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गो संरक्षण के साथ किसानों की बंपर कमाई…. योगी सरकार ने 94,000 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती को दिया बढ़ावा

UP में एक करोड़ 90 लाख गोवंश हैं, इनके लिए योगी सरकार गो आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है. जिससे किसानों की आय भी बढ़ेगी.

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31 Mar 2026
( Updated: 31 Mar 2026
12:34 PM )
गो संरक्षण के साथ किसानों की बंपर कमाई…. योगी सरकार ने 94,000 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती को दिया बढ़ावा
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UP में गो संरक्षण और प्राकृतिक खेती को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि साल 2017 से पहले UP में गो तस्करी की घटनाएं होती थीं, लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार आने के बाद अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई कर उन्हें बंद किया गया. 

इसके बाद से गो संरक्षण की व्यवस्था मजबूत हुई है और आज प्रदेश की साढ़े सात हजार गोशालाओं में लगभग 12,58,000 गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है. 

गोशालाओं को बनाया जा रहा आत्मनिर्भर

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गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए ‘गो आधारित प्राकृतिक खेती मिशन’ तेजी से लागू किया जा रहा है. 

कितने जिलों में हो रही गो आधारित खेती? 

मौजूदा समय में पूरे उत्तर प्रदेश में करीब 94,000 हेक्टेयर क्षेत्र में गो आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर और महोबा में लगभग 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में यह अभियान संचालित है. 

श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि आने वाले समय में गो आधारित प्राकृतिक खेती ही किसानों के भविष्य की दिशा तय करेगी. एक गाय से प्रतिदिन लगभग 5 लीटर गोमूत्र और 10 किलोग्राम गोबर मिलता होता है, जो प्राकृतिक खेती के लिए बेहद जरूरी है. 

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प्रदेश में करीब 1 करोड़ 90 लाख गोवंश होने के कारण इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं. श्याम बिहारी ने बताया कि गोमूत्र और गोबर से तैयार जैविक उत्पादों के उपयोग से किसानों की लागत घट रही है और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है. इससे जहां किसानों की आय बढ़ रही है, वहीं मिट्टी की उर्वरता भी संरक्षित हो रही है. 

7,716 जगहों पर गो संरक्षण

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प्रदेश में 7,716 स्थानों पर गो संरक्षण का कार्य किया जा रहा है और गोशालाएं अब जैविक खाद उत्पादन के केंद्र के रूप में विकसित हो रही हैं. प्राकृतिक खेती के इस मॉडल से न केवल किसानों को लाभ मिल रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है. 

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