‘अब भ्रष्ट हो गई राजनीति…’, सिद्धारमैया ने कर दिया संन्यास का ऐलान, नहीं लड़ेंगे 2028 का विधानसभा चुनाव
सिद्दारमैया के सक्रिय राजनीति से किनारा करने के ऐलान के बाद समर्थकों में मायूसी छा गई. सिद्दारमैया ने लिखा, आज राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार को देखते हुए, मैं 2028 के विधानसभा चुनावों में चुनाव नहीं लड़ूंगा.
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कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया अब कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे. रविवार दोपहर उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए 2028 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है. उनकी इस घोषणा के बाद कर्नाटक की सियासत में उथल-पुथल मच गई.
उधर सिद्दारमैया के सक्रिय राजनीति से किनारा करने के ऐलान के बाद समर्थकों में मायूसी छा गई. हाल ही में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनसे कम से कम एक दशक और राजनीति में बने रहने की अपील की थी.
सिद्दारमैया ने पोस्ट में क्या लिखा?
सिद्दारमैया ने अपनी पोस्ट में लिखा कि राजनीतिक जीवन के 50 साल सक्रिय रहने के बाद अब वह सक्रिय राजनीति से किनारा करेंगे लेकिन समाजसेवा में सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे. उन्होंने कहा,
ರಾಜಕೀಯ ಕ್ಷೇತ್ರ ಇಂದು ಕಲುಷಿತಗೊಂಡಿರುವುದರಿಂದ 2028ರ ವಿಧಾನಸಭಾ ಚುನಾವಣೆಯಲ್ಲಿ ನಾನು ಸ್ಪರ್ಧಿಸುವುದಿಲ್ಲ. ಆದರೆ, ಸಕ್ರಿಯ ರಾಜಕಾರಣದಲ್ಲಿದ್ದು, ಜನರ ಕಷ್ಟ, ಸುಖಗಳಿಗೆ ಧ್ವನಿಯಾಗಿ ನಿಲ್ಲುತ್ತೇನೆ.
— Siddaramaiah (@siddaramaiah) July 26, 2026
ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ಚುನಾವಣೆಯಲ್ಲಿ ಸ್ಪರ್ಧಿಸುವಂತೆ ವರುಣ ಕ್ಷೇತ್ರದ ಜನರು ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಆದರೆ ನಾನು ಇನ್ನು ಮುಂದೆ ಯಾವುದೇ… pic.twitter.com/v0S4tCQ30o
'मैं 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगा. मैं अब 79 साल का हो गया हूं. हमारी सरकार का कार्यकाल अभी डेढ़ साल और बाकी है. तब तक मैं 81-82 साल का हो जाऊंगा. मेरी सेहत वैसी नहीं रही, जैसी पहले थी. अब मेरे लिए पहले जैसा जोश और उत्साह के साथ काम करना मुमकिन नहीं है.'
राजनीति भ्रष्ट हो चुकी- सिद्दारमैया
सिद्दारमैया ने लिखा, आज राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार को देखते हुए, मैं 2028 के विधानसभा चुनावों में चुनाव नहीं लड़ूंगा. हालांकि, राजनीति में सक्रिय रहते हुए, मैं जनता के सुख-दुख में उनकी आवाज़ बनता रहूंगा. वरुणा निर्वाचन क्षेत्र के लोग एक बार फिर मुझ पर चुनाव लड़ने का दबाव डाल रहे हैं, लेकिन मैंने फैसला कर लिया है कि अब से मैं कोई भी चुनाव नहीं लड़ूंगा. पहले जब मैंने चुनाव लड़ा था, तब निर्वाचन क्षेत्र के लोगों ने ही हमें धन दिया और हमारी जीत सुनिश्चित की, लेकिन आज ऐसी स्थिति नहीं है। मैं अब 79 वर्ष का हो चुका हूं. हमारी सरकार का कार्यकाल अभी डेढ़ वर्ष शेष है. तब तक मैं 81-82 वर्ष का हो जाऊंगा. मेरा स्वास्थ्य अब पहले जैसा अच्छा नहीं रहा. पहले जैसी ऊर्जा और उत्साह से काम करना अब संभव नहीं है.
पूर्व CM ने आगे लिखा, 2028 तक मैं 82 वर्ष का हो जाऊंगा. तब मेरे राजनीतिक जीवन के 50 वर्ष पूरे हो जाएंगे. मैंने 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी.
मैंने हार और जीत दोनों देखी हैं, लेकिन मुझे इस बात का संतोष है कि मैंने अपने सिद्धांतों के विरुद्ध कोई कार्य नहीं किया और न ही अपनी अंतरात्मा के साथ विश्वासघात किया, अब समय आ गया है कि अगर हम चुनाव लड़ेंगे तो हमें जनता को धन देना पड़ेगा. आज की राजनीति पूरी तरह भ्रष्ट हो चुकी है. ईमानदार राजनीति का कोई अस्तित्व नहीं दिखता. इसी पृष्ठभूमि में मैंने भविष्य के चुनावों में न लड़ने का निर्णय लिया है. पांच दशकों से राज्य की जनता ने मुझे अपने बीच का ही माना है और स्नेहपूर्वक मेरा मार्गदर्शन किया है. यह ऋण मुझ पर है, इसलिए मेरा भविष्य का जीवन भी जनसेवा के लिए समर्पित होगा.
समर्थकों की अपील के बाद सिद्दारमैया ने क्या कहा?
समर्थकों की अपील के बाद भी सिद्दारमैया अपने फैसले पर अडिग रहे और संकेत दिया कि 2028 का चुनाव उनके चुनावी राजनीतिक सफर का आखिरी पड़ाव नहीं बल्कि उससे पहले ही वह चुनावी राजनीति से संन्यास ले लेंगे.
रैली में की थी रिटायरमेंट की बात
सिद्दारमैया ने मांड्या में आयोजित दिवंगत केआर पेटे कृष्णा की जयंती कार्यक्रम के दौरान अपनी राजनीतिक पारी को विराम देने की बात कही थी. तभी कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों ने उनसे अपना फैसला बदलने का आग्रह किया और भविष्य में भी चुनाव लड़ते रहने की अपील की लेकिन उन्होंने दोहराया कि वह 2028 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं होंगे.
उनके इस बयान को कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है. लंबे समय से राज्य की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे सिद्दारमैया ने अपने बयान से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अब चुनावी राजनीति से दूरी बनाने की तैयारी कर चुके हैं.
बता दें कि कर्नाटक विधानसभा का अगला चुनाव मई 2028 तक होने की संभावना है. मौजूदा विधानसभा का पांच वर्षीय कार्यकाल 13 मई 2028 को खत्म होगा. जिसके बाद नई विधानसभा के गठन के लिए चुनाव कराए जाएंगे.
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कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 निर्वाचित सीटें हैं. इनमें 36 सीटें अनुसूचित जाति और 15 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. राज्य में सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को 113 सीटों का बहुमत हासिल करना आवश्यक होता है. सिद्दारमैया के इस फैसले के बाद अब कर्नाटक की राजनीति में यह चर्चा तेज हो गई है कि 2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का नेतृत्व कौन करेगा और पार्टी चुनावी रणनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाएगी.
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With IANS Input