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Bihar Election Results: बिहार में फ्लॉप 'वोट चोरी' का मुद्दा, राहुल गांधी जहां गए, वहां कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त

राजद-कांग्रेस के प्रचार अभियान का मुख्य आकर्षण राहुल गांधी का 'वोट चोरी' वाला नारा था. स्वयं राहुल गांधी का बिहार का चुनावी कैंपेन 'वोट चोरी' पर केंद्रित रहा. राज्यभर में उन्होंने यात्राओं और चुनावी अभियानों से लगभग 116 विधानसभा सीटों को कवर किया.

Bihar Election Results: बिहार में फ्लॉप 'वोट चोरी' का मुद्दा, राहुल गांधी जहां गए, वहां कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त
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बिहार विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी और महागठबंधन का 'वोट चोरी' मुद्दा फ्लॉप साबित हुआ है. राज्य की जनता ने कांग्रेस-राजद के नारों पर वोट देने के बजाय नीतीश कुमार की योजनाओं और भाजपा की विकास यात्रा को समर्थन दिया है. 

महज दो सीटों पर सिमट गई कांग्रेस 

राजद-कांग्रेस के प्रचार अभियान का मुख्य आकर्षण राहुल गांधी का 'वोट चोरी' वाला नारा था.  स्वयं राहुल गांधी का बिहार का चुनावी कैंपेन 'वोट चोरी' पर केंद्रित रहा. राज्यभर में उन्होंने यात्राओं और चुनावी अभियानों से लगभग 116 विधानसभा सीटों को कवर किया. हालांकि, नतीजों के दिन कांग्रेस सिर्फ दो सीट पर बढ़त हासिल कर पाई, यानी पार्टी का स्ट्राइक रेट 2 प्रतिशत से भी कम है. 

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मतगणना के दिन दोपहर तक कांग्रेस पांच से आठ सीटों के बीच घूमती रही, लेकिन शाम 4 बजे तक पार्टी महज दो सीटों (किशनगंज और मनिहारी) पर सिमट गई. 

बिहार में कांग्रेस की अब तक की सबसे बड़ी हार 

ज्ञात हो कि 1952 में बिहार में पहली बार 239 सीटें जीतने वाली कांग्रेस पार्टी 15 साल पहले सिर्फ चार पर सिमट गई थी. 2010 में बिहार में उसे पहली बार सबसे कम सीटें मिली थीं. हालांकि, कांग्रेस का यह रिकॉर्ड इस चुनाव में टूट सकता है. शाम 4 बजे तक के चुनाव आयोग के आंकड़े नतीजों में तब्दील हुए तो यह बिहार की राजनीति में कांग्रेस की अब तक की सबसे बड़ी हार होगी. 

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दो दशकों में पार्टी को 95 हार का सामना करना पड़ा है

सिर्फ यही नहीं, राहुल गांधी के हारने के रिकॉर्ड में 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव भी शामिल हो गया है. पिछले दो दशकों में सबसे पुरानी पार्टी को 95 हार का सामना करना पड़ा है.

अमित मालवीय ने राहुल गांधी पर कसा तंज 

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इस बार भाजपा की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय तंज कसते हुए कहते हैं, "अगर चुनावी निरंतरता के लिए कोई पुरस्कार होता, तो वह (राहुल गांधी) सभी पर भारी पड़ते. इस दर पर, असफलताएं भी सोच रही होंगी कि वह उन्हें इतनी विश्वसनीयता से कैसे पा लेते हैं.”

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