में कितनी खातिरदारी की जाती होगी. ऐसे में दुर्गा पूजा समितियों को 1 लाख दे भी दिया गया तो ये कुछ नहीं है. 

बंगाल में कितनी दुर्गा पूजा समितियां हैं?

Advertisement

बंगाल में करीब 40000 दुर्गा पूजा समितियां हैं, अकेले कलकत्ता में 3000 हैं. इन्हें हर साल सरकार से अनुदान मिलता है. ये अनुदान समितियों को मिलने वाले सब्सिडी वाले बिजली बिल, सरकारी विभागों के विज्ञापन आदि के अलावा हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि एक बार पहचान हो जाने पर, ऐसे अवैध रूप से संचालित मदरसों को बंद कर दिया जाएगा, और मदरसों के नाम पर ऐसी अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों को भी दंडित किया जाएगा.

वहीं मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य की दुर्गा पूजा समितियों को बिजली का कोई शुल्क नहीं देना होगा. साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि दुर्गा पूजा के दौरान राज्य में कहीं भी डीजे चलाने की अनुमति नहीं होगी.

19 अक्टूबर को महाअष्टमी के अवसर पर बंगाल में ड्राई डे!

Advertisement

उन्होंने कहा कि इस वर्ष 19 अक्टूबर को महाअष्टमी के अवसर पर राज्य में ड्राई डे रहेगा. इस दिन शराब की दुकानें बंद रहेंगी और पब तथा बार में भी शराब की बिक्री नहीं होगी.

मुख्यमंत्री ने कहा, "महाअष्टमी बेहद पवित्र अवसर है. इस दिन हम मां दुर्गा को पुष्प अर्पित करते हैं, इसलिए हमने इसे ड्राई डे घोषित करने का फैसला किया है. पूजा हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए जिससे इसकी भावना आहत हो."

ये भी पढ़ें: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुर्गा पूजा के लिए पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा प्लान, सांस्कृतिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

हिंदुओं को भी खुश करने के लिए दिया जाता था मामूली अनुदान!

Advertisement

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान पूजा अनुदान की व्यवस्था राजनीतिक लाभ हासिल करने का माध्यम बन गई थी. उन्होंने कहा, "पिछले शासन में यह अनुदान लगभग एक तरह की राजनीतिक बोली प्रक्रिया का रूप ले चुका था, लेकिन यह रणनीति पिछले चुनावों में सफल नहीं हुई. इसके बजाय कई पूजा समितियां सरकारी अनुदान पर निर्भर हो गईं."

ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में 18 से पहले मां बनी लड़की तो पति पर लगेगा POCSO! सरकार खुद दर्ज करेगी केस

मुख्यमंत्री के इस ऐलान को राज्य में आगामी दुर्गा पूजा तैयारियों के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा सबसे बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें हजारों सामुदायिक पूजा समितियां हिस्सा लेती हैं.

Advertisement

बंगाल में मदरसों का हो रहा सर्वे!

जहां तक मदरसों का सवाल है तो राज्य में सर्वे हो रहे हैं और कार्रवाई भी की जा रही है. इसी साल जुलाई में सुवेंदु सरकार ने अवैध और गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों की समीक्षा के लिए 18 सदस्यीय समिति गठित करने का आदेश दया था. पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग ने राज्य के 12 जिलों में संचालित अवैध और गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों की पहचान के लिए चल रहे सर्वेक्षण की समीक्षा हेतु 18 सदस्यीय समिति का गठन किया था, जिन्हें आमतौर पर 'खारिजी मदरसा' कहा जाता है.  

यह भी पढ़ें

इसके बाद 12 जिलों कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर, नदिया, हुगली, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना में समीक्षा की गई. सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जिला अधिकारियों से प्राप्त प्रारंभिक रिपोर्टों के आधार पर इन 12 जिलों की पहचान की गई है, जहां बड़ी संख्या में गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित होने की आशंका है. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
अधिक
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें